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अब नहीं बनेगा महेंद्र सिंह धोनी जैसा कोई... माही के पैतृक गांव से जानें इसकी वजह

महेन्द्र सिंह धोनी 2004 में अपने गांव ल्वाली आए थे. वह कई स्थानीय लोगों से मिले थे और बच्चों के साथ खेतों में क्रिकेट भी खेला था.

महेन्द्र सिंह धोनी 2004 में अपने गांव ल्वाली आए थे. वह कई स्थानीय लोगों से मिले थे और बच्चों के साथ खेतों में क्रिकेट भी खेला था.

स्थानीय लोग चाहते हैं कि लमगड़ा ब्लॉक में धोनी के नाम से बने अन्तराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम

  • News18Hindi
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अल्मोड़ा. दुनिया भले ही महेंद्र सिंह धोनी को झारखंडी मानती हो लेकिन अल्मोड़ा के लोग धोनी को अपना कहते हैं. 70 के दशक में धोनी के पिता नौकरी के लिए रांची गए थे और फिर परिवार वहीं बस गया था. लेकिन ल्वाली गांव के लोगों को माही हमेशा अपने से ही लगते रहे और उनकी हर उपलब्धि पर अल्मोड़ा के इस गांव के छोटे-बड़े के सिर गर्व से ऊपर होते रहे. शायद यह महेंद्र सिंह धोनी का ही असर है कि गांव के युवाओं में क्रिकेट खेलने का शौक बढ़ा है लेकिन इस गांव में कोई और धोनी अब महेंद्र सिंह जैसा बनता नहीं दिख रहा क्योंकि आस-पास में खेलने के लिए एक ढंग का मैदान तक नहीं है.

कोई सुविधा नहीं 

महेन्द्र सिंह धोनी 2004 में अपने गांव ल्वाली आए थे. वह कई स्थानीय लोगों से मिले थे और बच्चों के साथ खेतों में क्रिकेट भी खेला था. ल्वाली गांव में मूलतः धोनियों का ही गांव है, हालांकि यहां कुछ परिवार बिष्ट भी हैं.

ल्वाली गांव के युवा महेन्द्र सिंह धोनी (जी हां माही का ही नाम) का सपना है कि वह भी क्रिकेट में अपना भविष्य बनाए लेकिन गांव में खेल का मैदान ही नहीं है. वह दूसरे गांव में जाकर युवाओं के साथ क्रिकेट खेलते हैं लेकिन आस-पास मैदान न होने से परेशान हैं.

ल्वानी के रोहित सिंह धोनी का कहना है कि गांव में कोई भी सुविधा नहीं है. युवा 7 किलोमीटर दूर जैती जाकर पढ़ाई करते है. गांव के पास तक सड़क तो आ गई लेकिन जैती या ब्लॉक मुख्यालय लमगड़ा जाने के लिए 20 किलोमीटर का सफ़र तय करना पड़ता है.

फिर आने का इंतज़ार 

गांव के ग्राम प्रधान दिनेश सिंह धोनी को भी गर्व है कि वह पूर्व भारतीय किक्रेटर के सबसे कामयाब कप्तान के  गांव के प्रधान हैं. 2004 में जब माही अपने गांव आए थे तब खेतों में उनके साथ खेले भी थे. अब चूंकि माही अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं उनके फिर फ़ुर्सत में गांव आने का इंतज़ार सभी को है. वैसे अभी तो पूरा गांव आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के जीतने की कामना कर रहा है.

पूर्व जिला पंचायत सदस्य दीवान सतवाल का कहने हैं कि भले ही धोनी रांची में पले-बढ़े, क्रिकेटर बने लेकिन उनसे प्रेरणा तो पूरा देश और ख़ासकर उनका पैतृक क्षेत्र लेता है. वह कहते हैं कि यहां युवाओं में बहुत प्रतिभा है और इसे निखालने के लिए लमगड़ा ब्लॉक में महेंद्र सिंह धोनी के नाम पर एक अन्तराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम बनाया जाना चाहिए ताकि और युवा देश का नाम रोशन कर सकें.

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