उत्तराखंड में स्वास्थ्य सवाएं बदहाल, डॉक्टरों की कमी की वजह से फार्मासिस्ट चला रहे कई अस्पताल
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उत्तराखंड में स्वास्थ्य सवाएं बदहाल, डॉक्टरों की कमी की वजह से फार्मासिस्ट चला रहे कई अस्पताल
अल्मोड़ा जिले में 286 डॉक्टरों की आवश्कता है, जिसमें से सिर्फ 133 डॉक्टर ही जिले के अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. (सांकेतिक फोटो)

जागेश्वर से कांग्रेस विधायक गोविन्द सिंह कुंजवाल (Govind Singh Kunjwal) ने राज्य सरकार पर स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहत्तर नहीं करने का आरोप लगाया है.

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अल्मोड़ा. उत्तराखंड (Uttarakhand) में स्वास्थ्य सुविधाओं (Health Facilities) को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने है. कांग्रेस ने राज्य सरकार पर कोरोना काल में भी स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली को लेकर सवाल उठाया है. इसके बाद से भाजपा (BJP) स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार करने की बात कर रही है. जबकि कई अस्पतालों में डॉक्टरों के नहीं होने से फार्मासिस्ट ही अस्पतालों को चला रहे हैं.

अल्मोड़ा जिले में 286 डॉक्टरों की आवश्कता है, जिसमें से सिर्फ 133 डॉक्टर ही जिले के अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. यह हाल सिर्फ अल्मोड़ा का ही नहीं, बल्कि अन्य जिलों का भी ऐसा ही है. ग्रामीण क्षेत्रों के कई अस्पतालों को तो फार्मासिस्ट ही चला रहे है. डॉक्टरों की या तो कोरोना में ड्यूटी है या फिर पद रिक्त चल रहे हैं. डिप्टी स्पीकर रघुनाथ सिंह चौहान ने भी डॉक्टरों की कमी को स्वीकार किया है. और कोरोना काल में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर राज्य सरकार द्वारा बेहत्तर काम करने का दावा भी किया. इसके साथ ही कहा कि राज्य सरकार डॉक्टरों की न्युक्ति को लेकर लगातार प्रयास कर रही है. कई अस्पताल में आईसीयू और अन्य व्यवस्थायें की गई हैं.

स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहत्तर नहीं करने का आरोप लगाया
जागेश्वर से कांग्रेस विधायक गोविन्द सिंह कुंजवाल ने राज्य सरकार पर स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहत्तर नहीं करने का आरोप लगाया है. इसके साथ ही विपक्ष में बैठी कांग्रेस को कोरोनाकाल में डॉक्टरों की कमी एक मुद्दा मिल गया है. जिसे एक मुद्दा बनाकर राज्य की सरकार को घेरने का काम विपक्ष कर रहा है. खास कर ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी मुख्य मुद्दा बना रहा है. दरअसल, राज्य बनने के बाद पहाड़ों में डॉक्टरों की कमी तो आम बात है. पहाड़ के दुरस्थ गांवों में तो आज भी फार्मासिस्ट ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को चला रहे हैं. कोरोनाकाल में लोगों को कई नये अस्पताल और व्यवस्थाओं की उम्मीद थी लेकिन राज्य सरकार ने कुछ ही व्यवस्था करा पाई है, लेकिन वह ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर है.
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