Home /News /uttarakhand /

जड़ी-बूटी की पढ़ाई करने वाले अब बनेंगे एलोपैथिक डॉक्टर्स

जड़ी-बूटी की पढ़ाई करने वाले अब बनेंगे एलोपैथिक डॉक्टर्स

राज्य में डॉक्टर्स को भले ही सरकार बेहतर सुख-सुविधाएं देती है, मगर डॉक्टर्स प्रदेश में किसी भी कीमत पर काम करने को तैयार नहीं है. दरअसल प्रदेश के 9 पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं को बेहतर बनाने की कवायद की जा रही है, लेकिन हकीकत ये है कि पर्वतीय जिलों में डॉक्टर्स काम करने को तैयार नहीं हैं.

राज्य में डॉक्टर्स को भले ही सरकार बेहतर सुख-सुविधाएं देती है, मगर डॉक्टर्स प्रदेश में किसी भी कीमत पर काम करने को तैयार नहीं है. दरअसल प्रदेश के 9 पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं को बेहतर बनाने की कवायद की जा रही है, लेकिन हकीकत ये है कि पर्वतीय जिलों में डॉक्टर्स काम करने को तैयार नहीं हैं.

राज्य में डॉक्टर्स को भले ही सरकार बेहतर सुख-सुविधाएं देती है, मगर डॉक्टर्स प्रदेश में किसी भी कीमत पर काम करने को तैयार नहीं है. दरअसल प्रदेश के 9 पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं को बेहतर बनाने की कवायद की जा रही है, लेकिन हकीकत ये है कि पर्वतीय जिलों में डॉक्टर्स काम करने को तैयार नहीं हैं.

अधिक पढ़ें ...
    राज्य में डॉक्टर्स को भले ही सरकार बेहतर सुख-सुविधाएं देती है, मगर डॉक्टर्स प्रदेश में किसी भी कीमत पर काम करने को तैयार नहीं है. दरअसल प्रदेश के 9 पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं को बेहतर बनाने की कवायद की जा रही है, लेकिन हकीकत ये है कि पर्वतीय जिलों में डॉक्टर्स काम करने को तैयार नहीं हैं.

    अब सरकार आयुर्वेदिक डॉक्टर्स को एलोपैथिक डॉक्टर्स के विकल्प के तौर पर पेश करने जा रही है. जी हां स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी का कहना है कि आयुर्वेदिक डॉक्टर्स को एलोपैथिक दवाएं लिखने के लिए कहा गया है. आयुर्वेदिक डॉक्टर्स शिड्यूल एच की दवाएं लिखेंगे.

    उनका कहना है कि प्रदेश में डॉक्टर्स की भारी कमी चल रही है. पर्वतीय क्षेत्रों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिले, इसके लिए सरकार आयुर्वेदिक डॉक्टर्स को एक विकल्प के रूप में तलाश रही है.

    दरअसल प्रदेश में डॉक्टर्स के 60 फीसदी पद रिक्त चल रहे हैं, जिससे मरीजों को अस्पतालों में इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है. फिलहाल स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि प्रदेश में डॉक्टर्स की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है, जिससे डॉक्टर्स की कमी दूर हो सकें.

    उत्तराखंड में डॉक्टर्स की स्थिति एक अनार सौ बीमार की है. सरकार साल दर साल डॉक्टर्स की सुविधाओं को बढ़ती जा रही है, चाहें उनके प्रमोशन का मामला हो या फिर डीएसीपी लागू करने का मामला हो. सरकार डॉक्टर्स को लुभाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है, फिर भी डॉक्टर्स पर्वतीय क्षेत्रों में काम करने को तैयार नहीं है.

    ऐसे में सरकार ने एक विकल्प की तलाश की है. अब देखना होगा कि आयुर्वेदिक डॉक्टर्स कितने कारगार साबित होते हैं.

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर