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उत्तराखंड में गरमाई सियासत, बसपा ने अब तक नहीं खोले अपने पत्ते

उत्तराखंड में गरमाई सियासत, बसपा ने अब तक नहीं खोले अपने पत्ते

उत्तराखंड में गहराए राजनीतिक संकट को देखते हुए राजनीतिक दलों ने माथापच्ची शुरू कर दी है. कांग्रेस जहां सरकार को बचाने कोशिश कर रही है तो वहीं भाजपा सरकार को अल्पमत में होने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है.

उत्तराखंड में गहराए राजनीतिक संकट को देखते हुए राजनीतिक दलों ने माथापच्ची शुरू कर दी है. कांग्रेस जहां सरकार को बचाने कोशिश कर रही है तो वहीं भाजपा सरकार को अल्पमत में होने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है.

उत्तराखंड में गहराए राजनीतिक संकट को देखते हुए राजनीतिक दलों ने माथापच्ची शुरू कर दी है. कांग्रेस जहां सरकार को बचाने कोशिश कर रही है तो वहीं भाजपा सरकार को अल्पमत में होने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है.

    उत्तराखंड में गहराए राजनीतिक संकट को देखते हुए राजनीतिक दलों ने माथापच्ची शुरू कर दी है. कांग्रेस जहां सरकार को बचाने कोशिश कर रही है तो वहीं भाजपा सरकार को अल्पमत में होने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है. 28 मार्च को विधानसभा में में होने वाले शक्ति परीक्षण में सरकार के लिए एक-एक वोट की कीमत काफी अहम है.

    हरीश रावत को सरकार बचाने के लिए 70 सीटों वाली विधानसभा में 36 मतों की दरकार है. मगर जिस तरह से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इस सारे घटनाक्रम पर चुप्पी साध रखी है. इससे साफ है कि बसपा किसी बड़े राजनीतिक खेल का हिस्सा बनाने जा रही है.

    बसपा के प्रदेश में दो विधायक हैं, जबकि एक विधायक को पार्टी ने पहले ही बाहर का रास्ता दिखा दिया है. क्योंकि वे पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त थे. फिलहाल बसपा का कहना है कि प्रदेश की सियासत में जारी उथल-पुथल पर पार्टी की पैनी नजर है. पार्टी आलाकमान बसपा सुप्रीमो मायावती के निर्देश पर ही बसपा विधायक अपनी भूमिका को विधानसभा में तय करेंगे.

    मंगलौर बसपा विधायक सरवत करीम अंसारी का कहना है कि प्रदेश सरकार को 28 मार्च को सदन में बहुमत साबित करना है, ऐसे में पार्टी अपने पत्ते अंतिम क्षण तक नहीं खोलेगी.

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