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मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत कल आएंगे आइसोलेशन से बाहर, सामने हैं ये बड़ी चुनौतियां

आइसोलेशन से बाहर आते ही सीएम रावत के सामने हैं बढ़ी चुनौतियां (File)

आइसोलेशन से बाहर आते ही सीएम रावत के सामने हैं बढ़ी चुनौतियां (File)

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत मंगलवार को आइसोलेशन से बाहर आ जाएंगे. संक्रमण से बाहर आते ही तीरथ सिंह रावत के सामने जंगल में लगी आग को काबू में करने के साथ ही महाकुंभ के सफल आयोजन कराना चुनौती होगा. इसके बाद चुनाव जीतना भी बड़ी परीक्षा होगी.

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देहरादून. कोविड की चपेट में आए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत (Tirath Singh Rawat) मंगलवार को आइसोलेशन से बाहर आ जाएंगे. संक्रमण से बाहर आते ही तीरथ सिंह रावत के सामने जंगल में आग (forest fire) को काबू में करने के साथ ही महाकुंभ (Mahakumbh) के सफल आयोजन कराने में खुद को प्रूफ करने की चुनौती सामने है. इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव भी उनके कौशल की परीक्षा लेगा.

दस मार्च को सत्ता संभालने वाले सांसद से सीएम बने तीरथ सिंह रावत के आगे रुटीन से हटकर 180 दिन के भीतर पहली बडी परीक्षा खुद का चुनाव जीतकर आने की है. इसके तत्काल बाद आम चुनाव उनकी सबसे बड़ी मुश्किल है. हालांकि, तीरथ सिंह रावत इसकी तैयारियों में जुटे हुए नजर आ रहे हैं. पिछले सप्ताह सभी टॉप लेवल अधिकारियों को 75 घंटे के भीतर 75 दिन का टारगेट देना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. 75 दिन में ऑफिसर्स को कामकाज का आउटपुट देना होगा. इसमें कोई ढील न हो इसके लिए हर तीस दिन में सीएम समीक्षा मीटिंग लेंगे.

दरअसल, सीएम तीरथ रावत के सामने समय बेहद कम है और काम ज्यादा. आइसोलेशन में रहते हुए एक दिन में चार-चार मीटिंगे लेना सीएम पर बढ़ते परफार्मेंस के दबाव को दर्शाता है. सियासत की बदली हुई परिस्थितियों में जनता में बेहतर मैसेज जाए इसके लिए मंत्रियों पर भी परफार्मेंस का दबाव बनाया गया है. हर मंत्री को पांच ऐसी योजनाओं पर फोकस करने को कहा गया है, जिनसे कम समय में आऊटपुट तो निकले ही अधिक से अधिक लोगों तक उनका लाभ भी पहुंचे.



मंत्री हरक सिंह रावत कहते हैं कि सरकार के सामने समय बेहद कम है. दिसंबर में भी अगर आचार संहिता लगती है, तो तब भी बमुश्किल आठ महीने का समय बचता है. ऐसे में उन योजनाओं की हम सूची बना रहे हैं, जिनसे कम समय में अधिक से अधिक जनता तक पहुंचा जा सके. मैने अपने विभाग में फॉरेस्ट फायर मैनजेंट से लेकर प्लांटेशन, लालढांग चिल्लरखाल मोटर मार्ग, कार्बेट में टाइगर सफारी जैंसे पांच प्वाइंट चिन्हित कर लिए हैं. आने वाले दिनों में बीजेपी संगठन की भी सक्रियता बढ़ाने जा रही है. रणनीति है कि विधानसभा स्तर पर विकास यात्राएं निकालकर सरकार की उपलब्धियों और भविष्य के एजेंडे को हर दिमाग में सेट कर लिया जाए.
दूसरी ओर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कहना है कि रोड मैप तो सरकार को अफसरों को बनाकर देना चाहिए कि वो अगले 75 दिन में क्या काम चाहती है. प्रीतम सिंह कहा कहना है कि इस सरकार के पास विकास का न कोई ब्लू प्रिंट है न कोई सोच है. इसलिए अब 75 दिन हों चाहे आठ महीने ,कुछ नहीं होने वाला. प्रीतम सिंह का कहना है कि तीरथ सरकार टीएसआर सरकार का पार्ट-2 से ज्यादा कुछ नहीं है.
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