Corona के पेंडिंग सैंपल्स की संख्या रोज बढ़ रही, जानें नई टेस्टिंग लैब क्यों नहीं कर पा रही काम
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Corona के पेंडिंग सैंपल्स की संख्या रोज बढ़ रही, जानें नई टेस्टिंग लैब क्यों नहीं कर पा रही काम
अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज की टेस्टिंग लैब बनकर तैयार है. शासन से स्वीकृति मिलने पर कोरोना टेस्टिंग शुरु कर की जा सकेगी.

अल्मोड़ा में निजी संस्थाओं की मदद से मेडिकल कॉलेज की टेस्टिंग लैब बनकर तैयार हो गई है, लेकिन 3 दिन से शासन से स्वीकृति का इंतज़ार है.

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अल्मोड़ा. कुमाऊं के पहाड़ों में भी कोरोना वायरस की टेस्टिंग के लिए एक लैब तैयार हो गई है. ख़ास बात यह है कि यह लैब निजी क्षेत्र के सहयोग से बनी है. अल्मोड़ा में तैयार इस कोरोना टेस्टिंग लैब को अब तीन दिन से राज्य सरकार की हरी झंडी का इंतज़ार है ताकि यह काम शुरू कर सके. राज्य में 7000 के आस-पास कोरोना सैंपल्स टेस्टिंग के इंतज़ार में हैं. यह संख्या इसलिए नहीं बढ़ी है क्योंकि टेस्ट में देर होने के चलते ज़िलों में सैंपल भी कम ही लिए जा रहे हैं.

पहाड़ों में लैब की ज़रूरत 

अल्मोड़ा के ज़िलाधिकारी नितिन भदौरिया ने बताया कि अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज की टेस्टिंग लैब बनकर तैयार हो गयी है. सभी उपकरण खरीद लिए गए हैं और इंस्टॉल किए जा चुके हैं. इसे शुरू करने की स्वीकृति शासन से ही मिलनी है. उन्होंने कहा कि शासन को सूची भेज दी है जैसे ही शासन से स्वीकृति मिल जाएगी तो कोरोना टेस्टिंग शुरू कर दी जाएगी.



कुमांऊ के पहाड़ में अब तक कोरोना टेस्ट के लिए कोई लैब नहीं थी. एक निजी संस्था ने कोरोना टेस्टिंग के उपकरण खरीदकर बेस अस्पताल में स्थापित भी कर दिए, ताकि मरीज़ों को इसका लाभ मिल सके और पहाड़ों में भी कोरोना मरीजों की जांच हो पाए.



बढ़ते जा रहे पेंडिंग सैंपल 

दरअसल डॉक्टर सैम्पल ही कम ले रहे थे क्योंकि सैम्पलों की जांच रिपोर्ट कई दिनों बाद आ रही थी. कई बार तो एक सप्ताह का इंतजार भी सिर्फ रिपोर्ट आने का ही इंतजार करना पड़ता था. राज्य में कोरोना टेस्ट के लिए पेंडिंग सैंपल्स की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. 21 मई को यह 1600 थे, 25 मई को 3500, 29 मई को 4700, 31 मई 6100, 2 जून को 6800 और तीन जून की दोपहर तक 7004 हो गई थी. पेंडिंग सैंपल्स की संख्या बढ़ने की वजह से अब ज़िलों से सैंपल्स भेजने भी कम कर दिए जा चुके हैं.

किस बात का इंतज़ार 

संकट यह है कि राज्य सरकार के पास पैसा नहीं है कि तेज़ी से कोरोना टेस्टिंग लैब स्थापित की जा सकें. यह दिक्कत समझकर निजी संस्थाएं भी आगे आ रही हैं. निजी संस्थाएं तो टेस्टिंग लैब स्थापित करने के लिए मदद कर रही हैं लेकिन ऐसे समय में जहां बेहद तेज़ी से काम करने की ज़रूरत है, अफ़सर तीन दिन से न जाने किस बात का इंतज़ार कर रहे हैं.

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