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आधुनिकता की चपेट में अल्मोड़ा का तांबा उद्योग, कहीं इतिहास न बन जाए 'ताम्र नगरी' की पहचान

ताम्र

ताम्र उद्योग अल्मोड़ा के टम्टा मोहल्ला में स्थित है.

अल्मोड़ा के टम्टा मोहल्ला में चल रहा ताम्र उद्योग करीब 400 साल पुराना है.

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    अल्मोड़ा के टम्टा मोहल्ला में चल रहा ताम्र उद्योग करीब 400 साल पुराना है. एक जमाने में लोग तांबे के बर्तनों का काफी इस्तेमाल करते थे लेकिन अब आधुनिकता की चमक ने तांबे की अनूठी चमक को फीका कर दिया है. पहले हर घर में लोग पीने का पानी सिर्फ तांबे के बर्तन में ही रखते थे. तांबे के बर्तन में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छा माना जाता है लेकिन अब हर घर में फिल्टर लग गए हैं.

    यहां के ताम्र कारीगरों के हाथों से बने तांबे के बर्तन आज भी काफी प्रसिद्ध हैं. एक समय था, जब यहां कई परिवार इस उद्योग से जुड़े थे लेकिन अब चंद लोग ही इस कला को बचाए रखने के लिए जी-जान से जुटे हैं. इसे रोजी-रोटी की जरूरत के तौर पर भी समझा जा सकता है.

    यहां पर तांबे से तौला, गागर, परात, पूजा के बर्तनों के अलावा वाद्य यंत्र रणसिंघ, तुतरी आदि बहुत चीजें बनाई जाती हैं. टम्टा मोहल्ला में काम करने वाले लोगों का कहना है किसी भी सरकार ने उनकी किसी भी तरह की मदद नहीं की, अगर हुक्मरान मदद करते तो ताम्र उद्योग आज काफी ऊंचाइयों पर होता.

    उद्योग विभाग के महाप्रबंधक दीपक मुरारी ने बताया कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत टम्टा मोहल्ला में ताम्र से बनने वाले बर्तनों की ट्रेनिंग दी गई थी. जो लोग इसका काम करना चाहते हैं, उन्हें लोन की सुविधा भी दी जाएगी.

    बताते चलें कि इस साल आयोजित हुए कुंभ मेले में अल्मोड़ा पुलिस ने तांबे से बनी गगरी को मेले में आने वाले वीआईपी और मुख्य अतिथियों को भेंट देने के लिए अल्मोड़ा से करीब 500 गागर भेजी थीं.

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