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Exclusive: महामारी की कगार पर खड़े 'बिलारी' में इस युवा IAS ने नहीं रखने दिया Corona को कदम

युवा आईएएस संजय मीणा मीणा की मेहनत का असर है कि आज बिलारी में कोरोना संक्रमण का एक भी केस नहीं पाया गया है.

युवा आईएएस संजय मीणा मीणा की मेहनत का असर है कि आज बिलारी में कोरोना संक्रमण का एक भी केस नहीं पाया गया है.

युवा आईएएस संजय मीणा (Sanjay Meena) के इस इम्तिहान की शुरुआत 14 मार्च को बिलारी तहसील के एसडीएम (SDM) का चार्ज लेते ही शुरू हो गई थी.

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मुरादाबाद. 2018 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Services) में शामिल होने वाले संजय मीणा (Sanjay Meena) मार्च 2020 की वह 12 तारीख कैसे भूल सकते हैं. यह वही तारीख थी जब संजय मीणा ने अपनी जिंदगी के नए सफर की शुरुआत की थी. और इस सफर का गवाह बनी थी उत्‍तर प्रदेश के मुरादाबाद (Moradabad) जिले की बिलारी (Bilari) तहसील. यह तहसील मानो संजय का इंतजार कर रही थी कि वह कब आएं और उनके हुनर का इम्तिहान हो. खैर, संजय मीणा के इस इम्तिहान की शुरुआत 14 मार्च को बिलारी तहसील के एसडीएम का चार्ज लेते ही शुरू हो गई थी. अभी उन्‍होंने इस तहसील की भौगोलिक स्थिति, आर्थिक व्‍यवस्‍था और सामाजिक संरचना को समझना शुरू ही किया था, तभी देश में फैलती कोरोना महामारी की सुगबुगाहट, दरवाजे पर दस्‍तक देने को तैयार खड़ी थी.

महज दस दिन की नौकरी में उनको इतना तो समझ गया था कि 7 लाख की आबादी वाली इस बिलारी तहसील में चुनौती इतनी आसान नहीं थी. सबसे कठिन था इस तहसील की दो जिलों के साथ गुजरती हुई सरहदों को संभालना. दरअसल बिलारी तहसील तो उत्‍तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के अंतर्गत आती है, लेकिन इसका एक छोर संभल तो दूसरा छोर रामपुर जिले की सीमाओं को छूता है. दो जिलों के बीच फंसी इस बिलारी तहसील में बाहरी लोगों की आवाजाही को रोक पाना नामुमकिन बताया जाता था. खैर, अब तक संजय मीणा ने यह ठान लिया था कि कुछ भी हो जाए, वह कोरोना के संक्रमण को अपने बिलारी की सरहद में दाखिल नहीं होने देंगे. इसी बीच, 24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में लॉकडाउन का ऐलान कर देते है.

बिलारी की तरफ बढ़ता हजारों का हुजूम
लॉकडाउन के ऐलान के साथ, दिल्‍ली-एनसीआर इलाके से हजारों लोगों का रेला उत्‍तर प्रदेश के तमाम जिलों की तरफ निकल पड़ता है. इस रेले के बड़े हिस्‍से का रुख मुरादाबाद, संभल और रामपुर की ओर भी था. चूंकि बिलारी इन जिलों के बीच में फंसा था, लिहाजा लोगों का बड़ा हुजूम बिलारी की तरफ बढ़ा चला आ रहा था. संजय मीणा को हालात भांपने में देर न लगी. उन्‍हें पता था कि इस हुजूम से एक भी शख्‍स बिना मेडिकल जांच के उनकी सरहद में दाखिल हो गया, तो कोरोना का संक्रमण उन्‍हें हराकर उनके 7 लाख अपनों तक पहुंचने में कामयाब हो जाएगा. लिहाजा, उन्‍होंने ठान लिया, कुछ भी हो, बिना जांच पूरी हुए एक भी शख्‍स बिलारी की सरहद में दाखिल नहीं होगा.

सेहत और दर्द के बीच की नई कशमकश
इस फैसले के साथ संजय मीणा के अंर्तमन में एक नयी कशमकश शुरू होती है. यह कशमकश बिलारी की तरफ बढ़ते रेले को लेकर थी. उनके दिल को यह बात कचोट रही थी कि अपना सब कुछ छोड़कर भूख और प्‍यास से लड़ते हुए ये लोग पैदल उनके दरवाजे तक पहुंचने वाले हैं. ऐसे में उनको सरहद पर रोकना कितना जायज होगा. अब संजय मीणा को एक तरह अपने 7 लाख लोगों की सेहत और जिंदगी दिख रही थी, वहीं दूसरी तरफ उन्‍हें पैदल चले आ रहे लोगों का दर्द महसूस हो रहा था. आखिर में, उन्‍होंने कड़े मन से फैसला किया कि वह अपनी सरहद में किसी को घुसने तो नहीं देंगे, लेकिन उनके दरवाजे तक आने वाले हर शख्‍स की वाजिब जरूरतों का ध्‍यान जरूर रखेंगे. फिर क्‍या था, आनन-फानन क्‍वारंटाइन सेंटर बनाने का काम शुरू कर दिया गया.

सेंटर बनने के बाद शुरू हुई नई कशमकश
दिन-रात की मेहनत के बाद 55 क्‍वारंटाइन सेंटर तैयार कर दिए गए. क्‍वारंटाइन सेंटर को बनाते समय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की तरफ से बताई गई हर बात का बारीकी से ध्‍यान रखा गया. क्‍वारंटाइन सेंटर बनते ही लोगों की जांच के लिए मेडिकल टीम भी पहुंच गई. संजय मीणा को अपनी एक कशमकश से छुटकारा मिला ही था, तभी दो बातें उनके जेहन में फिर घर कर गईं. पहली बात, हजारों की भीड़ को नियंत्रित करने को लेकर थी, जबकि दूसरी जद्दोजहद उनके खाने-पीने की समस्‍या को लेकर थी. वह अपनी इस जद्दोजहद से लड़ ही रहे थे, तभी उनका एक हाथ जिले के एसएसपी अमित कुमार पाठक ने संभाला, जबकि दूसरा हाथ उनके सहकर्मियों और तहसील के स्‍वयंसेवियों ने संभाल लिया. इन सभी ने संजय मीणा से वादा किया कि वह सब ठीक कर देंगे.

जैसा सोचा था, ठीक वैसा ही चल रहा था..
देखते ही देखते हजारों की भीड़ बिलारी की सरहद पर जमा हो गई. संजय मीणा की देखरेख में पुलिस के जवानों और स्‍थानीय प्रशासन ने उन्‍हें क्‍वारंटाइन सेंटर तक पहुंचाया. वहां मौजूद मेडिकल टीम ने सभी का टेस्‍ट शुरू कर दिया. अब तक, संजय मीणा ने जैसा सोचा था, ठीक वैसे ही सब कुछ चल रहा था. कम्‍युनिटी किचन के जरिए अब लोगों को साफ-सुथरा खाना मिलने लगा था. संजय मीणा खुद कई बार इस किचन का चक्‍कर लगाते, जिससे कहीं पर भी कमी न रह जाए. संजय मीणा अब तक के अपने काम से संतुष्‍ट थे. बकौल संजय, इस किचन के लिए पांच लाख रुपये के बजट से पूरी गंभीरता और साफ-सफाई का ध्यान रखते हुए लोगों को खाना पहुंचाया जा रहा है. खाना बनने के बाद सेंटर तक समय से पहुंचाने के लिए गाड़ी की स्थायी व्यवस्था हो गई है, जिसके माध्यम से सेंटर तक खाना पहुंचाया जाता है.

जमातियों ने खड़ी कर दी सबसे बड़ी चुनौती
तभी, कहते हैं न एक समस्‍या खत्‍म होती है, दो नई अपने आप चली आती हैं. यही, कुछ संजय मीणा के साथ हुआ. इंटेलीजेंस से एक लंबी चौड़ी सूची आ चुकी थी, जिसमें बताया गया था कि तबलीगी जमात के मरकज में शामिल होने वाले कौन-कौन से लोग उनके इलाके में मौजूद हैं. नई चुनौती आने के बाद, एसएसपी अमित कुमार पाठक के सहयोग से संजय मीणा मीणा ने नए सिरे से काम करना शुरू किया. धरपकड़ के लिए पुख्‍ता रणनीति तैयार की गई. वार्ड निगरानी समिति, ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, लेखपाल सहित तमाम लोगों को उनकी जिम्‍मेदारी समझाई गई. संजय मीणा मीणा की रणनीति काम कर गई और ज्‍यादातर संदिग्‍धों की पहचान कर उनको क्वारंटाइन सेंटर में पहुंचा दिया गया. इस तरह, बिलारी में इस दौरान, करीब 3716 लोगों की जांच की गई और 55 लोगों को क्‍वारंटाइन किया गया है. इस तरह, युवा आईएएस संजय मीणा की मेहनत का असर है कि आज बिलारी में कोरोना संक्रमण का एक भी केस नहीं पाया गया है.



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