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maa varahi devi temple is in devidhura champawat localuk

उत्तराखंड: इस देवी के नहीं कर सकते दर्शन, देखा तो चली जाएगी आंखों की रोशनी!

बग्वाल के अगले दिन मां की प्रतिमा को साल में एक बार संदूक से बाहर निकाला जाता है और स्नान कराया जाता है. मां की प्रतिमा को स्नान कराने के दौरान स्नान कराने वाले की आंखों पर पट्टी बांधी जाती है. जानें क्‍यों?

(रिपोर्ट- रोहित भट्ट)

देवीधुरा. उत्तराखंड के अल्मोड़ा से तकरीबन 75 किलोमीटर की दूरी पर है विश्व प्रसिद्ध देवीधुरा का मंदिर, यहां मां वाराही (Maa Varahi Temple in Devidhura Champawat) विराजमान हैं. देवीधुरा चंपावत जिले में आता है. यहां देवी की प्रतिमा को एक संदूक में बंद करके रखा गया है. यहां के पुजारी बताते हैं कि माता यहां दिगंबर शक्ति और बज्र के रूप में विराजमान हैं. वहीं, मान्‍यता है कि कोई भी अपनी खुली आंखों से मां को नहीं देख सकता है. यदि कोई भी मां की प्रतिमा को देख ले, तो उसकी आंखों की रोशनी जा सकती है. इसलिए मां को संदूक में रखा जाता है.

बग्वाल के अगले दिन मां की प्रतिमा को साल में एक बार संदूक से बाहर निकाला जाता है और स्नान कराया जाता है. मां की प्रतिमा को स्नान कराने के दौरान स्नान कराने वाले की आंखों पर पट्टी बांधी जाती है. वाराही मंदिर में आपको भीम शिला भी देखने को मिलेगी. बताया जाता है कि जब पांडव अज्ञातवास में यहां आए थे, तो वह एक जगह पर रुके थे. भीम को एक बार गुस्सा आ जाता है और वह इस बड़े पत्थर को दो हिस्सों में बांट देते हैं. कहा जाता है कि भीम के द्वारा पत्थर पर जो तलवार मारी गई थी, इसके बीच से लोग सिक्का डाला करते थे और वहां से खनकने की आवाज सुनाई देती थी.

संतान सुख की होती है प्राप्ति

जिन महिलाओं को संतान सुख की प्राप्ति नहीं होती है, वह इस मंदिर में आकर मां के डोले के चारों तरफ बैठकर पूजा करती हैं. साथ ही रातभर महिलाएं दीया हाथ में लेकर पूजा करती हैं. मान्यता है कि देवी आशीर्वाद के रूप में महिलाओं की सूनी गोद भरती हैं. मंदिर प्रांगण में एक पत्थर है, जिसको उठाने से रोग और कष्ट दूर होते हैं. यह पत्थर वही लोग उठा सकते हैं, जिनका मन साफ हो. इस पत्थर को पांच लोग अपनी दो उंगली से भी उठा सकते हैं.

माता यहां शक्तिपीठ के रूप में विराजमान

मंदिर के पुजारी चंद्र प्रकाश ने बताया कि माता यहां शक्तिपीठ के रूप में विराजमान हैं. इस मंदिर में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. इसके अलावा जब पांडव यहां अज्ञातवास में आए थे, तो वे यहां रुके थे. मां वाराही का मंदिर सुबह 5 बजे खुलता है. शाम करीब 7 बजे मंदिर बंद हो जाता है. मंदिर में रोजाना दुर्गा माता की आरती होती है;

दुर्गा माता की होती है आरती

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरीतुम को निशदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी. ॐ जय अम्बे…

मांग सिंदूर विराजत टीको मृगमद कोउज्जवल से दो नैना चन्द्र बदन नीको. ॐ जय अम्बे…

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजेरक्त पुष्प दल माला कंठन पर साजे. ॐ जय अम्बे…

केहरि वाहन राजत खड़्ग खप्पर धारीसुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुखहारी. ॐ जय अम्बे…

कानन कुण्डल शोभित नासग्रे मोतीकोटिक चन्द्र दिवाकर राजत सम ज्योति. ॐ जय अम्बे…

शुम्भ निशुम्भ विडारे महिषासुर धातीधूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती. ॐ जय अम्बे…

चण्ड – मुंड संहारे सोणित बीज हरेमधु कैटभ दोऊ मारे सुर भयहीन करे.ॐ जय अम्बे…

ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानीआगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी. ॐ जय अम्बे…

चौसठ योगिनी मंगल गावत नृत्य करत भैरुबाजत ताल मृदंगा और बाजत डमरु. ॐ जय अम्बे…

तुम ही जग की माता तुम ही हो भर्ताभक्तन की दुःख हरता सुख सम्पत्ति कर्ताॐ जय अम्बे…

भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारीमन वांछित फ़ल पावत सेवत नर-नारी. ॐ जय अम्बे…

कंचन थार विराजत अगर कपूर बातीश्रीमालकेतु में राजत कोटि रत्न ज्योति. ॐ जय अम्बे…

श्री अम्बे जी की आरती जो कोई नर गावेकहत शिवानंद स्वामी सुख संपत्ति पावे. ॐ जय अम्बे…

(नोट- इसमें दी गई सभी जानकारियां और तथ्य मान्यताओं के आधार पर हैं, NEWS 18 LOCAL किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता. )

Tags: Almora News, Uttarakhand Latest News

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