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उत्तराखंड: अस्पतालों में डॉक्टर और स्कूलों में मास्टर भेजना बड़ी चुनौती

उत्तराखंड: अस्पतालों में डॉक्टर और स्कूलों में मास्टर भेजना बड़ी चुनौती

सवाल ये भी है कि क्या नए निजाम में बेलगाम अफसरशाही पर अंकुश लग पाएगा. अलबत्ता उत्तराखंड में जनआकांक्षाओं की पटरी पर त्रिवेंद्र और मोदी के डबल इंजन का बहुत बड़ा इम्तिहान है.

सवाल ये भी है कि क्या नए निजाम में बेलगाम अफसरशाही पर अंकुश लग पाएगा. अलबत्ता उत्तराखंड में जनआकांक्षाओं की पटरी पर त्रिवेंद्र और मोदी के डबल इंजन का बहुत बड़ा इम्तिहान है.

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रचंड बहुमत के साथ उत्तराखंड की बागड़ोर संभाल ली है. उन्हें जनता की कसौटी पर खरा उतरने के लिए आर्थिक, सामाजिक और पार्टी की अंदरूनी चुनौतियों से गुजरना होगा. सवाल ये भी है कि क्या नए निजाम में बेलगाम अफसरशाही पर अंकुश लग पाएगा?

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    त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रचंड बहुमत के साथ उत्तराखंड की बागडोर संभाल ली है. उन्हें जनता की कसौटी पर खरा उतरने के लिए आर्थिक, सामाजिक और पार्टी की अंदरूनी चुनौतियों से गुजरना होगा. सवाल ये भी है कि क्या नए निजाम में बेलगाम अफसरशाही पर अंकुश लग पाएगा? अलबत्ता उत्तराखंड में जनाकांक्षाओं की पटरी पर त्रिवेंद्र और मोदी के डबल इंजन का बहुत बड़ा इम्तिहान है. सरकार के सामने अस्पतालों में डॉक्टर और स्कूलों में मास्टर भेजना बड़ी चुनौती है.

    9वें मुख्यमंत्री बनने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ठीक वो बात कही जो उनके पहले हुए 8 शपथग्रहण के बाद हर मुख्यमंत्री ने कही थी. लेकिन उनमें कोई एक भी अपने आप को राज्य की अवधारणा की कसौटी पर खरा नहीं उतर पाया. लिहाजा डबल इंजन की नई सरकार से जनमानस को काफी उम्मीदें हैं. साथ ही कुछ चुनौतियां और सवाल भी हैं.

    क्या त्रिवेंद्र सरकार सड़क सहित मूलभूत ढांचे को समयबद्ध  और नियोजित तरीके से विकसित कर पाएगी. सवाल इसलिए है कि अपने उत्तराखंड बनने के सोलह साल बाद भी 3745 गांव एक अदद सरकारी सड़क से महरूम हैं.

    क्या सूबे में बेलगाम रही अफसरशाही की कार्यशैली में कोई बदलाव हो पाएगा? याद दिला दें कि हाईकोर्ट ने पूर्व में अपने हुक्म की नाफरमानी पर एक मौजूदा अपर मुख्य सचिव को सस्पेंड कर दिया था और एक मौजूदा प्रमुख सचिव का मिजाज सही करने के लिए एक महीने ट्रेनिंग कराने के आदेश दिए थे.

    क्या सरकारी तंत्र और ठेका प्रक्रिया भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी होने की उम्मीद पाली जाए. ये तभी संभव है जबकि दागी और विवादित अफसर की बजाय अच्छे ईमानदार अफसरों की पोस्टिंग सुनिश्चित होगी.

    क्या दूरस्थ पहाड़ी इलाकों के अस्पतालों में डॉक्टर और स्कूलों में मास्टर पहुंचाने का कोई फार्मूला नई सरकार के पास है? क्योंकि यह बड़ी चुनौती रही है. क्या त्रिवेंद्र सरकार उत्तराखंड को हड़ताल प्रदेश की छवि से मुक्ति दिला पाएगी?

    कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य का कहना है कि हमारे सामने चुनौती बड़ी हैं, लेकिन हम उनसे निपटने का हर संभव प्रयास करेंगे.

    उत्तराखंड का जनमानस स्थायी राजधानी और गैरसैंण का स्टेटस निर्धारित होने की बडी उम्मीदें पाले बैठा है. डबल इंजन की मजबूत सरकार बन जाने के बाद अब ऋषिकेष से कर्णप्रयाग तक रेल पहुंचाने में कोई बहाना नहीं चल पाएगा.

    सवाल और भी बहुत हैं, लेकिन हमें बेहतरी की उम्मीदें रखनी चाहिए क्योंकि लोकतंत्र की भावना यही कहती हैं. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सामने बड़ी चुनौती अंदरूनी राजनीति से निपटना भी होगा. वजह ये कि उनकी कैबिनेट कमोबेश आधे वो मंत्री हैं जो कांग्रेस छोड़कर आए हैं.

    कांग्रेस विधायक गोबिंद सिंह कुंजवाल का कहना है मोदी के वादों को पूरा करने की जिम्मेदारी त्रिवेंद्र सरकार की है. कहने की जरूरत नहीं है कि उनमें कुछेक के आचरण पर तो बीजेपी ने विपक्ष में रहते जमकर हल्ला बोला था.

    अलबत्ता उनके लिए राहत की बात ये है कि मौजूदा हालात में विपक्ष पूरी तरह पस्त है. लब्बोलुवाब इतना भर है कि त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार को पहले दिन से परफॉर्म करना होगा, क्योंकि डबल इंजन की ताकत वाली सरकार के पास बहाना बनाने के लिए कुछ नहीं होगा.

     

    Tags: Uttarakhand news

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