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उत्तराखंड में पिछले 8 सालों से नौकरी और पेंशन की मांग कर रहे हैं 'एसएसबी गुरिल्ला'

उत्तराखंड में पिछले 8 सालों से नौकरी और पेंशन की मांग कर रहे ये एसएसबी गुरिल्ला

उत्तराखंड में पिछले 8 सालों से नौकरी और पेंशन की मांग कर रहे ये एसएसबी गुरिल्ला

अल्मोड़ा जिले में एसएसबी गुरिल्ला पिछले 3139 दिनों यानि करीब साढ़े आठ सालों से नौकरी और पेंशन की मांग को लेकर जिला कलेक्ट्रेट में धरना दे रहे हैं.

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उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में 'एसएसबी गुरिल्ला' पिछले 3139 दिनों यानि करीब साढ़े आठ सालों से नौकरी और पेंशन की मांग को लेकर जिला कलेक्ट्रेट में धरना दे रहे हैं. इसके साथ ही दिल्ली के जंतर-मंतर और देहरादून स्थित परेड ग्राउंड में भी लगातार अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे हैं, लेकिन पिछले एक दशक से उनकी मांगों पर किसी भी सरकार ने विचार नहीं किया. गुरिल्ला सांसद और विधानसभा का कई बार घेराव भी कर चुके हैं.

भारत-चीन लड़ाई में सन् 1961 से 2013 तक देशभर के हजारों युवाओं को भारत सरकार ने सैन्य प्रशिक्षण दिया. लड़ाई के समय युवाओं को नौकरी का सपना दिखाया, लेकिन देशभर के 17 राज्य जो पाक, चीन और नेपाल सीमा से जुड़ें हैं उन राज्यों के युवाओं को एसएसबी ने नौकरी नहीं दी. हालांकि कुछ राज्यों में राज्य सरकार ने इस गुरिल्लों को नौकरी में प्राथमिकता दे दी, लेकिन उत्तराखंड में ऐसा भी नहीं हुआ. अब गुरिल्ला लोकसभा चुनावों में सासंदों के खिलाफ दुष्प्रचार करने की बात कर रहे हैं.

अब इस आंदोलन में सिर्फ युवा ही नहीं बल्कि महिलाएं भी शामिल हो गई हैं, जो वर्षों से जिला मुख्यालय में धरना दे रही हैं. इनकी मानें तो पहाड़ी राज्यों में सिर्फ सेना में जाकर देश सेवा करना ही रोजगार है. इसके अलावा राज्यों में कोई भी रोजगार का साधन नहीं है.

बहरहाल, जैसे ही गुरिल्ला नौकरी और पेंशन के लिए आंदोलन तेज करते हैं, वैसे ही केंद्र सरकार सत्यापन समेत कुछ प्रकिया शुरू कर देता है. हालांकि नतीजा ढाक के तीन पात निकलते हैं. उत्तराखंड में ही 21 हजार ऐसे एसएसबी गुरिल्ला हैं जो आगामी चुनावों में एकजुट होकर चुनाव बहिष्कार या फिर सांसदों का विरोध करने की योजना बना रहे हैं.

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