अब पलायन नहीं करना चाहते अल्मोड़ा लौटे 30 हज़ार प्रवासी... खेती करने का इरादा, करवा रहे मृदा परीक्षण
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अब पलायन नहीं करना चाहते अल्मोड़ा लौटे 30 हज़ार प्रवासी... खेती करने का इरादा, करवा रहे मृदा परीक्षण
प्रवासी अब अपना रोज़गार जिले में ही चाहते हैं. इसके लिए वह सभी विभागों से लगातार संपर्क कर रहे है.

दीपक कुमार राज्य सरकार के ऑनलाइन पोर्टल में पंजीकरण भी किया लेकिन उन्हें खुद ही दिल्ली से गाड़ी बुक कर अपने गांव आना पड़ा.

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अल्मोड़ा उत्तराखंड में पलायन प्रभावित ज़िलों में दूसरे स्थान पर है और कुमाऊं में पहले पर. यहां से लोगों ने बड़े पैमाने पर पलायन किया है. कोरोना वायरस की वजह से लगे लॉकडाउन के चलते ज़िले में लौटे करीब 30 हजार प्रवासी अब अपना रोज़गार जिले में ही चाहते हैं. इसके लिए वह सभी विभागों से लगातार संपर्क कर रहे है. कई दिनों तक बिना खाए या फिर पैदल चलकर लोग अपने घरों तक पहुंचे हैं. कई युवाओं ने तो कृषि विभाग को फोन कर कहा हैं कि वह गांवों में ही रहकर काम करना चाहते हैं, उन्हें जानकारी और मदद दी जाए.

सरकार से नहीं मिली सहायता 

दीपक कुमार दिल्ली में एक होटल में काम करते थे. होटल बंद होने के कारण वह दो महीने तक वह अपने कमरे में ही रहे. कई बार तो उन्हें खाने का सामान नहीं मिल पाता था और कई दिन उन्हें बिना खाए गुज़ारने पड़े हैं. उन्होंने राज्य सरकार के ऑनलाइन पोर्टल में पंजीकरण भी लेकिन लेकिन वहां से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला. इस पर वह खुद ही दिल्ली से गाड़ी बुक कर अपने गांव काभड़ी पहुंच गए.



दिल्ली से ही जीवन प्रकाश भी लौटे हैं. वह कुछ ही महीने पहले दिल्ली गए थे और वहां एक कंपनी में काम करते थे पिछले लॉकडाउन के साथ ही वह कंपनी बंद हो गई. अब उनके पास लौटने के भी पैसे नहीं थे इसलिए उन्होंने अपने घर से पैसे मगांए और फिर घर लौट पाए. वह अब अन्य राज्यों को नहीं जाना चाहते.



almora village, 30000 प्रवासियों के लौटने की वजह से अल्मोड़ा के गांवों में अभी चहल-पहल है.
30000 प्रवासियों के लौटने की वजह से अल्मोड़ा के गांवों में अभी चहल-पहल है.


कृषि यंत्रों की मांग 

अल्मोड़ा मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह का कहना है कि गांवों में लौटे प्रवासी मृदा परीक्षण और कृषि यंत्रों की अधिक मांग कर रहे हैं. इसके लिए वह लगातार प्रवासियों से संपर्क कर रहे हैं. युवा अब सब्ज़ी, फल के साथ ही यह जानना चाह रहे हैं कि किस चीज़ उत्पादन अधिक हो सकता है.

कोरोना संक्रमण के कारण कुछ समय तक अन्य राज्यों के हालात भी ठीक होने की उम्मीद नहीं है. ऐसे में जो प्रवासी अन्य राज्यों में जाकर अपनी रोज़ी-रोटी कमाते थे उनके सामने संकट है. अब सवाल यह है सरकार कि अपने प्रवासियों को रोज़गार दे पाएंगी या फिर उन्हें दोबारा पलायन करना पडेगा? कार्ययोजना बनाने के लिए विभागों से लेकर मुख्यमंत्री तक मैराथन बैठकें हो रही हैं और इस बार इनके परिणाम तुरंत चाहिएं.

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First published: May 26, 2020, 1:07 PM IST
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