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अंकिता हत्याकांड: मुख्य आरोपी के पिता विनोद आर्य का नहीं था कोई जनाधार! फिर कैसे सियासी पायदान चढ़ते गए पूर्व BJP नेता?



पूर्व राज्यमंत्री व भाजपा नेता रहे विनोद आर्य (R)का बेटा पुलकित (L), अंकिता भंडारी (M) मर्डर केस का मुख्य आरोपी है. (File Photo)

पूर्व राज्यमंत्री व भाजपा नेता रहे विनोद आर्य (R)का बेटा पुलकित (L), अंकिता भंडारी (M) मर्डर केस का मुख्य आरोपी है. (File Photo)

द इं​डियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा की राज्य ईकाई में कई लोगों का मानना ​​है कि हरिद्वार के रहने वाले व ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

राजनीतिक हलकों में माना जाता है कि विनोद आर्य बीजेपी में....सिर्फ एक प्रतीकात्मक चेहरा थे
विनोद ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल आयुर्वेद व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए किया
पुलकित के खिलाफ 2016 में यूएपीएमटी में....कथित रूप से धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज है

देहरादून: अंकिता भंडारी की हत्या के मुख्य आरोपी पुलकित आर्य की गिरफ्तारी के बाद पिछले सप्ताह उत्तराखंड भाजपा ने उनके पिता विनोद आर्य और बड़े भाई अंकित आर्य को पार्टी से निष्कासित कर दिया था. पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अंकित को उत्तराखंड ओबीसी आयोग के उपाध्यक्ष पद से भी हटा दिया. अंकिता ने पिछले महीने के अंत में उत्तराखंड के लक्ष्मण झूला इलाके में स्थित पुलकित के रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करना शुरू किया था. वह 18 सितंबर को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी. पुलिस ने 24 सितंबर को चीला शक्ति नहर से अंकिता का शव बरामद किया. इसके एक दिन बाद पुलकित और 2 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया.

पुलिस के मुताबिक पुलकित और उसके दो अन्य साथियों ने एक विवाद के बाद अंकिता को नहर में धकेलने की बात कबूल की है. द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछली त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में राज्य मंत्री के पद का आनंद लेने वाले विनोद आर्य को कभी भी एक जन नेता नहीं माना जाता था या उनका कोई उल्लेखनीय समर्थन आधार नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने प्रभाव का उपयोग वरिष्ठ भाजपा नेताओं से निकटता हासिल करने के लिए किया. इस रिपोर्ट में कहा गया है…भाजपा की राज्य ईकाई में कई लोगों का मानना ​​है कि हरिद्वार के रहने वाले विनोद को मुख्य रूप से स्वदेशी आयुर्वेद में उनकी व्यावसायिक रुचि के लिए पार्टी में शामिल किया गया था. बाद में, भाजपा सरकार ने विनोद आर्य को राज्य मंत्री का दर्जा देकर उत्तराखंड माटी बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया.

‘विनोद कभी भी जननेता नहीं थे और न ही पार्टी के लिए वोट लाए’
रिपोर्ट में राज्य के एक भाजपा नेता के हवाले से कहा गया है, ‘वह (विनोद) कभी भी जननेता नहीं थे और न ही पार्टी के लिए वोट लाए. विनोद आर्य क्षेत्र में स्वदेशी आयुर्वेद फर्म चलाने के लिए जाने जाते हैं और यही कारण है कि पार्टी में कई लोगों का मानना ​​​​था कि स्वदेशी टैग वाला व्यक्ति होना अच्छा होगा. एक बार पार्टी में आने के बाद उन्होंने अलग-अलग पदों पर दावेदारी ठोकनी शुरू कर दी. बैठकों में वह कहते थे कि वह एक वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें उपयुक्त मान्यता दी जानी चाहिए. इसके साथ, उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया.’ विनोद ने बाद में अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल अपने आयुर्वेद व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए किया. लक्ष्मण झूला क्षेत्र में पुलकित के स्वामित्व वाले वनंतरा रिजॉर्ट को इस संबंध में एक उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है. विनोद के बड़े बेटे अंकित भी भाजपा में शामिल हुए और बाद में उन्हें राज्य ओबीसी आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया.

विनोद आर्य भगवा पार्टी (BJP) में सिर्फ एक ‘प्रतीकात्मक चेहरा’ थे 
राज्य के राजनीतिक हलकों में यह माना जाता है कि चूंकि विनोद भगवा पार्टी में सिर्फ एक ‘प्रतीकात्मक चेहरा’ थे, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई करना इतना मुश्किल नहीं था. अंकिता भंडारी हत्याकांड ने बड़े पैमाने पर जन आक्रोश को जन्म दिया. इसलिए अंकिता का शव मिलने के तुरंत बाद, भाजपा ने विनोद और अंकित दोनों पर कार्रवाई की. सीएम धामी ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन का आदेश दिया, यहां तक ​​​​कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने घोषणा की कि आरोपियों पर गैंगस्टर अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. जिला प्रशासन ने वनंतरा रिजॉर्ट के एक हिस्से को भी ध्वस्त कर दिया, जिसने आरोपों के बीच विवाद को जन्म दिया कि यह कार्रवाई महत्वपूर्ण सबूतों को ‘नष्ट’ करने के उद्देश्य से की गई. हालांकि इन आरोपों का पुलिस ने खंडन किया. डीजीपी अशोक कुमार और एसआईटी प्रमुख डीआईजी पी रेणुका देवी ने कहा कि पिछले गुरुवार को ही विस्तृत वीडियोग्राफी के बाद रिजॉर्ट को सील कर दिया गया था. वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा, ‘हमारे पास मामले में सभी सबूत सुरक्षित हैं.’

भाजपा ने पिछले शनिवार को घोषणा की कि उसने राज्य के पार्टी प्रमुख महेंद्र भट्ट के निर्देश पर विनोद और अंकित को निकाल दिया है, विनोद आर्य ने दावा किया कि उन्होंने और अंकित ने पहले ही पार्टी के सभी पदों से अपना इस्तीफा सौंप दिया था. विनोद आर्य ने कहा, ‘पुलकित आर्य मेरा बेटा है, लेकिन वह लंबे समय से अलग रह रहा था. हम जिम्मेदार लोग हैं. हमने तय किया कि जब तक जांच चल रही है, मेरे पद का दुरुपयोग न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए मैंने भाजपा के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. हम हर तरह की जांच में सहयोग करेंगे. हम चाहते हैं कि सच्चाई सामने आए ताकि अंकिता और पुलकित दोनों को न्याय मिल सके.’ यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें पता है कि पुलकित इस तरह की गतिविधियों में शामिल है, उन्होंने दावा किया कि उनके बेटे का नाम कभी भी किसी आपराधिक गतिविधि से नहीं जुड़ा था.

पुलकित के खिलाफ पहले भी दर्ज है धोखाधड़ी का एक मामला
हालांकि, डीजीपी ने पुष्टि की कि पुलकित के खिलाफ 2016 में उत्तराखंड आयुर्वेद प्री-मेडिकल टेस्ट (यूएपीएमटी) में कथित रूप से धोखाधड़ी (अपने स्थान पर किसी और को परीक्षा में बैठाने) करने के लिए हरिद्वार कोतवाली में दर्ज एक मामला लंबित है. विनोद और उनके समर्थकों पर पुलकित के खिलाफ खबरें लिखने पर पत्रकारों को धमकाने के भी आरोप हैं. उत्तराखंड पुलिस ने सोमवार को स्थानीय पत्रकार आशुतोष नेगी से शिकायत मिलने की पुष्टि की और कहा कि उन्होंने इसके आधार पर मामला दर्ज किया है. पुलिस ने एक बयान में कहा, ‘एक निजी समाचार पोर्टल के पत्रकार आशुतोष नेगी ने रायपुर पुलिस स्टेशन में फोन पर एक धमकी भरे कॉल के संबंध में शिकायत दर्ज कराई है. हमने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.’ पहाड़ टीवी के पत्रकार नवल खली ने भी कहा कि उन्हें भी इसी तरह की धमकियां मिली हैं.

दो पत्रकारों ने विनोद आर्य पर लगाया है धमकी देने का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि वह नेगी के साथ एक लाइव साक्षात्कार कर रहे थे, जब उन्हें कई कॉल आए जो उन्होंने मिस कर दीं. नवल की कॉल रिकॉर्डिंग में, दूसरी तरफ के व्यक्ति को कथित तौर पर उनसे यह पूछते हुए सुना जा सकता है कि ‘क्या लाइव शो खत्म हो गया है?’ और फिर यह सुझाव दे रहा है कि ‘उन्हें कम बोलना चाहिए और अपना ख्याल रखना चाहिए’. पुलिस इस मामले की भी जांच कर रही है. इस बीच सीएम धामी ने बुधवार को अंकिता भंडारी के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया. उन्होंने मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की वकालत भी की है. बता दें कि अंकिता के परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी, इसीलिए उसे 12वीं के बाद अपनी पढ़ाई छोड़कर जॉब करनी पड़ी. उसे रिजॉर्ट में नौकरी के लिए अपनी पहली सैलरी भी नहीं मिली थी, उससे पहले ही अंकिता की हत्या कर दी गई.

Tags: Rishikesh news, Uttarakhand BJP, Uttarakhand News Today

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