घर में सब्जियां उगाकर दिल्ली की नौकरी से अच्छी कमाई कर रहा है अल्मोड़ा का यह किसान, प्रवासियों के लिए बना मिसाल
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घर में सब्जियां उगाकर दिल्ली की नौकरी से अच्छी कमाई कर रहा है अल्मोड़ा का यह किसान, प्रवासियों के लिए बना मिसाल
लॉकडाउन में घर वापस लौटे प्रवासियों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकते हैं धौलादेवी ब्लॉक के चमुवा के हुकुम सिंह.

2016 में दिल्ली से लौटे हुकुम सिंह (Hukum Singh) का कहना है कि वह गांव लौटे थे तो उन्होंने घर में स्वरोजगार करने की योजना बनाई थी. आज वह सब्‍जी उगाकर अच्‍छी कमाई कर रहे हैं.

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अल्मोड़ा. कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण दूसरे प्रदेशों से वापस लौटे लोगों के सामने सबसे बड़ा संकट रोज़गार है. सभी के मन में चिंता है कि यह सब कब तक चलेगा और क्या वह उत्तराखंड में कमा-खा सकेंगे या फिर उन्हें परदेस के धक्के खाने पड़ेंगे. ऐसे लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकते हैं धौलादेवी ब्लॉक के चमुवा के हुकुम सिंह. कभी दिल्ली में नौकरी करने वाले हुकुम सिंह ने गांव लौटकर सब्ज़ी उत्पादन (Vegetable production) शुरू किया और जल्द ही उनकी लगन और मेहनत का परिणाम भी सामने आ गया. आज वह घर में ही 25000 रुपये महीने से ज़्यादा की आमदनी कर रहे हैं और उन्हें आशा है कि यह बढ़ेगी ही. हां, अब हुकुम सिंह का पलायन का कोई इरादा नहीं है.

ग्राम्य परियोजना का मिला सहारा 

2016 में दिल्ली से लौटे हुकुम सिंह का कहना है कि वह गांव लौटे थे तो उन्होंने घर में स्वरोज़गार करने की योजना बनाई थी. उनकी इस इच्छा को ग्राम्य परियोजना का सहारा मिल गया. इससे उन्हें पॉलीहाउस बनाने में मदद मिली और पहले ही सीजन में उन्होंने सब्ज़ियों का अच्छा उत्पादन किया. पहले सीज़न में उन्होंने 50000 रुपये से ज़्यादा की सब्ज़ियां बेचीं.



इसे देखते हुए उन्हें इसी परियोजना के तहत दूसरा पॉलीहाउस भी मिल गया. इसके बाद उन्होंने इन दोनों पॉलीहाउस के साथ ही बाहर की ज़मीन पर मौसमी सब्ज़ियां उगाना शुरु कर दिया. अब एक सीजन में एक पॉलीहाउस से वह 60 हज़ार से अधिक की बेमौसमी सब्जी बेच देते हैं. इस बार टमाटर के रेट अच्छे मिलने से तो और भी अधिक मुनाफ़ा होने की उम्मीद है.
almora vegetables farmer, देवकी देवी का कहना है कि उनके पास आज कोई नौकरी नहीं है. घर में ही गोबर की खाद से वर्मी कम्पोस्ट बनाते हैं और उसे ही खेतों में डालते हैं.
देवकी देवी का कहना है कि उनके पास आज कोई नौकरी नहीं है. घर में ही गोबर की खाद से वर्मी कम्पोस्ट बनाते हैं और उसे ही खेतों में डालते हैं.


घर में ही मिल जाते हैं देवकी देवी को ऑर्डर 

काश्तकार देवकी देवी का कहना है कि उनके पास आज कोई नौकरी नहीं है. घर में ही गोबर की खाद से वर्मी कम्पोस्ट बनाते हैं और उसे ही खेतों में डालते हैं. इससे खेती करते हैं और टमाटर, बीन्स, भिंडी, मिर्च, धनिया सहित बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन करते हैं.

देवकी देवी कहती हैं कि सब्ज़ियों की बिक्री से उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है. कुछ लोग तो शादी विवाह में कुंतलों के हिसाब से घर में ही ऑर्डर दे जाते हैं.

वहींं, ग्राम्या परियोजना के जिला परियोजना अधिकारी एसके उपाध्याय का कहना है कि हुकुम सिंह सहित कुछ अन्य किसान अच्छी मेहनत कर रहे हैं. उन्हें बेमौसमी सब्ज़ियों के अच्छे दाम मिल जा रहे हैं. इसके साथ ही अन्य गांवों भी इस कुछ किसान बढ़िया सब्ज़ी उत्पादन कर रहे हैं. जैविक खेती के लिए क्षेत्र को विकसित किया जा रहा है.
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