अल्मोड़ाः साल दर साल बदहाल हो रही हैं स्वास्थ्य सेवाएं

नीति आयोग की रिपोर्ट से खोली सरकार के दावों की पोल, हर साल आ रही है स्वास्थ्य सेवाओं में गिरावट

Kishan Joshi | ETV UP/Uttarakhand
Updated: February 10, 2018, 2:05 PM IST
अल्मोड़ाः साल दर साल बदहाल हो रही हैं स्वास्थ्य सेवाएं
शहरी में रहने वालों के लिए हैं ये शर्तें: सरकार ने शहरी क्षेत्र में रहने वाले गरीबों को स्‍कीम का फायदा मिलेगा, गरीबों के चयन के लिए कई कैटेगरी बनाई गई हैं, कुल मिलाकर 11 कैटेगरी में शहरी गरीबों को बांटा गया है, जो इस स्‍कीम का फायदा ले सकेंगे.
Kishan Joshi | ETV UP/Uttarakhand
Updated: February 10, 2018, 2:05 PM IST
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के हालात साल दर साल बद-से-बदतर हो रहे हैं. जनपद में 265 डॉक्टरों की आवश्कता हैं. जिसमें से सिर्फ 111 ही डॉक्टर उपलब्ध हैं. विशेषज्ञों का तो और भी बुरा हाल हैं. मुख्यालय में ही सर्जन, न्यूरो सर्जन सहित दर्जनों विशेषज्ञ नहीं हैं. जिससे लोगों को ईलाज के लिए निजी अस्पतालों का या फिर मैदानों का रुख करना पड़ता हैं. नीति आयोग ने भी उत्तराखण्ड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है.

अलग राज्य के आंदोलन के समय लोगों ने सोचा था कि यूपी में पर्वतीय जिलों को महत्ता नहीं मिलने के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था ठीक नहीं है. राज्य बनने के 18 साल बाद भी स्वास्थ्य सेवाएं बद-से-बदत्तर होती जा रही हैं.

स्वास्थ्य विभागों ने जिले के दर्जनों स्थानों पर अस्पताल के नाम से भवन बना दिये हैं. उनमें न तो डॉक्टर हैं और न ही दवाईयां हैं. लोग इलाज के लिए हल्द्वानी, रुद्रपुर या देहरादून का रुख कर रहे हैं. सीएमओ डॉ. निशा पांडे ने बताया कि वे प्रतिमाह डॉक्टरों की कमी की रिपोर्ट शासन को भेज रहे हैं. जल्द ही जिले में डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी.

बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं  के कारण कई लोग अपनी जान गवां चुके हैं. कई बार अल्मोड़ा में स्वास्थ्य विभाग की बदहाली पर आंदोलन हो चुका हैं नजीता ढांक के तीन पात हैं. लोग छोटे से ईलाज के लिए भी निजी अस्पतालों में जा रहे हैं. अस्पतालों में दवाईयां नहीं हैं, लेकिन महकमा मूकदर्शक बना हुआ है.

सरकार के दावों की पोल आज नीति आयोग की रिपोर्ट ने खोल दी है. राज्य में किस तरह से साल-दर-साल स्वास्थ्य सेवाओं में गिरावट आ रही है.
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