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8 साल से सरकारी सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे यहां के ग्रामीण

अल्मोड़ा जिले में 14 गांवों के 242 परिवार बीते 7 साल से स्कूल और पंचायत घर में चलाने को मजबूर हैं. ग्रामीणों के पास न तो खेती करने के लिए खेत है और ना ही अन्य कोई रोजगार का साधन है.

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उत्तराखंड में अल्मोड़ा जिले के भैसियाछाना और खेरखेत में सरकारी सिस्टम की लापरवाही का खामियाजा यहां के ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है. इन गांवों के परिवार बीते 8 साल से स्कूल और पंचायत घर में चलाने को मजबूर हैं. ग्रामीणों के पास न तो खेती करने के लिए खेत है और ना ही अन्य कोई रोजगार का साधन है. इन गांवों के विस्थापन की योजना पिछले कई सालों से कागजों में ही दौड़ रही है.

बता दें कि जिले में 14 गांवों के 242 परिवारों के विस्थापन की योजना एक दशक से महज सरकारी कागजों में ही दौड़ रही है. साल 2013 में खेरखेत में पूरा पहाड़ गांव के ऊपर आ गया था, जिसके बाद ग्रामीणों को सरकारी स्कूल और पंचायत चलाने के लिए घर में शरण दी गई थी. आपदा के इस दौर में प्रभावित परिवारों की तरफ न तो सरकार ने कोई ध्यान दिया और ना ही किसी ने यहां सुध लेनी जरूरी समझा.

ऐसे में पिछले 8 वर्षों में सरकारी सिस्टम से प्रभावित परिवार अपनी आस पूरी तरह से छोड़ चुके हैं. लिहाजा, अब ग्रामीणों ने न्यूज़ 18 के माध्यम से मदद की गुहार लगाई है.

इधर, मामले में डीएम नितिन भदौरिया का कहना है कि ग्रामीण उनसे विस्थापन को लेकर कई बार मिल चुके हैं, लेकिन फैसला शासन को ही करना है. इसलिए वे चाहकर भी इसमें कुछ नहीं कर सकते.

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