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किसानों के मुआवजे को लेकर दोहरा मापदंड अपना रहा है प्रशासन

किसानों के मुआवजे को लेकर दोहरा मापदंड अपना रहा है प्रशासन

बेमौसम हुई बरसात और ओलावृष्टि से देहरादून जिले के किसानों की तो कमर ही टूट गई थी. वहीं सबसे ज्यादा नुकसान पछवादून क्षेत्र में हुआ, क्योंकि यहां का अधिकांश क्षेत्र ग्रामीण में आता है और सर्वाधिक खेती भी इसी क्षेत्र में होती है.

बेमौसम हुई बरसात और ओलावृष्टि से देहरादून जिले के किसानों की तो कमर ही टूट गई थी. वहीं सबसे ज्यादा नुकसान पछवादून क्षेत्र में हुआ, क्योंकि यहां का अधिकांश क्षेत्र ग्रामीण में आता है और सर्वाधिक खेती भी इसी क्षेत्र में होती है.

बेमौसम हुई बरसात और ओलावृष्टि से देहरादून जिले के किसानों की तो कमर ही टूट गई थी. वहीं सबसे ज्यादा नुकसान पछवादून क्षेत्र में हुआ, क्योंकि यहां का अधिकांश क्षेत्र ग्रामीण में आता है और सर्वाधिक खेती भी इसी क्षेत्र में होती है.

    बेमौसम हुई बरसात और ओलावृष्टि से देहरादून जिले के किसानों की तो कमर ही टूट गई थी. वहीं सबसे ज्यादा नुकसान पछवादून क्षेत्र में हुआ, क्योंकि यहां का अधिकांश क्षेत्र ग्रामीण में आता है और सर्वाधिक खेती भी इसी क्षेत्र में होती है.

    नुकसान को देखते हुए किसानों की बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा भी दिया जा रहा है. वहीं गुरुवार को एडीएम देहरादून ने विकासनगर तहसील के कर्मियों को जो निर्देश दिए उससे न सिर्फ तहसील में गतिरोध की स्थिति उत्पन्न हो गई, बल्कि किसान भी परेशान हो गए.

    दरअसल एडीएम ने कहा कि जिन किसानों के मुआवजे की रकम पांच हजार रुपए से कम है, उन्हें तो चेक वितरित कर दो पर जिन किसानों के मुआवजे की रकम पांच हजार रुपए से ज्यादा है उनका मुआवजा फिलहाल के लिए रोक दो.

    दरअसल मामला आलाधिकारियों से जुड़ा है तो एसडीएम विकासनगर मोहन सिंह बर्निया भी खुलकर तो नहीं बोले, लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा कि हम तो 85 लाख रुपए से भी ज्यादा मुआवजे के चेक वितरित कर चुके हैं और हमारी कोशिश है कि किसानों को राहत जल्द से जल्द मिले.

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