कबाड़ से जुगाड़! जंगली जानवरों और बंदरों को भगाने के लिए किसान ने बनाया अनोखा वॉइस गन

उत्तराखंड के पहाड़ पर जंगली जानवरों और बंदरों से किसान परेशान हैं. क्योंकि उनकी खेती को नुकसान पहुंचाया जाता है.
उत्तराखंड के पहाड़ पर जंगली जानवरों और बंदरों से किसान परेशान हैं. क्योंकि उनकी खेती को नुकसान पहुंचाया जाता है.

अल्मोड़ा में जंगली जानवरों (Wild Animals) और बंदरों (Monkeys) से परेशान एक किसान ने इनसे निबटने के लिए वॉइस गन बनाया है. इसे कबाड़ से बनाया गया है.

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अल्मोड़ा. उत्तराखंड के अल्मोड़ा के पहाड़ी इलाके में किसान (Farmers) जंगली जानवरों (Wild Animals) और बंदरों (Monkeys) से परेशान हैं. जानवर और बंदर किसानों की खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं. कई किसानों ने तो जंगली जानवरों और बंदरों के आंतक से खेती करनी छोड़ दी. लिहाजा कई गांव खाली हो चुके हैं.

लेकिन इस समस्या के समाधान के लिए अल्मोड़ा के शैल निवासी किसान रविन्द्र तिवारी ने जुगाड़ लगाकर कबाड़ से वॉइस गन बनाया है, जो जंगली जानवरों और बंदरों को भगाने में काफी मददगार हो रहा है. इसकी लागत मात्र 6 सौ रुपये है. किसान इसे सात सौ में खरीद कर जंगली जानवरों और बंदरों के आतंक से मुक्ति पा सकेंगे.

बता दें कि कोरोना संक्रमण के कारण हजारों युवा शहरों से अपने गांव लौटे हैं. इनमें से कुछ ने सब्जी समेत कई अन्य चीजों की खेती शुरू की है. लेकिन जंगली सुअर और बंदरों के चलते वे परेशान हैं.



कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह ने भी माना कि जंगली जानवरों से खेती को काफी नुकसान होता है. लेकिन इस गन के उपयोग से जंगली जानवरों और बंदरों को भागया जा सकता है. इसकी प्रमाणिकता के लिए गन को विवेकानन्द पर्वतीय अनुसंधान संस्थान भेज गया है. वहां से मंजूरी मिलने के बाद किसानों को सस्ते दर पर इसे मुहैया कराया जायेगा.
जानकार भी मानते हैं कि अगर पहाड़ के गांवों को जंगली जानवर और बंदर के आंतक से निजाद मिल जाता है तो किसानों को जैविक खेती के अच्छे दाम मिल सकते हैं. गांवों में लौटे युवा खेती की तरफ रूख करेंगे. इससे पहाड़ों में रौनक लौटेगी. साथ ही युवाओं को घर में ही रोजगार मिल सकेगा.
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