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अल्मोड़ा: जनता पर न्योछावर कर दिया था जीवन, जानें- जननायक' डॉ. शमशेर सिंह से जुड़ी खास बातें

उत्तराखंड में क्रांतिकारियों के नाम में सबसे आगे डॉ शमशेर सिंह बिष्ट का नाम आता है. डॉ बिष्ट ऐसे व्यक्ति थे, जो निस्वार ...अधिक पढ़ें

रोहित भट्ट/ अल्मोड़ा. उत्तराखंड में जब-जब आंदोलनों और क्रांति का जिक्र किया जाता है, तब-तब लोगों की जुबां पर डॉ शमशेर सिंह बिष्ट (Dr Shamsher Singh Bisht Uttarakhand) का नाम आ जाता है. डॉ. बिष्ट को उत्तराखंड का जननायक कहा जाता है. अल्मोड़ा में बीते गुरुवार को डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट की चौथी पुण्यतिथि पर समाज का बुद्धिजीवी वर्ग इकट्ठा हुआ और उन्हें याद किया. इस मौके पर डॉ बिष्ट द्वारा किए गए सभी जन आंदोलनों का जिक्र किया गया और बताया गया कि इनकी वजह से किस तरह इस पहाड़ी राज्य में सुधार हुए.

डॉ शमशेर सिंह बिष्ट ऐसे व्यक्ति थे, जो निस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करते थे और हर आंदोलन में सबसे आगे रहते थे. उन्होंने अपनी शुरुआत छात्र राजनीति से की थी. साल 1972 में वह अल्मोड़ा कॉलेज के अध्यक्ष चुने गए. इसके बाद शमशेर सिंह ने कई आंदोलनों में अपनी अहम भूमिका निभाई थी. कुमाऊं विश्वविद्यालय बनाने के लिए आंदोलन हो, पानी के लिए आंदोलन, वन बचाओ आंदोलन, उत्तराखंड राज्य आंदोलन, शराबबंदी आंदोलन, नशा नहीं-रोजगार दो आंदोलन या फिर अस्कोट-आराकोट अभियान, हर जनहित के मुद्दे पर उन्होंने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी दर्ज कराई.

इस अभियान में की पैदल यात्रा
अस्कोट-आराकोट अभियान में डॉ. बिष्ट ने अपने साथियों के साथ पैदल यात्रा की थी. इसके अलावा वह अपने साथियों के साथ करीब 40 दिनों तक जेल में भी रहे थे. जन समस्याओं का हल ही उनके जीवन का मकसद बन गया था. डॉ शमशेर सिंह बिष्ट की चौथी पुण्यतिथि पर कई मुद्दों पर चर्चा हुई. भू-कानून, पर्यावरण और हिमालय बचाओ के अलावा कई अन्य अहम बिंदुओं पर संवाद हुआ और चिंता जाहिर की गई. वरिष्ठ वैज्ञानिक रवि चोपड़ा, वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक डॉ नवीन जुयाल और जन आंदोलनकारी इंद्रेश मैखुरी के अलावा कई लोग यहां पहुंचे थे, जिन्होंने विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी. सभी ने डॉ शमशेर सिंह बिष्ट को याद किया और उनके आंदोलनों का बखान किया.

वरिष्ठ वैज्ञानिक रवि चोपड़ा ने बताया कि डॉ शमशेर सिंह बिष्ट को वह करीब 30 साल से जानते थे. उनके जैसा सरल व्यक्तित्व उन्होंने नहीं देखा था. अगर उनसे कोई कुछ कह भी देता था, तो वह बहुत सरल स्वभाव में उससे बात करते थे. उन्होंने कई आंदोलनों में अपनी अहम भूमिका निभाई थी. इसके अलावा उन्हें लिखने का काफी शौक था. वह बैठे-बैठे कुछ न कुछ लिखा करते थे. उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देश को आज डॉ शमशेर सिंह बिष्ट जैसे लोगों की जरूरत है.

वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक डॉ नवीन जुयाल ने कहा कि हिमालय काफी संवेदनशील इलाका है. पहाड़ों में हो रहे निर्माण कार्य आने वाले समय के लिए ठीक हैं, पर हम किस तरह से उन पर काम कर रहे हैं, यह हमें सोचने की जरूरत है. पिछले कुछ सालों में आपदाएं काफी बढ़ चुकी हैं, जिसका इशारा क्लाइमेट चेंज की ओर करता है. सरकार और जनप्रतिनिधियों को इस ओर देखने की जरूरत है.

Tags: Almora News, Uttarakhand news

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