हिजाब की वजह से चली गई हाथ में आई हुई नौकरी, पढ़िए गज़ाला अहमद के साथ भेदभाव की कहानी
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हिजाब की वजह से चली गई हाथ में आई हुई नौकरी, पढ़िए गज़ाला अहमद के साथ भेदभाव की कहानी
एएमयू स्टूडेंट गजाला अहमद के साथ भेदभाव की कहानी

एएमयू की छात्रा रहीं गजाला अहमद ने अपनी यह पीड़ा सोशल मीडिया पर शेयर की है. कहा-ड्रेस नहीं काबिलियत से मिलनी चाहिए नौकरी

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 5, 2020, 2:26 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण के संकट काल में भी प्रतिभा के दम पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से पढ़ी गजाला अहमद को नौकरी मिल गई थी. सैलरी भी अच्छी खासी तय हुई थी. काम भी गजाला की पसंंद का था. बड़े अखबार और चैनल में इंटर्नशिप (Internship) करने के बाद उसे यह पहली नौकरी मिल रही थी. टेलीफोन पर हुए इंटरव्यू के बाद एक ही दिन में सब कुछ तय हो गया था. लेकिन सिर पर पहने जाने वाले हिजाब (Hijab) के चलते गजला को नौकरी नहीं मिली.

नौकरी काबिलियत से मिलनी चाहिए, ड्रेस देखकर नहीं

एएमयू से मास कम्युनिकेशन करने वाली गजाला ने न्यूज18 हिंदी को बताया कि इंटरव्यू में जब सब तय हो गया तो मैंने अपनी ही तरफ से पूछा था कि मेरे हिजाब पहनने से कंपनी को कोई परेशानी तो नहीं होगी. मैं मजहबी लिहाज से हमेशा हिजाब पहनती हूं. जिस पर मुझे दी जा रही नौकरी से मना कर दिया गया. मेरा मानना है कि नौकरी किसी की भी काबिलियत को देखकर दी जानी चाहिए, न कि उसकी ड्रेस को देखकर. गजला ने बताया कि वो अंग्रेजी के एक बड़े अखबार और हिंदी न्यूज चैनल में इंटर्नशिप कर चुकी हैं. वहां पर ऐसी कोई शर्त नहीं थी.



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सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है गजाला की यह पीड़ा

एएमयू की छात्रा रहीं गजाला ने अपनी यह पीड़ा सोशल मीडिया पर शेयर की है. अपने फेसबुक और ट्विटर अकाउंट पर गजाला ने यह सारी बातें लिखी हैं. इससे पहले भी हिजाब को लेकर और मुस्लिम नाम को लेकर नौकरी के दौरान विवाद होते रहे हैं. गजाला को कंपनी ने कहा, इं‍डियन मीडिया में हिजाब नहीं चलता है. कोई भी चैनल अपनी एंकर से हिजाब में एकरिंग नहीं कराता है. जैसा आप कह रही हैं अगर मैं अपने यहां हिजाब में एकरिंग करता हूं तो वो बंद हो जाएगा. बड़े-बड़े चैनल भी हिजाब में एकरिंग नहीं कराते.

कौन कहता है कि हिजाब इंडियन कल्चर में नहीं 

बैकुंठी देवी कन्या कॉलेज में उर्दू की एचओडी डॉ. नसरीन बेगम कहती हैं कि जब स्कूल, कॉलेज में हिजाब को लेकर कोई परेशानी नहीं है तो फिर नौकरी में क्यों? किसने कहा यह इंडियन कल्चर में नहीं है. मुस्लिम धर्म क्या इंडिया में नहीं है. विभिन्न संस्कृति वाले हमारे देश में दर्जनों तरह के पहनावे, बोलियां और खानपान हैं. इसके बाद भी हम सादियों से एक गुलदस्ते जैसे रहते हुए चले आ रहे हैं. हिजाब की वजह से नौकरी न देना भेदभाव है.

दूसरी ओर, एएमयू के छात्र नेता राजा भईया ने कहा कि एक तरफ हम महिला सशक्तिकरण पर डिबेट करते हैं तो दूसरी ओर हिजाब की वजह से नौकरी नहीं देते. हम यह कैसा समाज बना रहे हैं जहां पहनावे, रंग और खानपान को लेकर इतने भेदभाव हो रहे हैं.
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