इस आसान उपाय से बच रही है पहाड़ों में खेती... तार-बाड़ से जंगली जानवरों का आंतक लगभग खत्म
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इस आसान उपाय से बच रही है पहाड़ों में खेती... तार-बाड़ से जंगली जानवरों का आंतक लगभग खत्म
अल्मोड़ा के 7 विकासखण्डों में 2000 किसानों ने इस योजना के तहत अपने खेतों में तार-बाड़ की है.

किसानों ने जंगली जानवरों के आतंक के कारण खेती करना छोड़ दिया था और पलायन पर मजबूर हो रहे थे

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अल्मोड़ा. उत्तराखंड में पलायन की बड़ी वजह रोज़गार न होना है और इसकी बड़ी वजह लोगों का जंगली जानवरों के आंतक की वजह से खेती करना छोड़ना था. ऐसे अनगिनत उदाहण हैं कि जंगली सुअरों ने एक रात में ही पूरी तरह तैयार फ़सल को बर्बाद कर दिया. इसके अलावा दूसरे जानवर भी फसलें बर्बाद करते हैं और किसानों पर हमले करते हैं. पलायन से सर्वाधिक प्रभावित कुमाऊं के ज़िले अल्मोड़ा में इसका सस्ता और आसान उपाय ढूंढ निकाला गया है. और यह है तार-बाड़. इससे जंगली जानवरों का आतंक लगभग खत्म हो गया है और एक बार फिर खेती फ़ायदे का काम लगने लगी है.

अब तक 2000 किसानों को फ़ायदा

अल्मोड़ा में आजीविका परियोजना के तहत किसानों को 15 फ़ीट लंबा और 6 फीट चौड़ा तार-बाड़ दिया गया था. किसान ज़रूरत के अनुसार इसके बंडल ले सकते हैं जिसके लिए उन्हें काफ़ी मुनासिब भुगतान करना पड़ता है.



आजीविका परियोजना के परियोजना प्रबंधक कैलाश भट्ट के अनुसार ज़िले के 7 विकासखण्डों में 2000 किसानों ने इस योजना के तहत अपने खेतों में तार-बाड़ की है. भट्ट दावा करते हैं कि इससे किसानों को सीधा फ़ायदा हुआ है और तार-बाड़ के बाद उनके खेतों में जंगली जानवरों का आंतक नहीं के बराबर है.
सुअर ही नहीं बंदर भी खेतों से दूर

अल्मोड़ा की किसान रेखा देवी का कहना है कि गांव में पहले तो घर के पास ही आकर जंगली सुअर सब्जी और खेती को पूरी तरह से खा जाते थे. पिछले साल जबसे तार-बाड़ की है तो घर के आस-पास की सब्जी और फसल को कम नुकसान हो रहा है.

कुछ यही अनुभव किसान पूरन चन्द्र का भी है. उनका कहना है कि जंगली सुअर रात को घर के आंगन में आकर ही सब्जियों को बर्बाद कर देते थे लेकिन तार-बाड़ से नहीं आ रहा है. पूरन चंद्र कहते हैं कि अच्छी बात यह है कि बंदर भी जल्दी खेतों में तार-बाड़ को पार कर नहीं कर रहे है. उन्होंने अपने कई खेतों के किनारे तार-बाड़ से चारदीवारी की है और इससे जंगली जानवरों का आंतक बहुत हद तक कम हुआ है.

सीएम ने दी बधाई

पहाड़ों में ही हजारों की संख्या में प्रवासी लौटे हुऐ है जिसमें से कुछ युवा गांवों में सब्ज़ियों के उत्पादन को ही रोज़गार बनाना चाहते हैं लेकिन उनके सामने जंगली जानवरों का संकट है. अगर यह प्रयोग सफल रहा तो गांवों में पहाड़ में जंगली जानवरों से कुछ हद तक निजात मिल सकती हैं.

राज्य सरकार भी तार-बाड़ पर सब्सिडी दे सकती है. इस कार्य के लिए सीएम ने भी आजीविका परियोजना को बधाई दी है.
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