गर्भवती की मौत के बाद अल्मोड़ा में फूटा लोगों का गुस्सा, स्वास्थ्य विभाग और सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
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गर्भवती की मौत के बाद अल्मोड़ा में फूटा लोगों का गुस्सा, स्वास्थ्य विभाग और सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
एक सप्ताह पहले कटारमल की गर्भवती महिला को इलाज नही मिलने से मौत के मामले में लोगों में भारी आक्रोश है.

ज़िला अस्पताल में ही कई संगठन बैठे धरने पर, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

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अल्मोड़ा में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. एक सप्ताह पहले कटारमल की गर्भवती महिला को ईलाज नही मिलने से मौत के मामले में लोगों में भारी आक्रोश है. परिजनों ने महिला की मौत के लिए अस्पताल को ज़िम्मेदार ठहाराया था. स्वास्थ्य सेवाओं की हालत यह है कि अल्मोड़ा जिले में 100 से अधिक डॉक्टरों पर पद खाली हैं. कुछ प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों को तो फार्मासिस्ट ही चला रहे हैं. प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की बात छोड़ो, अस्पताल में ही कई विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद खाली है जिससे लोगों को इलाज के लिए मैदानी क्षेत्रों का रुख करना पड़ता है.

उग्र आंदोलन की चेतावनी 

इस मुद्दे पर उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी सहित कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने सोमवार को ज़िलाधिकारी से मुलाकात की है. इसके बाद उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि स्वास्थ्य को लेकर जन सुनवाई की जानी चाहिए ताकि लोग अपनी समस्या प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने रख सकें.



almora protest on pregnant lady death 2, इस मुद्दे पर उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी सहित कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने सोमवार को ज़िलाधिकारी से मुलाकात की
इस मुद्दे पर उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी सहित कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने सोमवार को ज़िलाधिकारी से मुलाकात की

युवा आंदोलनकारी मनोज बिष्ट का कहना है कि आज वह जिला अस्पताल में धरना दे रहे हैं. इससे पहले गांधी पार्क के सामने धरना दे चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अगर जल्दी ही राज्य की सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में कोई बड़ा कदम नही उठाया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे.

जांच जारी 

जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने कहा कि इस मामले की मेजिस्ट्रेटी जांच की जा रही है. गर्भवती की मृत्यु में जिसका भी दोष पाया जाएगा उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही लोगों ने जो भी बिन्दु सामने रखे हैं उन पर कार्रवाई की जा रही है.

पर्वतीय क्षेत्रों में इलाज न मिलने से हर साल दर्जनों लोग अपनी जान गंवा बैठते हैं. चुनावोँ के समय राजनीतिक दलों का भी मुद्दा भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का रहता है लेकिन जब लोगों की मौत होती है तब सरकार और स्वास्थ्य विभाग कुंभकरणी नींद से जागता है. पहाड़ी ज़िलों के पलायन के लिए भी बदहाल स्वास्थ्य सुविधाएं बड़ा कारण मानी जाती हैं.
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