समाजवादी पार्टी या भाजपा आखिर किसके साथ है यादव वोटबैंक?

यादव वोट बैंक लंबे समय तक समाजवादी पार्टी के साथ रहा है लेकिन अब बीजेपी ने इसमें सेंध लगा ली है, लोकसभा चुनाव में उसे यादवों का कितना समर्थन मिला?

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: June 4, 2019, 2:40 PM IST
समाजवादी पार्टी या भाजपा आखिर किसके साथ है यादव वोटबैंक?
ओबीसी में सबसे प्रभावी जाति है यादव!
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: June 4, 2019, 2:40 PM IST
यूपी का यादव वोटबैंक एक बार फिर बहस में है. बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी की समीक्षा बैठक में कह दिया है कि सपा से गठबंधन का कोई फायदा नहीं हुआ. वोट ट्रांसफर का फार्मूला सफल नहीं रहा. तमाम जगह यादव वोट बसपा को नहीं मिले, यहां तक कि सपा के साथ भी पूरी तरह से नहीं रहे वरना डिंपल यादव कन्नौज से और मुलायम परिवार के लोग अन्य सीटों से चुनाव नहीं हारते...मायावती का यह चुनावी आरोप अगर सही है तो फिर यादव वोट गया कहां? यादव तो सपा के पारंपरिक वोटर हैं. क्या 2019 के लोकसभा चुनाव में यादव बीजेपी के साथ शिफ्ट हो गए?

सवाल यह भी है कि क्या यादव सिर्फ समाजवादी पार्टी को वोट देते रहे हैं? इस वोटबैंक पर क्या सपा का ही एकाधिकार है? उत्तर प्रदेश की सियासत में यादव क्यों इतने अहम हैं और इनकी राजनीति क्यों सिर्फ एक परिवार तक सिमट जाती है. दरअसल, कोई भी जाति पूरी तरह से किसी एक पार्टी के साथ नहीं रहती. यादवों के साथ भी ऐसा ही था. सीएसडीएस के एक सर्वे के मुताबिक 2009 के लोकसभा चुनाव में सबसे अधिक 73 फीसदी यादव समाजवादी पार्टी के साथ थे. जबकि सिर्फ 6 फीसदी यादव वोट बीजेपी के साथ आया था. कांग्रेस के पास 11 और बसपा के पास सिर्फ पांच फीसदी यादव थे. (ये भी पढ़ें: इस राज्य के हर किसान परिवार को मिलेंगे सालाना 12000 रुपए!)

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लेकिन 2014 आते-आते बीजेपी ने सपा के इस गढ़ में सेंध लगा ली थी. सपा के पास सिर्फ 53 फीसदी यादव रह गए और बीजेपी के साथ 6 से बढ़कर 27 फीसदी हो गए. कांग्रेस के पास आठ और बसपा के पास महज तीन फीसदी ही यादव वोटर रह गए. बीजेपी ने ग्वाल, ढढोर गोत्र के नाम पर इन्हें तोड़ने की कोशिश की. इस जाति के अंदर छोटे-छोटे संगठन बनवाकर उनमें बेचैनी पैदा की गई और इस 2019 के चुनाव में रिकॉर्ड यादव मतदाताओं ने बीजेपी को वोट किया. सेंटर फॉर द स्‍टडी ऑफ सोसाइटी एंड पॉलिटिक्‍स के निदेशक प्रोफेसर एके वर्मा के मुताबिक करीब 33 फीसदी यादवों वोटरों ने बीजेपी को वोट दिया.

शायद इसीलिए यादवलैंड में भी इस बार बीजेपी की आंधी चली. उसने सपा से कन्नौज, बदायूं और फिरोजाबाद जैसी उसकी पारंपरिक सीटें छीन लीं. वर्मा कहते हैं, "लोकसभा चुनाव के मद्देनजर एसपी-बीएसपी ने गठबंधन तो कर लिया था लेकिन जनता के सामने कोई स्पष्ट एजेंडा रखने में नाकाम रहे. जबकि बीजेपी का एजेंडा साफ था. लोगों के सामने क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय पार्टी को चुनने का मामला था, जिसमें उन्होंने बीजेपी को चुना. विपक्षी नेता मोदी को निशाना बनाते रहे, लेकिन जनता को यह बताने में नाकाम रहे कि अगले पांच साल के लिए उनका रोडमैप क्या है. बीजेपी की जीत किसी लहर से ज्यादा उसके काम से है, जो उसने बीते कुछ सालों में जमीन पर किए हैं."

...तो क्या यादव वोटबैंक में ऐसे लगी सेंध?

'24 अकबर रोड' के लेखक रशीद किदवई कहते हैं, "मुलायम सिंह यादव से पहले भी यादव राजनीतिक रूप से जागरूक थे, लेकिन उनके आने के बाद वे एकदम से गोलबंद हो गए. इसीलिए बीजेपी इन पर लगातार डोरे डाल रही है और चुनावी सर्वे बताते हैं कि वो इसमें कामयाब भी दिख रही है. यादव वोटबैंक में सेंध लगाने में वो इसलिए कामयाब है क्योंकि यादवों की हिंदू धर्म में गहरी आस्था है. वे श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानते हैं, ऐसे में बीजेपी धर्म और आस्था के बल पर आसानी से उनके नजदीक हो जाती है. ग्वाल, ढढोर को लेकर जो स्पेस बन रहा है उसमें भी वो सेंध लगा रही है. एक और बड़ा तर्क ये है कि मुलायम सिंह और अखिलेश पूरे यूपी के यादवों को बराबरी की नजर से शायद नहीं देख पाए. इसलिए वो यादव बीजेपी की तरफ गए."
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बीजेपी का 'यादववाद'

बीजेपी में राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े नेता हैं भूपेंद्र यादव, जो पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की कोर टीम का हिस्सा हैं. उनका नाम नए अध्यक्ष की रेस में भी है. फिलहाल उनके पास महासचिव पद की जिम्मेदारी है. वो बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल हैं. मोदी सरकार पार्ट-2 में दो यादवों को मंत्री भी बनाया गया है. राव इंद्रजीत सिंह और नित्यानंद राय (यादव हैं) को  अहम विभाग दिए गए हैं. यूपी से हरनाथ यादव राज्यसभा सदस्य हैं और सुभाष यदुवंश भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष हैं.

यूपी में बीजेपी लगातार इस जाति में पैठ बनाने की कोशिश करती नजर आ रही है. लेकिन योगी सरकार में सिर्फ एक यादव, गिरीशचंद्र यादव को ही बनाया गया है.  17वीं लोकसभा के चुनाव के लिए बीजेपी ने यूपी में जिन 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की थी उसमें एक भी यादव का नाम नहीं था.

समाजवादी पार्टी का 'यादववाद'

पिछले सप्ताह मुझे कन्नौज का रहने वाले एक यादव टैक्सी ड्राइवर मिला. बातचीत का सिलसिला डिंपल यादव की हार से शुरू हुआ. ड्राइवर ने बताया कि यादवों ने भी डिंपल को इसलिए वोट नहीं दिया क्योंकि यहां सबकुछ इसी यादव परिवार के पास है. सारे अधिकारी, ठेकेदार, ब्लॉक के नेता, जिला परिषद के नेता... सब इन्हीं के परिवार और रिश्तेदार वाले यादव हैं. इसलिए एक बार बीजेपी को देख रहे हैं. इस बात की तस्दीक इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सभाजीत यादव भी करते हैं. वो कहते हैं कि मुलायम सिंह का यादव प्रेम सिर्फ अपने परिवार तक सीमित है. ये बात सच है कि ज्यादातर यादव सपा के साथ जुड़े हैं लेकिन इसमें उसका नुकसान भी है. अब देखिए वर्तमान सरकार में वे कहां हैं?

सपा के साथ क्यों रहे यादव?

ऑल इंडिया यादव महासभा के राष्ट्रीय महासचिव प्रमोद चौधरी कहते हैं, "यादव सभी पार्टियों में हैं लेकिन यूपी में ज्यादा झुकाव इसलिए सपा की तरफ है क्योंकि इसमें यादव लीडरशिप है. उनकी बड़ी भागीदारी है." जब मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव का शासन आया तो यादवों का शासन में बोलबाला था. यादव डीएम, यादव एसपी, यादव तहसीलदार और यादव दारोगा...

'द समाजवादी पार्टी: ए स्टडी ऑफ इट्स सोशल बेस आईडियोलॉजी एंड प्रोग्राम' नामक पुस्तक में डॉ.शफीउज्जमान ने पीएसी और यूपी पुलिस में सपा के शासन ( जून-जुलाई 1994) के दौरान हुई भर्तियों का जो ब्योरा दिया है, उससे साफ होता है कि सपा की तरफ यादव वोटों का ध्रुवीकरण तेजी से क्यों हुआ? इसके मुताबिक 3181 लोगों की भर्ती में 1298 यादव थे. इसमें गैर यादव ओबीसी सिर्फ 64 थे. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यादव सपा से अनायास ही नहीं जुड़े.

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ओबीसी में सबसे जागरूक जाति

यूपी की तमाम ओबीसी जातियों में यादवों की हिस्सेदारी क़रीब 20% है. यूपी की कुल आबादी में करीब 8 से 9% यादव वोटर इतने गोलबंद हैं कि मंडल से पहले और उसके बाद, राजनीति के दोनों कालखंडों में उनका असर रहा है. यूपी में पांच बार उनके सीएम रहे हैं. छोटी बड़ी 5 हजार से अधिक जातियों वाले समूह ओबीसी में सबसे ज्यादा राजनीतिक चेतना यादवों में देखी गई है. इसीलिए यूपी जैसे राज्य, जहां आजादी के बाद से लगातार सवर्ण ही सीएम बनते आ रहे थे, वहां 1977 में रामनरेश यादव के हाथ सत्ता की बागडोर लग गई. यूपी की पोस्ट मंडल पॉलिटिक्स में मुलायम सिंह यादव परिवार का दबादबा बनने लगा.

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First published: June 4, 2019, 11:12 AM IST
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