अल्मोड़ा: 155 साल पहले हुआ बाल मिठाई और सिंगौड़ी का आविष्कार, गांधीजी ने भी लिया था स्वाद

दुकान पर मिठाई की खरीदारी करने के लिए लोगों की उमड़ी भीड़.
दुकान पर मिठाई की खरीदारी करने के लिए लोगों की उमड़ी भीड़.

बाल मिठाई और सिंगौड़ी (Bal Sweets And Singauri) के आविष्कारक पिढ़ी के हरीश लाल साह का कहना है कि उनके बच्चों की पांचवी पिढ़ी मिठाई बेच रही है. जिस स्वरुप में पहले मिठाई बेचते थे आज भी उसी स्वरुप में मिठाई को बेच रहे हैं.

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अल्मोड़ा. सांस्कृतिक और ऐतिहासिक नगरी अल्मोड़ा (Almora) से ही बाल मिठाई और सिंगौड़ी (Bal Sweets And Singauri) का आविष्कार हुआ था. 1865 में सबसे पहले साह परिवार ने लाला बाजार में मिठाई बनाकर बेचना शुरू किया. दीपावली (Deepawali) में तो यहां के मिठाई की बात ही क्या. देश और दुनियां में अल्मोड़ा की मिठाई की मांग रहती है.

अल्मोड़ा आने वाले पर्यटक यहां की बाल मिठाई, सिंगौड़ी, चॉकलेट और खेचुआ ले जाते हैं. 1865 में लाला बाजार के साह परिवार ने मिठाई का आविष्कार किया. महात्मा गांधी ने भी 1929 में अल्मोड़ा आजादी आंदोलन में मिठाई का स्वाद लिया था. 24 नवम्बर को तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने हरीश लाल शाह को दिल्ली तीन मूर्ति भवन में बुलाकर मिठाई का स्वाद लिया. आज भी वही स्वरुप में मिठाई बिकती है.





बच्चों की पांचवी पिढ़ी मिठाई बेच रही है
बाल मिठाई और सिंगौड़ी के आविष्कारक पिढ़ी के हरीश लाल साह का कहना है कि उनके बच्चों की पांचवी पिढ़ी मिठाई बेच रही है. जिस स्वरुप में पहले मिठाई बेचते थे आज भी उसी स्वरुप में मिठाई को बेच रहे हैं.  वहीं, मिष्ठान संघ के अध्यक्ष मनोज पवार का कहना है कि अल्मोड़ा की मिठाई देश-विदेश में प्रसिद्ध है. जो भी लोग यहां आते हैं वे जरुर यहां की मिठाई को निशानी के रुप में ले जाते हैं. कई दिनों तक यहां की मिठाई खराब नही होती है.

अन्य प्रदेशों में भी यहां की मिठाई भेजते हैं
स्थानीय निवासी कैलास पाण्डेय का कहना है कि वह अपने रिस्तेदारों को अन्य प्रदेशों में भी यहां की मिठाई भेजते हैं. हर साल वह अल्मोड़ा कि मिठाई दिपावली सहित अन्य त्यौहारों में मगांते हैं. बाल मिठाई, सिगौड़ी , चाकलेट और खुचेआ का ज्रिक आते ही लोगों को अल्मोड़ा याद आ जाता है. जहां से बाल मिठाई, सिंगौड़ी का आविष्कार हुआ. आज भी कुछ पुरानी दुकानों में पांचवी पिढ़ी मिठाई की ब्रिकी कर रहे हैं. वह भी पुराने लकड़ी के मकानों में ही. देश भर में कई नई मिठाई बनी लेकिन यहां की  मिठाई आज भी लोगों के जहन में है.
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