Home /News /uttarakhand /

अल्मोड़ा के पाटिया गांव में खेला जाता है पाषाण युद्ध, देवीधुरा की तर्ज पर होती है 'बग्वाल'

अल्मोड़ा के पाटिया गांव में खेला जाता है पाषाण युद्ध, देवीधुरा की तर्ज पर होती है 'बग्वाल'

अल्मोड़ा

अल्मोड़ा के पाटिया गांव में बग्वाल होती है.

अल्मोड़ा के पाटिया गांव में बग्वाल की प्रथा सदियों से चली आ रही है.

    अल्मोड़ा के ताकुला विकासखंड के विजयपुर पाटिया गांव में गोवर्धन पूजा (Govardhan Pooja 2021) के दिन पाषाण युद्ध होता है. चंपावत के देवीधुरा की तर्ज पर ऐतिहासिक पाषाण युद्ध यानी बग्वाल (Bagwal) खेली जाती है. पाटिया गांव में बग्वाल की प्रथा सदियों से चली आ रही है. इस युद्ध में चार गांव के लोग हिस्सा लेते हैं और पचघटिया नदी के दोनों किनारों पर खड़े होकर एक-दूसरे के ऊपर जमकर पत्थर बरसाते हैं. जो भी दल का सदस्य पहले नदी में उतरकर पानी पी लेता है, उस दल की विजय हो जाती है.

    पचघटिया नदी के दोनों छोरों पर खड़े होकर पाटिया और कोटयूड़ा गांव के लोगों ने जमकर एक-दूसरे पर पत्थर बरसाए. इस युद्ध में कोटयूड़ा और कसून के रणबांकुरों ने पचघटिया नदी का पानी पीकर विजय हासिल की. युद्ध करीब आधे घंटे तक चला. बग्वालदेखने के लिए क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोग आते हैं.

    बताते चलें कि पाषाण युद्ध की शुरुआत पाटिया गांव के मैदान में गाय की पूजा के साथ की जाती है. इस पाषण युद्ध का आगाज बाकायदा ढोल-नगाड़ों के साथ किया जाता है, जिसके साथ युद्ध की शंखनाद होती है. इस पाषण युद्ध की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बग्वाल के दौरान पत्थरों से चोटिल होने वाले योद्धा किसी दवा का इस्तेमाल नहीं करते हैं, बल्कि बिच्छू घास व उस स्थान की मिट्टी लगाने से घाव तीन दिन बाद ठीक हो जाता है.

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर