कहां गए करोड़ों पेड़? हर साल लाखों पौधों का रोपण करता है वन विभाग, इस साल 16 लाख पौधे लगाए जाएंगे
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कहां गए करोड़ों पेड़? हर साल लाखों पौधों का रोपण करता है वन विभाग, इस साल 16 लाख पौधे लगाए जाएंगे
उत्तराखंड में बड़ी संख्या में वन संपदा वनाग्नि के कारण नष्ट हो जाती है.

वन विभाग ने राज्य बनने के बाद जितने पौधे रोपे हैं अगर वह वृक्ष बनते तो अब वृक्षारोपण के लिए जगह ही नहीं होनी चाहिए थी.

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अल्मोड़ा. कुमाऊं के पर्वतीय जिलों में वन विभाग हर साल लाखों की संख्या में वृक्षारोपण करता है. राज्य बनने के बाद ही हर साल 10 से 15 लाख पेड़ों का रोपण होता है इसके साथ कई संगठन भी वृक्षारोपण करते हैं. इस वर्ष हरेले पर्व पर ही कुमाऊं वृत में 16 लाख पेड़ों का वन विभाग रोपण करने जा रहा है, जिसके लिए वन विभाग ने अपनी तैयारी शुरु कर दी है. लेकिन पर्यावरण के जानकार सरकारों के इन दावों पर सवाल उठा रहे हैं कि अगर इतने पौधों का रोपण किया जाता तो फिर नए लगाने के लिए जगह बचती ही नहीं.

वृहद स्तर पर वृक्षारोपण 

वन विभाग मानसून में हर साल लाखों की संख्या में वृक्षारोपण करता है लेकिन अधिकांश जंगल आग की भेंट चढ़ जाते हैं. हरेला पर्व पर इस साल क्षतिपूर्ति में 7 लाख, वन पंचायतों में 93 हज़ार, ज़ायका के तहत 5 लाख, चारागाह विकास में 34500 , ग्रीन इंडिया मिशन में 21400, बहुउद्देशीय वृक्षारोपण में 33750 पौधों का रोपण होगा. सभी योजनाओं को मिलाकर इस साल कुल 16 लाख पौधों का रोपण किया जाएगा.



वन संरक्षक, कुमाऊं, प्रवीण कुमार ने कहा कि वृक्षारोपण के लिए वन विभाग ने अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत और बागेश्वर के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं. हरेला पर्व पर वृक्षारोपण वृहद स्तर पर किया जाएगा.

क़ाग़ज़ों पर लगते हैं ये पेड़

अल्मोड़ा के पर्यावरण प्रेमी पूरन चन्द्र तिवारी हर साल रस्मी तौर पर होने वाले वृक्षारोपण पर सवाल उठाते हैं. वह कहते हैं कि वन विभाग जितने पौधों का रोपण करता है, उनकी रक्षा करना भी विभाग का ही काम है. वन विभाग ने राज्य बनने के बाद जितने पौधे रोपे हैं अगर वह हो वृक्ष बनते तो अब वृक्षारोपण के लिए जगह ही नहीं होनी चाहिए थी. दरअसल वन विभाग सिर्फ कागजों में ही पेड़ों का रोपण करता है.

वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाए जाने यह पहला मामला नहीं है. हर साल वृक्षारोपण के लिए भेजे गए पौदे नदी किनारे पड़े मिलते हैं. ग्रामीणों ने कई जंगलों को आग से बचाकर ही हरियाली को बचाने पेड़ों की संख्या बनाए रखने की दिशा में बेहतर काम किया है. आज ज़्यादा ज़रूरत जंगलों को आग से बचाने की है न कि लाखों पौधों के रोपण की.

 
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