कुमाऊं की सैकड़ों सड़कें फंसी हुई हैं जंगलों में... मूलभूत सुविधाओं के लिए लोग कर रहे हैं पलायन

वन भूमि हस्तांतरण न होने की वजह से कुमाऊं में साढ़े पांच सौ से ज़्यादा सड़कें अटकी हुई हैं.
वन भूमि हस्तांतरण न होने की वजह से कुमाऊं में साढ़े पांच सौ से ज़्यादा सड़कें अटकी हुई हैं.

अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत और बागेश्वर जिले में ही 568 सड़कों को स्वीकृति मिल चुकी है लेकिन ये वन भूमि हस्तांतरण की वजह से लंबित हैं.

  • Share this:
अल्मोड़ा. कुमांऊ के पहाड़ी जिलों में वन भूमि हस्तांतरण की वजह से 568 सड़कों के प्रस्ताव लंबित है. दशकों की मांग के बाद राज्य सरकार ने सड़क बनाने की घोषणा तो की लेकिन वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के तालमेल की कमी सड़क निर्माण संभव नहीं हो पा रहा है. इसकी वजह से बड़ी संख्या में कुमाऊं के ग्रामीणों के लिए आवाजाही का ज़रिया दो पैर ही हैं. माना जा रहा है कि सड़कें न बन पाने की बड़ी वजह वन भूमि के लिए क्षतिपूर्ति भूमि की कमी है.

सड़क न होने की वजह से जा रही हैं जानें

पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क पहुंचने के बाद ही विकास को रोशनी पहुंचती है. शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी गांवों की मूलभूत आवश्यकताएं सड़क के अभाव में पूरी नहीं हो पाती हैं. पहाड़ के गांवों में सड़क न होने की वजह से गांवों में तेज़ी से पलायन हो रहा है.



सड़क न होने की वजह से कई गांवों में तो मरीज़ों और गर्भवती महिलाओं को डोली में बैठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है. कई बार ऐसा हुआ है कि गांव में जवान लोगों के न होने की वजह से डोली सड़क तक नहीं पहुंच पाई और मरीज़ की जान चली गई.
फ़ाइलों में अटकी हुई हैं ये सड़कें

अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत और बागेश्वर जिले में ही 568 सड़कों को स्वीकृति मिल चुकी है लेकिन ये वन भूमि हस्तांतरण की वजह से लंबित हैं. अल्मोड़ा ज़िले में 229 सड़कें, पिथौरागढ़ में 169, बागेश्वर में 112 और चंपावत में 58 सड़कें वन भूमि ट्रांस्फ़र न हो पाने की वजह से अटकी हुई हैं.

वन विभाग के अधिकारी जल्द वन भूमि ट्रांस्फ़र करवाने की बात कह रहे हैं लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है. पीडब्लूडी के अधिकारियों का कहना है कि वह कई बार सड़क की कार्ययोजना बनाकर वन भूमि ट्रांस्फ़र के लिए भेज चुके हैं लेकिन फ़ाइल क्लियर नहीं हो पा रही है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज