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इंसानियत की मिसाल हैं 78 वर्षीय मनोरमा जोशी, दिव्यांगों को 'आत्मनिर्भर' बनाना ही जीवन का मकसद

मनोरमा

मनोरमा जोशी मंगलदीप विद्या मंदिर की संस्थापक हैं.

उत्तराखंड के अल्मोड़ा की रहने वालीं मनोरमा जोशी ने अपना पूरा जीवन दिव्यांग बच्चों पर न्योछावर कर दिया.

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    उत्तराखंड के अल्मोड़ा की रहने वालीं मनोरमा जोशी इंसानियत की मिसाल हैं. उन्होंने अपना पूरा जीवन दिव्यांग बच्चों पर न्योछावर कर दिया. 78 वर्षीय मनोरमा ने 1 जुलाई, 1998 को मंगलदीप विद्या मंदिर की स्थापना की थी. इस मंदिर के निर्माण का मकसद दिव्यांगों का सहारा बनना था.

    शुरुआत में स्कूल में सिर्फ 6 ही बच्चे थे. आज मनोरमा जोशी के स्कूल में करीब 48 दिव्यांग बच्चे और 12 शिक्षक हैं. मनोरमा जोशी ने बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला लेकिन उनके परिवार और साथियों ने उनकी काफी मदद की.

    मनोरमा देवी ने बताया कि मंगलदीप विद्या मंदिर के बच्चों को कई तरह के उत्पाद बनाना सिखाया जाता है, जिसमें- मोमबत्ती, लिफाफे, फूलों से रंग बनाना, ग्रीटिंग कार्ड, सिलाई, पोस्टकार्ड आदि प्रमुख हैं. साथ ही बच्चों के लिए म्यूजिक और डांस की क्लासेस भी आयोजित की जाती हैं. विद्या मंदिर में पिछले पांच साल से बच्चों को हैंडलूम संबंधी कार्यों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है.

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