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वीर सैनिकों की पाठशाला है उत्तराखंड का ये सैनिक स्कूल, हर तीसरा छात्र बना सेना में अफसर

वीर सैनिकों की पाठशाला है उत्तराखंड का ये सैनिक स्कूल, हर तीसरा छात्र बना सेना में अफसर

घोड़ाखाल स्थित सैनिक स्कूल से पिछले दस सालों में औसतन 33.4 प्रतीशत छात्र सेना में अफसर बने हैं.

घोड़ाखाल स्थित सैनिक स्कूल से पिछले दस सालों में औसतन 33.4 प्रतीशत छात्र सेना में अफसर बने हैं.

रक्षा मंत्रालय ने एनडीए, नौसेना अकादमी या अन्य दूसरी सैन्य अकादमियों में पढ़कर अफसर बने सैनिक स्कूलों के छात्रों का ब्यौरा इकट्ठा कर दस साल का औसत निकाला है. इसमें सैनिक स्कूल घोड़ाखाल सबसे टॉप पर रहा है. पिछले दस सालों में यहां से औसतन 33.4 प्रतीशत छात्र सेना में अफसर बने हैं, यानी इस स्कूल का हर तीन में एक छात्र सेना के तीनों अंगों में बतौर अफसर देश की सेवा कर रहा है.

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    नैनीताल. भारतीय सेना (Indian Army) को योग्य अफसर देने के लिए देशभर में इस समय 24 सैनिक स्कूल चल रहे हैं. वहीं इन तमाम सैनिक स्कूलों में उत्तराखंड के घोड़ाखाल स्थित सैनिक स्कूल (Army School) कुछ खास ही मुकाम रखता है. रक्षा मंत्रालय ने अपने विश्लेषण में पाया कि पिछले दस सालों में यहां से औसतन 33.4 प्रतीशत छात्र सेना में अफसर बने हैं, यानी इस स्कूल का हर तीन में एक छात्र सेना के तीनों अंगों में बतौर अफसर देश की सेवा कर रहा है. मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, यह संख्या देश के किसी भी अन्य सैनिक स्कूल के मुकाबले सबसे ज्यादा है.

    हिन्दी दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय ने एनडीए, नौसेना अकादमी या अन्य दूसरी सैन्य अकादमियों में पढ़कर अफसर बने सैनिक स्कूलों के छात्रों का ब्यौरा इकट्ठा कर दस साल का औसत निकाला है. इसमें सैनिक स्कूल घोड़ाखाल सबसे टॉप पर रहा है. वहीं, दूसरे स्थान पर हिमाचल प्रदेश स्थित सुजानपुर तीरा सैनिक स्कूल रहा, जहां से औसतन 30.5 फीसदी छात्र सेना में अफसर चुने गए हैं.

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    मंत्रालय की ओर से जारी लिस्ट के अनुसार, तीसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश का कोरुकोडा सैनिक स्कूल रहा है, जहां के औसतन 24.3 फीसदी छात्र अफसर नियुक्त हुए. इसके बाद रीवा, सतारा और चितौड़गढ़ के सैनिक स्कूल का नाम है, जहां से बीते दस वर्षों में औसतन 19.1, 18.5 और 17 फीसदी छात्र सैन्य अधिकारी बने हैं.

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    नगालैंड के स्कूल का रिकॉर्ड सबसे खराब
    रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ सैनिक स्कूलों का प्रदर्शन इस मामले में बेहद खराब रहा है. इनमें खराब रिकॉर्ड नगालैंड के पुंग्लवा सैनिक स्कूल का दिखा, जहां से महज एक प्रतिशत से भी कम छात्र सैन्य अफसर बने. वहीं भुवनेश्वर सैनिक स्कूल से 3.9, जम्मू-कश्मीर के नगरौटा से 4.7 फीसदी, कोडागु (कर्नाटक) सैनिक स्कूल से 5.3 फीसदी तथा गौलपारा (असम) से सिर्फ 5.9 छात्र सैन्य अफसर बने हैं.

    Tags: Nainital news

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