Uttarakhand: हरीश रावत के घर से सत्ता की 'चाबी' पाने की फिराक में कांग्रेस, बनाई नई रणनीति

2017 के विधानसभा चुनाव को छोड़कर अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोकसभा में कांग्रेस का प्रदर्शन हमेशा ही बेहतर रहा है.

Uttarakhand Assembly Elections 2022: पिछले विधानसभा चुनाव को छोड़ दें तो तो अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोकसभा में कांग्रेस का प्रदर्शन हमेशा ही बेहतर रहा है. इस लोकसभा की विधानसभाओं में उसका परचम जरूर लहराया है. यही वजह है कि पूर्व सीएम हरीश रावत से लेकर अन्य कांग्रेसी दिग्गज इसी सीट पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं.

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अल्मोड़ा. लोकसभा चुनाव 2019 और बीते विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को भले ही अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ से खास फायदा न मिला हो, बावजूद इसके 2022 की लड़ाई में कांग्रेसियों को इस सीट से खासी उम्मीदें हैं. यही वजह है कि पूर्व सीएम हरीश रावत से लेकर अन्य कांग्रेसी दिग्गज इसी सीट पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. बीते विधानसभा चुनावों को छोड़ दें तो अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोकसभा में कांग्रेस का प्रदर्शन हमेशा ही बेहतर रहा है. राज्य बनने के बाद जब भी कांग्रेस सत्ता में आई इस लोकसभा की विधानसभाओं में उसका परचम जरूर लहराया है. 2002 और 2012 के विधानसभा चुनावों में चार जिलों की इस लोकसभा में कांग्रेस ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था.

लोकसभा में बेहतर प्रदर्शन के कारण ही कांग्रेस के हाथ सत्ता भी लगी थी. अब कांग्रेस नेताओं को फिर लगने लगा है कि 2022 में भी सत्ता का चाबी इसी लोकसभा से निकलेगी. कांग्रेस ने राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा मानते हैं कि इस लोकसभा में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन के पीछे पूर्व सीएम हरीश रावत का राष्ट्रीय कद है. उनके चलते ही अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोकसभा में कांग्रेस का प्रदर्शन हर विधानसभा में बेहतर रहा है. 2017 में कांग्रेस का प्रदर्शन पूरे उत्तराखंड में खराब रहा, बावजूद इसके इस लोकसभा की 3 विधानसभा सीटें उसकी झोली में गई थीं.

कांग्रेस आने वाले चुनावों को लेकर इस लोकसभा में भले ही बेहतर प्रदर्शन का दावा कर रही हो, लेकिन भाजपा को उसका दावा नागवार गुजर रहा है. बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी कहते हैं कि कांग्रेस मूंगेरी लाल के हसीन सपने देख रही है. 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा 2017 के चुनावों से भी बेहतर प्रदर्शन करेगी. शायद ये पहला ऐसा विधानसभा का चुनाव होगा जब भाजपा लोकसभा की सभी 14 सीटों को अपने नाम करेगी. जोशी कमल की बढ़ती ताकत के पीछे बीजेपी संगठन की मजबूती के साथ ही पीछे कांग्रेस की गुटबाजी को भी बड़ी वजह मान रहे हैं.

इस लोकसभा में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की भी फौज है. पूर्व सीएम हरीश रावत के अलावा गोविंद सिंह कुंजवाल, महेन्द्र सिंह माहरा, प्रदीप टम्टा, करन माहरा जैसे नेता यहीं से निकले हैं. ऐसे में कांग्रेस की उम्मीद का वाजिब कारण भी मौजूद है लेकिन अब देखना ये है कि अगले साल होने वाले चुनावों में कांग्रेस यहां अपने मनमुताबिक सीटें जीत पााती है या फिर उसके सपने मुंगेरी लाल के सपने साबित होते हैं.

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