एम्बुलेंस संचालकों का दर्द- पांच महीने से नहीं हुआ भुगतान, अब भूखों मरने की आ गई है नौबत
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एम्बुलेंस संचालकों का दर्द- पांच महीने से नहीं हुआ भुगतान, अब भूखों मरने की आ गई है नौबत
भुगतान नहीं मिलने के बाद एम्बुलेंस संचालकों ने सेवाएं बंद कर दी हैं.

निजी एम्बुलेंस संचालकों (ambulance operator) का आरोप है कि पिछले पांच महीने से उनका भुगतान नहीं हुआ है. इसके कारण उनको आर्थिक समस्याओं (Economic problems) से जूझना पड़ रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 8, 2020, 1:53 PM IST
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रुड़की. एक ओर जहां पूरा देश कोविड 19 जैसे खतरनाक संक्रमण की चपेट में है और कई कोरोना योद्धा अपने सेवाएं दे रहे हैं, वहीं मरीजों को घर से अस्पताल तक ले जाने वाले निजी एम्बुलेंस संचालकों का पिछले 5 महीने से भुगतान नहीं हुआ है. इसके कारण लोगों को भुखमरी जैसे हालात से गुजरना पड़ रहा है.

देश में अनलॉक-4 शुरू हो चुका है, लेकिन आज भी देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे  हैं. रोज देश में मिलने वाले कोरोना मरीजों की संख्या के बारे में सुनकर हर कोई परेशान हो जाता है. वहीं कोरोना मरीजों को उनको अस्पतालों तक पहुंचाने वाले निजी एम्बुलेंस चालकों में शासन, प्रशासन के खिलाफ नाराजगी देखने को मिल रही है. एक निजी एम्बुलेंस चालक अमजद ने कहा कि कोविड 19 में हमारी निजी एम्बुलेंस लगाई गई थी, जिनको प्रतिदिन एक हजार रुपया देना तय हुआ था, लेकिन पिछले 5 महीने से उनको कोई भी भुगतान नहीं किया गया है. जिससे उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है.

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अमजद अब काम करने में भी असमर्थता जता रहे हैं. ऐसे में प्रशासन के सामने भी एक बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है. निजी एम्बुलेंस चालकों का कहना है कोविड 19 में अपनी और अपने परिवार की चिंता ना करते हुए हमने मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचाया है, लेकिन आज जब भुगतान की बारी आई तो कोई भी अधिकारी सुनने को तैयार नहीं है. इसलिए मजबूर अब एम्बुलेंस की सेवाएं बंद करनी पड़ रही है, क्योंकि एम्बुलेंस की किस्त और मरम्मत के लिए भी पैसा नहीं  मिल रहा है.
वही उप सम्भागीय परिवहन अधिकारी ज्योति शंकर मिश्रा का कहना है कि इस बारे में जिला प्रशासन को अवगत कराया गया है. साथ ही सीएमओ हरिद्वार को भी इसकी जानकारी दे दी गई है ताकि उनका भुगतान शीघ्र हो सके. उप सम्भागीय परिवहन अधिकारी का भी मानना है निजी एम्बुलेंस संचालकों का भुगतान किया जाना चाहिए ताकि वो अपना काम सुचारू रूप कर सकें और कोरोना काल के साथ तालमेल बैठा सकें. जिससे कि मरीजों को अस्पतालों तक आसानी से पहुंचाया जा सके.
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