महेंद्र सिंह धोनी के पैतृक गांव में मायूसी, आज भी विकास से कोसों दूर है ल्वाली
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महेंद्र सिंह धोनी के पैतृक गांव में मायूसी, आज भी विकास से कोसों दूर है ल्वाली
एमएस धोनी के अचानक क्रिकेट से सन्यास लेने के बाद उनके पैतृक गांव में भी मायूसी

अंतराष्ट्रीय क्रिकेट (International cricket) से अचानक सन्यास लेने की घोषणा करके क्रिकेट (Cricket) के तीनों फार्मेट में भारत को चैम्पियन बनाने वाले महेंद्र से धोनी (MS Dhoni) ने सभी को हैरान कर दिया, अल्मोड़ा के धोनी के पैतृक गांव में उनके इस ऐलान से खासी मायूसी है.

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अल्मोड़ा. भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket) को नई बुलंदियों पर पहुंचाने वाले महेन्द्र सिंह धोनी (MS Dhoni) के अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट (International cricket) से संन्यास लेने से सभी हैरत में है. धोनी अल्मोड़ा जिले (Almora District) के जैती तहसील के ल्वाली गांव के मूल निवासी हैं, 1970 में धोनी के पिता रांची (Ranchi) जाकर बस गये थे जबकि चाचा सहित अन्य लोग गांव में ही रहते हैं. ये गांव आज भी विकास से अछूता है न सड़क है न नाली. स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) की पूर्व संध्या पर महेंद्र सिंह धोनी ने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट से अचानक अपने सन्यास का ऐलान करके सभी को हैरान कर दिया. धोनी के पैतृक गांव के लोग जहां उनकी उपलब्धियों से गौरवान्वित महसूस करते हैं वहीं उनके जल्दी सन्यास ले लेने से मायूस भी हैं.

2012 में गांव को सड़क से जोड़ने का था वादा
बता दें कि महेन्द्र सिंह धोनी का मूल गांव अल्मोड़ा जिले के जैती तहसील के अंतर्गत आने वाला ल्वाली गांव है. धोनी के पैतृक घर में ताला लगा हुआ है. विकास से कोसों दूर ये गांव आज भी सड़क मार्ग से नहीं जुड़ पाया है. जबकि महेन्द्र सिंह का हेलीकाप्टर शॉट दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को रोमांचित करता है लेकिन उनके पैतृक गांव में पहुंचने के लिए बहुत हिचकोले खाने पड़ते हैं. 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने गांव को सड़क से जोड़ने का वादा किया था जो आज तक पूरा नहीं हो सका है.

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News 18 से बातचीत में महेन्द्र सिंह धोनी के चचेरे भाई हयात सिंह कहते हैं कि वो भी हैरान हैं, अचानक महेन्द्र सिंह धोनी का सन्यास लेना समझ से परे है. टेस्ट, वनडे और 20-20 क्रिकेट के तीनों फार्मेट में धोनी की कप्तानी में भारत विश्व चैम्पियन बना. उनके नाम कई सारे रिकार्ड हैं जिन्हें तोड़ने में किसी भी क्रिकेटर को खासा वक्त लगेगा. उनके भाई हयात सिंह धोनी का कहना है कि 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने जैती-ल्वाली मोटर मार्ग की घोषणा भी की थी जो फाइलों में सिमट कर रह गई है.
हयात कहते हैं कि 16 साल पहले अन्तराष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर की शुरुआत कर कई रिकार्ड महेन्द्र सिंह धोनी ने अपने नाम से किये. तब लग रहा था कि राज्य और केन्द्र सरकार धोनी के पैतृक गांव के लिए कुछ मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाएगी लेकिन डेढ़ दशक बीतने के बाद भी गांव की सुध लेने वाला कोई नहीं है.
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