पलायन आयोग बनने के बाद भी बदस्तूर जारी है पलायन

अल्मोड़ा का रुमा गांव हुआ जनशून्य, दूसरे गांवों के लोग भी कर रहे हैं पलायन

ETV UP/Uttarakhand
Updated: February 5, 2018, 1:12 PM IST
पलायन आयोग बनने के बाद भी बदस्तूर जारी है पलायन
अल्मोड़ा में अभी तक कुल 38,568 घरों में लग चुका है ताला.
ETV UP/Uttarakhand
Updated: February 5, 2018, 1:12 PM IST
पहाड़ से पलायन अब आम बात हो गयी हैं. जिस पर खूब राजनीति हो रही हैं. अल्मोड़ा जिले में अभी तक 38,568 घरों में ताले लग चुके हैं. अब तो गांवों के गांव तेजी से खाली हो रहे हैं. ताड़ीखेत ब्लाक का रुमा गांव हैं. जहां पर गांव पूरी तरह से जन शून्य हो गए हैं. यह गांव भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के विधानसभा क्षेत्र का है. पहाड़ से पलायन के लिए जंगली जानवरों का आतंक स्वास्थ्य शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं होना है. गांवों में युवाओं के लिए कोई रोजगार नहीं होना मुख्य कारण माना जा रहा है.

राज्य बनने के 18 सालों में भाजपा और कांग्रेस बारी-बारी से सत्ता में काबिज होती रही है. अब तो राज्य सरकार ने पलायन आयोग ही बना दिया हैं, लेकिन इसके बाद भी पलायन नहीं रुक रहा है.

रानीखेत क्षेत्र में जन्मे हरीश रावत को भी राज्य की कमान जनता दे चुकी हैं, लेकिन हालात जस की तस हैं. रानीखेत से ही दो बार विधायक रहे अजय भट्ट भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं, लेकिन हालात बद से बदत्तर हैं.

रुमा के बाद आस-पास के गांवों के लोग भी मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण गांव छोड़ने को तैयार हो रहे हैं. नेता पलायन रोकने के नाम पर सिर्फ राजनीति करते नजर आते हैं.

पृथक राज्य की लड़ाई लड़ते समय लोगों ने सोचा था कि नया राज्य बनेगा, तो सभी व्यवस्थायें दुरुस्थ हो जाएगी. अब पहाड़ी क्षेत्रों की हालात और भी बिगड़ने लगी हैं.

हजारों लोगों ने राज्य बनने के बाद पहाड़ छोड़ा, तो नेताओं ने भी अपनी पहाड़ की विधानसभा छोड़ मैदान की तरफ रुख कर रहे हैं. मैदान में बैठकर पहाड़ की राजनीति कर रहे हैं.
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