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आज़ादी की लड़ाई की गवाह रही है अल्मोड़ा जेल

ऐतिहासिक अल्मोड़ा जेल

ऐतिहासिक अल्मोड़ा जेल

आज़ादी की लड़ाई की गवाह अल्मोड़ा जेल भी रही है.मैदानी में आंदोलन कर रहे नेताओं को पहाड़ की जेलों में डाला जाता था जिससे आजादी के आंदोलन को समाप्त किया जा सके.भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, हरगोविन्द पंत,विक्टर मोहन पंत सहित सहित दर्जनों जननायक अल्मोड़ा जेल में रहे हैं.

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आज़ादी की लड़ाई की गवाह अल्मोड़ा जेल भी रही है.मैदानी में आंदोलन कर रहे नेताओं को पहाड़ की जेलों में डाला जाता था जिससे आजादी के आंदोलन को समाप्त किया जा सके.भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, हरगोविन्द पंत,विक्टर मोहन पंत सहित सहित दर्जनों जननायक अल्मोड़ा जेल में रहे हैं.इतिहास की गवाह रही जेल को पर्यटक भी देख सके लंबे समय से मांग है.स्थानीय लोग राज्य गठन से पहले से ही जेल को पर्यटकों के लिए खोलने की मांग करते रहे हैं जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और अपने आजादी के इतिहास को जानने का मौका मिलेगा.

देश की आजादी में उत्तराखण्ड की सबसे पुरानी जेलों में से एक अल्मोड़ा जेल में जननायकों को काला पानी की सजा के लिए भेजा जाता था.प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू दो बार अल्मोड़ा जेल में बंद रहे.कैदियों के लिए अलग स्थान पर जेल का निमार्ण कर जेल को पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए खोलने की मांग पुरानी रही है और वह भी सिर्फ कागजों में. आज़ादी की लड़ाई में जिले भर में अंग्रेजों के खिलाफ लोगों ने झंड़ा बुलंद किया गया था.आम जनता का कहना है कि जो भी ऐसे स्थल जो हमारी ऐतिहासिक धरोहर हैं, उनको संरक्षित करने की आवश्यकता है.

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