अल्मोड़ा हादसाः बैरिकेडिंग ही नहीं है जहां दुर्घटना हुई, ज़रा से चूके और गए खाई में

108 सेवा के कर्मचारी बताते हैं कि ये गाड़ियां साढ़े चार लाख किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर चुकी हैं और न जाने कब से रिटायरमेंट मांग रही हैं.

ETV UP/Uttarakhand
Updated: March 14, 2018, 4:48 PM IST
अल्मोड़ा हादसाः बैरिकेडिंग ही नहीं है जहां दुर्घटना हुई, ज़रा से चूके और गए खाई में
न्यूज़ 18 की पड़ताल में पीडब्ल्यूडी की भूमिका के साथ ही 108 सेवा के औचित्य पर भी पर प्रश्नचिन्ह लगता है.
ETV UP/Uttarakhand
Updated: March 14, 2018, 4:48 PM IST
रामनगर के पास अल्मोड़ा जिले के सल्ट में मंगलवार हुई बस दुर्घटना में 13 लोगों की मौत के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं. क्या इस दुर्घटना को टाला जा सकता था, क्या कुछ लोगों की जानें बचाई जा सकती थीं? न्यूज़ 18 की पड़ताल में पीडब्ल्यूडी की भूमिका के साथ ही 108 सेवा के औचित्य पर भी पर प्रश्नचिन्ह लगता है.

रामनगर से करीब 50 किलोमीटर दूर टोटाम के पास केएमओयू की बस 200 मीटर गहरी खाई में जा गिरी. स्थानीय लोगों ने पुलिस-प्रशासन और 108 सेवा को इसकी जानकारी दी. लेकिन कभी जीवनदायिनी रही 108 एंबुलेंस यहां पहुंच ही नहीं पाई.

108 सेवा के कर्मचारी बताते हैं कि ये गाड़ियां साढ़े चार लाख किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर चुकी हैं और न जाने कब से रिटायरमेंट मांग रही हैं. यह गाड़ियां अक्सर खराब रहती हैं और सही बात तो यह है कि अब पहाड़ में चलने लायक ही नहीं रही हैं जिससे घटनास्थल तक पहुंचने में अधिक समय लगता है.

यह मार्ग पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के गांव मोहनारी को भी रामनगर से जोड़ता है. इस मार्ग के चौड़ीकरण की मांग जनता लम्बे समय से करती रही है लेकिन आज तक यह नहीं हो पाया. जनता की मानें तो इस मार्ग पर खाई की ओर बैरिकेडिंग भी नहीं की गई है.

स्थानीय निवासी जगत सिंह रावत कहते हैं कि अगर पीडब्ल्यूडी ने यहां बैरिकेडिंग की होती तो इतना बडा हादसा होता ही नही. वह हादसे के लिए लोक निर्माण विभाग की लापरवाही को भी दोषी बताते हैं.

लेकिन अधिकारी मामले को टालते दिख रहे हैं. अल्मोड़ा की ज़िलाधिकारी इवा आशीष कहती हैं कि ज़िले में सड़क सुरक्षा समिति बनी हुई हैं. इस मामले में भी विभाग से स्पष्टीकरण मांगा गया है.

उत्तराखण्ड में बड़े सड़क हादसे कोई नई बात नहीं हैं. यहां के दुर्गम पहाड़ी मार्गों पर विभागीय उदासीनता के चलते ऐसे सड़क हादसे होते रहते हैं. लेकिन विभाग और सरकारें इसके प्रति संजीदा होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं जिसकी एवज में मासूम जनता को अपनी जान गंवानी पड़ रही है.

(अल्मोड़ा से किशन जोशी के साथ रामनगर से गोविंद पाटनी की रिपोर्ट)
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर