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हरीश रावत ने दिया BJP को हराने का फॉर्मूला, इशारों-इशारों में पेश कर दी दावेदारी

हरीश रावत ने इशारों-इशारों में अपनी दावेदारी भी पेश कर दी है.
हरीश रावत ने इशारों-इशारों में अपनी दावेदारी भी पेश कर दी है.

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने दावा कर दिया कि अगर कांग्रेस उनके इस फॉर्मूले को स्वीकार कर लेगी तो पीएम मोदी का जादू भी राज्य में नहीं चल पाएगा. साथ ही उन्होंने इशारों-इशारों में अपनी दावेदारी भी पेश कर दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 19, 2021, 12:01 PM IST
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देहरादून. उत्तराखंड में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होना है. उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने बीजेपी के हराने का फॉर्मूला पार्टी को सुझाया है. रावत ने दावा किया कि अगर कांग्रेस उनके इस फॉर्मूले को स्वीकार कर लेगी तो पीएम मोदी का जादू भी राज्य में नहीं चल पाएगा. साथ ही उन्होंने इशारों-इशारों में अपनी दावेदारी भी पेश कर दी है.

आगामी विधानसभा चुनाव पर हरीश रावत ने कहा कि, 'मोदी जी के आने के बाद बीजेपी निकाय चुनाव को भी उनके नाम पर लड़कर लाभ ले रही है. अगर कांग्रेस स्थानीय चेहरा लाती है तो बीजेपी को भी स्थानीय चेहरा लाना पड़ेगा. फिर जनता दोनों चेहरों की खुद तुलना करेगी और मोदी जी गेस्ट आर्टिस्ट के तौर पर आएंगे और अपनी बात कहकर चले जाएंगे.'

मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने पर दिया जोर


कुल मिलाकर, रावत ने राज्य में पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की जरूरत पर जोर दिया है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर पार्टी उन्हें यह जिम्मेदारी देती है तो इसे पूरी तरह निभाएंगे, लेकिन किसी दूसरे का चयन करती है तो भी वह उसका पूरा सहयोग करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि अगर मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया तो बीजेपी अपने संगठन और धनबल की बदौलत आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पर भारी पड़ सकती है.

बीजेपी की जीत के फॉर्मूले का कोई स्थानीय तोड़ निकालना जरूरी: रावत


रावत ने ट्विटर पर लिखा, 'मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित होने को लेकर संकोच कैसा? यदि मेरे सम्मान में यह संकोच है तो मैंने स्वयं अपनी तरफ से यह विनती कर ली है कि जिसे भी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर दिया जाएगा मैं, उसके पीछे खड़ा हूंगा. रणनीति के दृष्टिकोण से भी आवश्यक है कि हम बीजेपी द्वारा राज्यों में जीत के लिये अपनाये जा रहे फॉर्मूले का कोई स्थानीय तोड़ निकालें. स्थानीय तोड़ यही हो सकता है कि बीजेपी का चेहरा बनाम कांग्रेस का चेहरा, चुनाव में लोगों के सामने रखा जाए ताकि लोग स्थानीय सवालों के तुलनात्मक आधार पर निर्णय करें. मेरा मानना है कि ऐसा करने से चुनाव में हम अच्छा कर पाएंगे.'




उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा, 'पार्टी के अधिकारिक पोस्टरों में मेरा नाम और चेहरा स्थान नहीं पा पाया. मैंने उस पर भी कभी कोई सवाल खड़ा नहीं किया! यहां तक कि मुझे कभी-कभी मंचों पर स्थान मिलने को लेकर संदेह रहता है तो मैं, अपने साथ अपना मोड़ा लेकर के चलता हूं ताकि पार्टी के सामने कोई असमंजस न आये तो आज भी मैंने केवल असमंजस को हटाया है, तो ये दनादन क्यों?'

चेहरा घोषित करने के गिनाए फायदे


रावत का कहना है कि अमरिंदर सिंह को पंजाब में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार करने पर पार्टी को फायदा हुआ. हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा का नाम आगे करने पर चुनाव में कांग्रेस बराबर की लड़ाई में आ गई. रावत के मुताबिक, पहले कांग्रेस में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की परंपरा थी, लेकिन फिर इसमें बदलाव कर दिया गया. अब हालात बदल रहे हैं तो इस परंपरा को बदलना चाहिए. चेहरा जल्द घोषित करना चाहिए.

अपने अलावा अन्य नामों के बारे में पूछे जाने पर रावत का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और विधायक की दल की नेता इंदिरा हृदयेश का स्वाभाविक नाम है. कई दूसरे नेता भी हैं. पार्टी इनमें से किसी को भी घोषित करती है तो मैं उसका पूरा सहयोग करूंगा. अब देखना यह है कि पार्टी रावत के फॉर्मूले को कितना तरजीह देती है.
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