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अल्‍मोड़ा में 1890 में बेहोश हो गए थे स्वामी विवेकानंद, मुस्लिम फकीर ने बचाई थी जान

Swami Vivekananda: उत्तराखंड की सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा से स्वामी विवेकानंद का गहरा नाता था. यही नहीं, 1890 में अल्मोड़ा में कर्बला के पास पहुंचते ही वह जब अचानक एक पत्थर के ऊपर बेहोश होकर गिर गए, तब एक मुस्लिम फकीर ने उनकी जान बचाई थी.

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रिपोर्ट- रोहित भट्ट

अल्मोड़ा. उत्तराखंड की सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा अनेकों ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रही है. स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) का अल्मोड़ा शहर से गहरा नाता था. वह तीन बार अल्मोड़ा आए थे. 31 अगस्त 1890 को स्वामी विवेकानंद अपने गुरुभाई स्वामी अखंडानंद महाराज के साथ काठगोदाम से अल्मोड़ा के लिए पैदल चले थे. इस बीच अल्मोड़ा में कर्बला के पास पहुंचते ही वह अचानक एक पत्थर के ऊपर बेहोश होकर गिर गए, तब एक मुस्लिम फकीर ने उनकी जान बचाई थी. बता दें कि स्वामी विवेकानंद की आज 120वीं पुण्यतिथि है.

मुस्लिम फकीर का नाम जुल्फिकार अली था. उनके परपोते अख्तर अली ने बताया कि स्वामी विवेकानंद जब बेहोश हो गए थे, तो उनके परदादा फौरन स्वामी जी के पास पानी और ककड़ी (खीरा) लेकर पहुंचे. विवेकानंद ने जब उन्हें इसे खिलाने के लिए कहा तो जुल्फिकार झिझकते हुए बोले, ‘आप धर्मात्मा हैं और में एक फकीर हूं. मैं आपको यह कैसे खिला सकता हूं.’ यह सुनकर स्वामी विवेकानंद ने कहा, ‘क्या हम सब भाई-भाई नहीं हैं’, जिसके बाद फकीर ने उन्हें ककड़ी खिलाई और पानी पिलाया.

अख्तर अली आज करते हैं ये काम
अख्तर अली आज भी उस पत्थर और उसके इर्दगिर्द साफ-सफाई करते हैं. जबकि अल्मोड़ा आने वाले काफी पर्यटक इस स्थान को देखने आते हैं. वहीं, स्वामी देव्यानन्द ने इससे जुड़ी एक और घटना के बारे में बताते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जब शिकागो के बाद अल्मोड़ा पहुंचे, तो यहां रघुनाथ मंदिर के पास एक सभा का आयोजन किया गया था. जब वह मंच से लोगों को संबोधित कर रहे थे, तो उन्होंने देखा कि दर्शक दीर्घा में जुल्फिकार अली भी मौजूद हैं. उन्होंने जुल्फिकार को मंच पर बुलाया और सभी को बताया कि आज अगर वह जिंदा हैं, तो सिर्फ जुल्फिकार अली की वजह से.

Tags: Almora News, Swami vivekananda

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