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बागेश्वर: घर के अंदर सो रहे परिवार पर अचानक गिरा मलबा, तीन लोग दबे, बच्चे की बच गई जान

गांव के ग्राम प्रधान मंगल रावत का कहना है कि देर रात एक मकान पर मलबा आया गया, जिससे तीन लोग दब गये.

गांव के ग्राम प्रधान मंगल रावत का कहना है कि देर रात एक मकान पर मलबा आया गया, जिससे तीन लोग दब गये.

आपदा अधिकारी शिखा ने कहा कि कई स्थानों पर सड़क (Road) टूटी है, जिसके कारण रेस्क्यू टीम को मौके पर पहुंचने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है.

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बागेश्वर. बागेश्वर जिले (Bageshwar District) के कपकोट के सुमगढ़ (sumgarh) में आसमानी आफत एक परिवार पर भारी पड़ गयी है. देर रात मकान के ऊपर मलबा गिरने से 3 लोग कई घंटों से उसके अंदर दबे हुऐ हैं. कहा जा रहा है कि इतनी देर होने जाने की वजह से उनके जिंदा होने की संभावना कम ही रह गयी है. गांव के लोग रेस्क्यू में लगे हुए हैं, लेकिन मलबा (Debris) काफी ज्यादा होने के कारण रेस्क्यू करने में सफलता नहीं मिल पा रही है. सड़क बंद और पैदल रास्ता होने के कारण कई घंटों के बाद रेस्क्यू टीम वहां पहुची है.


आपदा अधिकारी शिखा ने कहा कि कई स्थानों पर सड़क टूटी है, जिसके कारण रेस्क्यू टीम को मौके पर पहुंचने में काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है. मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीन ने बचाव अभियान शुरू कर दिया है. अब मलवे में दबे हुए लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है. जानकारी के मुताबिक, कई स्थानों पर सड़क बंद पड़ी हुई थी, जिसको खोलते हुऐ रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची है.

घटना को आपदा ने फिर याद दिला दिया है
गांव के ग्राम प्रधान मंगल रावत का कहना है कि देर रात एक मकान पर मलबा आया गया, जिससे मकान में सो रहे तीन लोग दब गये. एक बच्चा बच गया, जिसने घटना के बारे में सूचना दी. उसके बाद गांव के लोगों ने रेस्क्यू अभियान चलाया, लेकिन अन्य दबे हुऐ लोगों को नहीं निकाला जा सका. प्रशासन को सूचना दे दी गई है. 8 घंटे बीतने के बाद रेस्क्यू की टीम मौके पर पहुंच गयी है. एक निजी स्कूल में मलबाआने से 18 बच्चों की मौत एक दशक पहले इसी गांव में हो गयी थी. जिस घटना ने सभी का दिल झकझोर कर दिया था. आज फिर उस गांव की घटना को आपदा ने फिर याद दिला दिया है.

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Uttarakhand News: पेड़ों को बचाने के लिए 48 साल बाद उत्‍तराखंड में फिर 'चिपको' आंदोलन, जानें पूरा मामला

Uttarakhand News:पेड़ों को कटने से बचाने के लिए उनमें लिपटीं महिलाएं. (न्‍यूज 18 हिन्‍दी)

Uttarakhand News: बागेश्‍वर जिले के जाखनी गांव में मोटर मार्ग के लिए बड़ी संख्‍या में पेड़ों को काटने का काम चल रहा है. ऐसे में स्‍थानीय लोग पेड़ों को बचाने के लिए उनमें लिपट जा रहे हैं.

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बागेश्वर. उत्‍तराखंड के बागेश्वर जिले के जाखनी गांव में एक बार फिर से चिपको आंदोलन शुरू हो गया है. कमेड़ीदेवी-रंगधरा-मजगांव-चौनाला मोटर मार्ग के लिए कट रहे पेड़ों को बचाने के लिए लोग पेड़ों में लिपट जा रहे हैं. महिलाओं के पेड़ों में लिपटने से एक बार फिर 1973 के चिपको आंदोलन की याद आ गई है. उस समय गौरा देवी के नेतृत्व में चलाया गया था.

ग्राम प्रधान ईश्वर सिंह मेहता का कहना है कि गांव में 600 की आबादी है. 8 किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले जंगल में बांज, बुरांश और उतीस के 10 हजार से अधिक पेड़ हैं. इसमें 90 फीसदी तो बांज के पेड़ हैं, जिन्हें ग्रामीणों ने अपने बच्चों की तरफ पाला है. जो सर्वे सड़क के लिए हुई है वह पूरी तरह से जंगल मार्ग से हुई है, जिससे वन का अधिकांश हिस्‍सा समाप्त हो जाएगा.

हिमानी मेहता का कहना है कि जिस तरह से हम बच्चे बड़े होते रहे वैसे ही हमारे परिजनों ने पेड़ों को भी पाला है. लेकिन, प्रशासन द्वारा सड़क बनाने के नाम पर पेड़ों को काटा जा रहा है, जिन्हें हम किसी भी हालात में कटने नहीं देंगे. पहले हमें काटेंगे इसके बाद ही पेड़ों को काटेंगे.

इस मुहिम का हिस्‍सा बनीं एक अन्‍य महिला हेमा देवी का कहना है कि हम लोगों ने पानी की परेशानी को देखते हुऐ जंगल बनाया है जिसे आग से बचाया है. यहां तक कि गांव के लोग पेड़ों को लकड़ी जलाने के लिए भी नहीं काटते हैं, तो फिर सड़क के नाम पर हजारों पेड़ों को क्यों काटने दें? हम पेड़ों पर लिपटे हैं, जब विभाग हमें काटेगा तब पेड़ों पर आरी चलाने देंगे.

क्या था 1973 का चिपको आंदोलन?
चिपको आंदोलन पर्यावरण रक्षा का आंदोलन था. आंदोलन चमोली जिले में 1973 में शुरु हुआ था. यह एक दशक के अंदर पूरे राज्य में फैल गया था. इस आंदोलन का नेतृत्व रैणी गांव की गौरा देवी ने किया था. जो पेड़ों को बचाने के लिए पेड़ों से चिपक गई थीं.

दबंगों के डर से 2 महीने तक घर से बाहर नहीं निकले बुजुर्ग दंपति, पागलों जैसी हुई हालत

दंपति का उपचार कर रहे डॉ. कपिल तिवारी ने बताया कि बुजुर्ग दंपति को काफी बुरी हालत में अस्पताल लाया गया था. (सांकेतिक फोटो)

बिलौना वार्ड निवसाी 65 वर्षीय फौजी जमन सिंह (Jaman Singh) सेना से रिटायर्ड हैं. वे अपने घर में पत्नी के साथ रहते हैं. रविवार को उनकी पत्नी देवकी देवी की तबीयत खराब हो गई.

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बागेश्वर. उत्तराखंड की बागेश्वर (Bageshwar) में इंसानियत को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है. यहां के बिलौना वार्ड (Billona Ward) में एक बुजुर्ग दंपति दबंगों के डर से पिछले दो महीने से घर में कैद थे. इस दौरान किसी ने उस दंपति (Couple) की मदद नहीं की. ऐसे में घर में कैद-कैद दंपति की हालत दयनीय हो गई है. उधर दंपति के बेटों का कहना है कि सितंबर में उनसे बातचीत हुई थी. दो महीने पहले ही उनकी बहन ने माता-पिता के स्वस्थ होने की जानकारी दी थी.

जानकारी के मुताबिक, बिलौना वार्ड निवसाी 65 वर्षीय फौजी जमन सिंह सेना से रिटायर्ड हैं. वे अपने घर में पत्नी के साथ रहते हैं. रविवार को उनकी पत्नी देवकी देवी की तबीयत खराब हो गई थी. ऐसे में बदहवास हालात में उन्हें जिला अस्पताल भर्ती कराया गया. बुजुर्ग दंपति की हालत बेहद खराब थी. नाखून और बाल काफी बढ़े हुए थे. साथ ही कपड़े भी गंदे हो गए थे. कमजोरी की वजह से बुजुर्ग दंपति ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे. उधर, पड़ोसियों का कहना है कि सेना से रिटायर्ड बुजुर्ग अक्सर शराब पीकर गालीगलौज करते थे. इस वजह से सभी ने उसने किनारा कर लिया था.

सीमेंट गायब था और मां के जेवर भी नहीं थे
वहीं, दंपति के बड़े बेटे जगत सिंह नेगी ने बताया कि वह और उसका छोटा भाई दिल्ली में नौकरी करते हैं. जगत सिंह नेगी ने बताया कि शनिवार जैसे ही उन्हें अपने माता-पिता के बारे जानकारी मिली तो वे तुरंत घर के लिए निकल गए. घर पहुंचने पर उन्होंने देखा कि मां और पिता बदहाल हालत में हैं. वह बोलने की स्थिति में भी नहीं थे और कमरों के खिड़की और दरवाजे टूटे थे. घर में मकान की मरम्मत के लिए रखा लोहा और सीमेंट गायब था और मां के जेवर भी नहीं थे.

बाहर नहीं निकलने की बात कही है
जगत सिंह नेगी ने का कहना है कि वार्ड में रहने वाले कुछ दबंगों ने उनके परिवार की यह हालत की है. उन्होंने बताया कि दबंगों के डर से उसके माता-पिता को कमरे में कैद होने पर मजबूर होना पड़ा है. आसपास रहने वाले लोग भी दबंगों के डर के कारण उसके परिवार की मदद नहीं की. वहीं छोटे बेटे सुरेश सिंह नेगी ने फोन पर हुई बातचीत में गांधी नाम के एक शख्स पर पिता के रुपये ऐंठने का आरोप लगाया है. वहीं, अस्पताल में भर्ती देवकी देवी ने भी डर के मारे घर से बाहर नहीं निकलने की बात कही है.

मनोचिकित्सक की मदद लेनी ही पड़ सकती है
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दंपति का उपचार कर रहे डॉ. कपिल तिवारी ने बताया कि बुजुर्ग दंपति को काफी बुरी हालत में अस्पताल लाया गया था. उन्होंने बताया कि दोनों की मानसिक हालत सही नहीं है. सरसरी तौर पर देखने से लग रहा है कि उन्होंने चार या पांच हफ्ते से खाना नहीं खाया है. दोनों के शरीर में पानी की भी कमी हो गई है. दोनों के मानसिक उपचार के लिए मनोचिकित्सक की मदद लेनी ही पड़ सकती है.

उत्तराखंड: जब शादी में दूल्हा-दुल्हन और मेहमानों से संस्कृत में ली कोरोना से रक्षा की शपथ

दुल्हन से मिला कोरोना. नहीं हो सकी विदाई. (सांकेतिक फोटो)

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के एसपी मणिकांत मिश्रा (SP Manikant Mishra) ने शादी समारोह के दौरान दूल्हा-दुल्हन और वहां आए सभी मेहमानों से संस्कृत में कोरोना से रक्षा की शपथ (Covid-Safety Pledge) दिलवाई.

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बागेश्वर. शादी-विवाह में संस्कृत में मंत्रोच्चार (Sanskrit Chanting) तो आपने सुना ही होगा, लेकिन क्या कभी किसी शादी समारोह (Wedding ceremony) में संस्कृत में कोरोना की शपथ लेते हुए किसी को देखा है? आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन उत्तराखंड (Uttarakhand) में ऐसा ही एक माजरा देखने को मिला है. प्रदेश के बागेश्वर जिले में पुलिस के एक आला अफसर ने शादी समारोह के दौरान कोरोना नियमों की जांच पड़ताल के बीच दूल्हा-दुल्हन और वहां आए सभी मेहमानों से संस्कृत में कोरोना से रक्षा की शपथ (Covid-Safety Pledge) दिलवाई.

दरअसल, बीते दिनों बागेश्वर जिले के पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा Bageshwar SP) एक शादी में अचानक ही कोरोना प्रोटोकॉल की जांच करने पहुंच गए. वे यहां देखने आए थे कि शादी में कोरोना को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं. इसी दौरान एसपी मणिकांत मिश्रा ने समारोह में उपस्थित सभी मेहमानों और दूल्हा-दुल्हन व उनके परिजनों से कोरोना सुरक्षा की शपथ लेने को कहा. एसपी ने खुद लोगों को शपथ दिलवाई. खास बात यह थी कि सभी लोगों ने संस्कृत भाषा में यह शपथ ली. ऐसा लग रहा था कि जैसे सामूहिक रूप से मंत्रोच्चार हो रहा हो.

इसलिए वे शादी के दिन समारोह स्थल पर पहुंचे थे
बागेश्वर के एसपी मणिकांत मिश्रा ने संस्कृत में कोरोना सुरक्षा की शपथ दिलवाने के पीछे की वजह विस्तार से बताई. उन्होंने कहा कि दुल्हन के पिता ने जब उन्हें शादी के बारे में बताया था, उन्होंने तभी कोरोना से जुड़े दिशा-निर्देशों की उन्हें ताकीद की थी. सरकार द्वारा जारी शादी समारोह को लेकर गाइडलाइन के बारे में भी दुल्हन के पिता को बताया गया था. एसपी ने यह भी कहा था कि वह इस बात की आकर जांच भी करेंगे. इसलिए वे शादी के दिन समारोह स्थल पर पहुंचे थे.

घराती-बाराती के सभी लोगों ने उसे दोहराया
एसपी मणिकांत मिश्रा ने बताया कि शादी के दिन जब वे समारोह स्थल पर पहुंचे तो वहां बड़ी संख्या में लोग जुटे हुए थे. पंडित शादी कराने में व्यस्त थे. इसी दौरान एसपी के साथ आए पुलिसकर्मियों ने वहां मौजूद दूल्हा-दुल्हन और उनके परिजनों समेत सभी मेहमानों के हाथ में एक पंपलेट दिया, जिसमें कोरोना से सुरक्षा के मंत्र लिखे थे. इसके बाद एसपी ने कोरोना-सेफ्टी की शपथ पढ़नी शुरू की और वहां मौजूद घराती-बाराती के सभी लोगों ने उसे दोहराया.

मकर संक्रांति पर बागेश्वर में लगता है उत्तराखंड का सबसे बड़ा मेला, जिसमें स्टॉल लगाते हैं राजनीतिक दल भी

3,254 फ़ीट की ऊंचाई पर बसे बागेश्वर ज़िले का नाम बागनाथ मंदिर से पड़ा है.

ऋषि मार्कंडेय को बाघ के रूप में आशीर्वाद देने आए थे भगवान शिव... इसलिए क्षेत्र का नाम पड़ा बागेश्वर

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1997 में यूपी की मुख्यमंत्री मायावती ने अल्मोड़ा से अलग बागेश्वर जनपद की स्थापना की थी. सरयू और गोमती नदी के संगम पर बसा बागेश्वर जिला सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक महत्व के लिए जाना जाता है. 3,254 फ़ीट की ऊंचाई पर बसे बागेश्वर ज़िले का नाम बागनाथ मंदिर से पड़ा है. हिन्दू पौराणिक कथा के अनुसार ऋषि बाबा मार्कंडेय यहां शिव जी पूजा किया करते थे. शिव जी एक बाघ के रूप में ऋषि मार्कंडेय को आशीर्वाद देने आए थे. इसी के बाद यह क्षेत्र कहलाने लगा बागेश्वर.

राजनीतिक चेतना का केंद्र

ऐतिहासिक सूत्रों के अनुसार चन्द शासक लक्ष्मी चन्द ने 1602 में बागनाथ मंदिर समूह का निर्माण कराया था. हर साल मकर सक्रांति के दिन यहां उत्तराखंड का सबसे बड़ा मेला लगता है. इस उत्तराखंड का संभवतः अकेला ऐसा  मेला है जिसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दल भी अपने स्टॉल लगाते हैं. इनके माध्यम से राजनीतिक पार्टियां लोगों को अपनी नीतियों से रूबरू कराती हैं.

Bageshwar, मकर सक्रांति के दिन यहां लगने वाले मेले में सभी प्रमुख राजनीतिक दल भी अपने स्टॉल लगाते हैं.
मकर सक्रांति के दिन यहां लगने वाले मेले में सभी प्रमुख राजनीतिक दल भी अपने स्टॉल लगाते हैं.


इस धरती पर पहुंच कर 1921 में महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन को भी शुरु किया था जिसे कुली-बेगार आंदोलन चला रहे लोगों ने शिखर पर पहुंचाया. 2 लाख 60 हजार की आबादी वाले बागेश्वर का ऊन 1950 से 60 के दौर तक लाल इमली धारीवाल जैसी विख्यात कपड़ा कम्पनियां खरीदा करती थीं.

Bageshwar, चन्द शासक लक्ष्मी चन्द ने 1602 में बागनाथ मंदिर समूह का निर्माण कराया था.
चन्द शासक लक्ष्मी चन्द ने 1602 में बागनाथ मंदिर समूह का निर्माण कराया था.


अंग्रेज़ों ने की थी ट्रेन पहुंचाने की कोशिश

प्रथम विश्व युद्द से पहले यहां अंग्रेजों ने ट्रेन पहुंचाने की भी कोशिश की थी. 1905 में बागेश्वर को ट्रेन से जोड़ने के लिए ब्रिटिश हुकुमत ने टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का सर्वे कराया था. यह बात अलग है कि आजाद भारत में इस पहाड़ी इलाके को ट्रेन से जोड़ने की कोई कोशिश नहीं हुई.

बागेश्वर जिले के पश्चिम में नीलेश्वर जबकि पूर्व में भीलेश्वर पर्वत है. यही नहीं इसकी उत्तर दिशा में सूर्य कुंड और दक्षिण में अग्निकुंड भी मौजूद है. प्रशासनिक रूप से अलग जिला बनने के बाद यहां 3 विकासखंड हैं. बागेश्वर कभी तांबे की कारीगरी के लिए भी मशहूर था लेकिन अब तांबे का काम करने वाले कारीगर गिने-चुने ही रह गए हैं.

Bageshwar, माना जाता है कि भगवान शिव एक बाघ के रूप में ऋषि मार्कंडेय को आशीर्वाद देने यहां आए थे.
माना जाता है कि भगवान शिव एक बाघ के रूप में ऋषि मार्कंडेय को आशीर्वाद देने यहां आए थे.


राज्य बनने के बाद इस जिले में 3 विधानसभाएं हुआ करती थीं लेकिन परिसीमन के बाद ये घटकर सिर्फ 2 रह गई हैं.फिलहाल यहां बागेश्वर और कपकोट नाम से दो विधानसभाएं हैं. अंतरिम सरकार के मुख्यमंत्री और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी मूल रूप से बागेश्वर जिले के ही रहने वाले हैं.

फिर 'मसीहा' बने बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद, एयरलिफ्ट कर 55 प्रवासियों को मुंबई से पहुंचाया देहरादून

सोनू सूद (Photo Credit Sonu Sood Instagram)

लॉकडाउन की वजह से मजदूर 50 से ज्यादा मजदूर मुंबई (Mumbai) में फंसे हुए थे. अब अभिनेता सोनू सूद की वजह से सभी की घर वापसी हुई है. सोनू सूद की इस अच्छी पहल की काफी तारीफ भी हो रही है.

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देहरादून. कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण हुए लॉकडाउन (Lockdown 5.0) में फंसे मजदूरों की मदद के लिए एक बार फिर बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद (Sonu Sood) सामने आए हैं. उत्तर प्रदेश और मुंबई के मजदूरों की मदद के बाद अब सोनू ने देवभूमि उत्तराखंड (Uttarakhand) के मजदूरों की घर वापसी कराई है. सोनू ने हजारों प्रवासी मजदूरों को अपने खर्च पर फ्लाइट के जरिए मुंबई के देहरादून रवाना किया. लॉकडाउन की वजह से 50 से ज्यादा मजदूर मुंबई (Mumbai) में फंसे हुए थे. अब अभिनेता सोनू सूद की वजह से सभी की घर वापसी हुई है. सोनू सूद की इस अच्छी पहल की काफी तारीफ भी हो रही है.

बताया जा रहा है कि उत्तराखंड के करीब 50 मजदूर लॉकडाउन के बाद मुंबई में फंस गए थे. एक्टर सोनू सूद को जब इस बात की खबर लगी तो वे मदद के लिए आगे आए. सभी मजदूरों को मुंबई से एयरलिफ्ट कर सोनू ने वापस शुक्रवार को देहरादून पहुंचाया. इसमें से कुछ मजदूर बागेश्वर इलाके के भी थे. सोनू ने एयरपोर्ट से मजदूरों के घर भेजने के लिए गाड़ी की व्यवस्था भी की थी. मुंबई में मजदूरों की मदद एक स्थानीय संस्था ने भी की. यहां तक मजदूरों को मुंबई एयरपोर्ट छोड़ने वे खुद आए थे.

ट्रेन से मजदूरों को पहुंचाया था घर
हाल ही में बॉलीवुड ऐक्टर सोनू सूद ने ट्रेन के जरिए करीब 800 मजदूरों को महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश भेजा था. प्रवासी मजदूरों का पूरा खर्च उन्होंने खुद उठाया था. बता दें कि इससे पहले सोनू सूद ने मुंबई में फंसे हजारों मजदूरों के देश के अलग-अलग हिस्सों तक बस से भिजवाया था. वहीं केरल में फंसी 177 लड़कियों को भी एयरलिफ्ट कर भुवनेश्वर पहुंचाया था. सोनू सूद के इस काम के लिए सोशल मीडिया पर उनकी काफी तारीफ भी हो रही है. वहीं मीडिया रिपोर्ट की मानें तो जल्द ही सोनू सूद एक नामी कंपनी के साथ सोशल मीडिया कैंपेन का हिस्सा भी बनने वाले हैं.

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युवती ने सैन्यकर्मी पर लगाया रेप का आरोप, 4 साल से शादी का झांसा देकर कर रहा था शोषण

युवती ने सैन्यकर्मी राकेश कुमार पर आरोप लगाया है कि वह 4 साल से शादी का झांसा देकर उससे दुष्कर्म कर रहा था. (सांकेतिक तस्वीर)

4 साल से शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म करने के आरोप में सैन्यकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है.

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बागेश्वर. उत्तराखंड (Uttarakhand) में बागेश्वर (Bageshwar) जिले के काफलीगैर (Kafligair) थाने में एक सैन्यकर्मी (Militair personeel) के खिलाफ दुष्कर्म का मामला (Rape case) दर्ज किया गया है. युवती ने सैन्यकर्मी राकेश कुमार (Rakesh Kumar) पर आरोप (Allegation) लगाया है कि वह 4 साल से शादी का झांसा देकर उससे दुष्कर्म (Rape) कर रहा था.

शादी के लिए कर रहा था टालमटोल 

जब युवती ने शादी के लिए सैन्यकर्मी राकेश कुमार से कहा तो उसने मना कर दिया. इसके बाद युवती ने थाने जाकर आरोपी सैन्यकर्मी के खिलाफ रेप का केस दर्ज करा दिया. युवती ने पुलिस से इंसाफ की गुहार लगाते हुए आरोपी सैन्यकर्मी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई (Strict Action) की मांग की है. युवती ने सैन्यकर्मी पर लगाया रेप का आरोप, 4 साल से शादी का झांसा देकर कर रहा था शोषण

पुलिस ने शुरू की छानबीन 

पुलिस ने युवती द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर आरोपी सैन्यकर्मी के खिलाफ रेप का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के बाद जो तथ्य सामने आएंगे, उसके मुताबिक फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

युवती की मानें तो मामले में समझौते (settlement) के लिए कई बार प्रयास किए गए, लेकिन आरोपी के शादी से बार-बार इनकार करने के बाद उसने थाने एफआईआर (FIR) दर्ज करा दी.

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शेयर मार्केट में पैसा दोगुना करने के नाम पर ठगी, इंदौर से दो गिरफ्तार

बागेश्वर पुलिस ने इंदौर जाकर दो ठग को गिरफ्तार किया.

बागेश्वर की थाना बैजनाथ पुलिस ने फर्जी कंपनी के जरिये शेयर मार्केट में धन निवेश कर उसे दोगुना किये जाने के आरोप में दो ठगों को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में जाकर पकड़ा है.

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बागेश्वर पुलिस ने पैसे दोगुना करने के आरोप में दो ठगों को गिरफ्तार किया है. थाना बैजनाथ पुलिस ने फर्जी कंपनी के जरिये शेयर मार्केट में धन निवेश कर उसे दोगुना किये जाने के आरोप में दोनों ठगों को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में जाकर पकड़ा है. इन ठगों में से एक एमबीए डिग्री धारक है. बागेश्वर के पुलिस अधीक्षक लोकेश्वर सिंह ने बताया कि इस ठगी मामले की रिपोर्ट 30 मई को दीप वर्मा नामक व्यक्ति ने बैजनाथ थाना में दर्ज कराई थी. उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता के अनुसार एक ऐसा गिरोह सक्रिय है जो लोगों को फोन कर शेयर मार्केट में पैसे निवेश करने की बात करता है. फोन पर वे लोगों से यही कहते हैं कि शेयर मार्केट में पैसे निवेश करने के बाद उनके पैसे दोगुने हो जाएंगे. पुलिस अधीक्षक ने कहा कि रिपोर्ट दर्जे करने के बाद जांच पड़ताल में पता चला कि गिरोह के दो सदस्य इंदौर के रहने वाले हैं.

ट्रांजिट रिमांड पर लाया गया बागेश्वर
एसपी ने कहा कि इसके बाद पुलिस की एक टीम इंदौर गई और दोनों आरोपियों को 9 जून को गिरफ्तार कर लिया गया. उन्होंने कहा कि दोनों अभियुक्तों को ट्रांजिट रिमांड पर बागेश्वर लाया गया है. अब उन्हें न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने कहा कि पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों में से एक अश्विन एमबीए डिग्री धारक है. वह ट्रेड प्राइम रिसर्च कंसलटेंट कंपनी में काम किया करता था. लेकिन इस कंपनी में काम छोड़ने के बाद उसने अपने साथी के साथ मिलकर इसी नाम से एक फर्जी कंपनी खोल ली.

फर्जी कंपनी के जरिये धोखाधड़ी
इस फर्जी कंपनी के जरिये ही दोनों मिलकर लोगों के साथ धोखाधड़ी किया करते थे. दोनों ग्राहकों को शेयर मार्केट में ऑनलाइन पैसे जमा करने के लिए प्रेरित करते थे. दोनों लोगों को यही प्रलोभन देते थे कि उनके पैसे बहुत जल्द ही दोगुने हो जाएंगे. इन दोनों के समझाने और प्रलोभन देने पर जो लोग झांसे में आ जाते थे, ये उनसे अपने खाते में पैसा डलवा लिया करते थे. लेकिन खाते में पैसे जमा होने के तुरंत बाद ही फोन नंबर व खातों को बंद कर देते थे.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

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सहकारी बैंकों में भर्ती के लिए परीक्षा केंद्र राज्य से बाहर बनाया जाना शर्मनाक : प्रदीप टम्टा

प्रदीप टम्टा, राज्यसभा सांसद

उत्तराखंड के सहकारी बैंकों में भर्ती के लिए परीक्षा केंद्र राज्य से बाहर बनाए जाने को राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने शर्मनाक बताया है.

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उत्तराखंड के सहकारी बैंकों में भर्ती के लिए परीक्षा केंद्र राज्य से बाहर बनाए जाने को राज्यसभा सांसद प्रदीप टम्टा ने शर्मनाक बताया है. उन्होंने कहा कि गरीब युवाओं के साथ राज्य सरकार मजाक कर रही है. टम्टा ने कहा कि सहकारी बैंक की परीक्षा का राज्य से बाहर होना परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, बागेश्वर समेत तमाम दूरदराज क्षेत्र के बच्चों को परीक्षा के लिए दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़, बरेली, मेरठ तक की दौड़ लगानी होगी.

संशोधन करे राज्य सरकार
प्रदीप टम्टा ने जानना चाहा कि जब राष्ट्रीय बैंकों की परीक्षा के लिए राज्य में ही केंद्र बनाए जाते हैं, तो राज्य के को-ऑपरेटिव बैंकों में भर्ती के लिए बाहर परीक्षा केंद्र बनाने का क्या औचित्य है. उन्होंने कहा कि तत्काल राज्य सरकार को इसे संशोधित कर समाप्त कर देना चाहिए.

परीक्षा कैसे निष्पक्ष होगी ?
प्रदीप टम्टा ने कहा कि एजेंसी ये क्यों नहीं बता रही है कि उत्तराखंड के अंदर आयोजित होने वाली परीक्षा निष्पक्ष नहीं होगी. उन्होंने कहा कि प्राइवेट एजेंसी को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी देना सही नहीं है जब खुद की एजेंसी आपके पास मौजूद हो. उन्होंने जानना चाहा कि सहकारी बैंकों में भर्ती के लिए उत्तराखंड से बाहर होने वाली परीक्षा कैसे निष्पक्ष होगी. उन्होंने कहा कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि ये परीक्षा उत्तराखंड के अंदर आयोजित नहीं की जा सकती है.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

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पिंडारी ग्लेशियर मार्ग से लापता पर्वतारोहियों को ढूंढने के लिए दल रवाना

पर्वतारोही ध्रुव जोशी कर रहे दल का नेतृत्व.

इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन दिल्ली का 14 सदस्यीय दल लापता हुए 8 पर्वतारोहियों को रेस्क्यू करने के लिए रवाना हो गया है.

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नंदा देवी ईस्ट पर्वतारोहण के दौरान हिमस्खलन के बाद लापता हुए पर्वतारोहियों की तलाश अब बागेश्वर जिले के पिंडारी ग्लेशियर मार्ग से की जाएगी. इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन दिल्ली का 14 सदस्यीय दल आज रेस्क्यू के लिए रवाना हो गया है. यह दल पिंडारी के जीरो प्वाइंट पर बेस कैंप बनाकर आगे रेस्क्यू की रणनीति तय करेगा. बता दें कि नंदा देवी ईस्ट पर्वतारोहण के लिए निकले ब्रिटेन, यूएसए, आस्ट्रेलिया तथा अल्मोड़ा के आठ पर्वतारोही बीते 26 मई को हिमस्खलन में दबकर लापता हो गए हैं. लापता पर्वतारोहियों में विश्व प्रसिद्ध अल्पाइन क्लांइबर मार्टिन मोरेन और उनके छह विदेशी पर्वतारोहियों के अलावा आईएमएफ के लाइजनिंग ऑफिसर चेतन पांडे भी शामिल हैं.

वायुसेना ने चलाया था रेस्क्यू अभियान
बीते 31 मई को पर्वतारोहियों के लापता होने और उनसे कोई संपर्क न हो पाने की सूचना स्थानीय प्रशासन को मिली थी. इसके बाद 2 जून से वायुसेना ने हेलीकॉप्टर के जरिये नंदा देवी ईस्ट में रेस्क्यू अभियान चलाया. अभियान के दौरान 5 लापता पर्वतारोहियों के दिखाई देने की बात भी सामने आई, लेकिन किसी को भी रेस्क्यू नहीं किया जा सका.

दल का नेतृत्व कर रहे पर्वतारोही ध्रुव जोशी
अब लापता पर्वतारोहियों का रेस्क्यू का कार्य भारतीय पर्वतारोहण संस्थान का दल करेगा. इस दल का नेतृत्व पर्वतारोही ध्रुव जोशी कर रहे हैं. यह दल आज पिंडारी ग्लेशियर की ओर रवाना हो गया है. इस टीम के लिए सैटेलाइट फोन, दवाई व पोर्टर आदि की व्यवस्था स्थानीय प्रशासन करेगा. उनकी हर तिविधियों पर नजर रखी जाएगी ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाई जा सके.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

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VIDEO : जंगल की आग रिहायशी इलाकों तक पहुंची, 75 हेक्टेयर वन राख में तब्दील

बागेश्वर जिले में जंगलों की आग रिहायशी इलाकों तक पहुंचने लगी है. इससे कई घरों तथा विद्यालयों को खतरा उत्पन्न हो गया है. जिले में अब तक आग से 75 हेक्टेयर जंगल जलकर राख हो चुके हैं. जंगलों में आग लगने से मौसम में भी तपिश बढ़ गई है. धुंध से पूरा शहर पटा पड़ा है. आग से जौलकांडे, मेहनरबूंगा, दफौट, खबडोली, कुकुड़माई, बलि बुबु का जंगल, पालनीकोट, असों पाना, गैराड़, बिलखेत के जंगल के साथ-साथ बैजनाथ रेंज, कपकोट रेंज , कांडा रेंज के सभी जंगल धधक रहे हैं. पालनीकोट, मेहनबूंगा जंगल की आग तो रिहायशी इलाकों तक पहुंच गई है. इससे लोग दशहत में हैं. कथायतबाड़ा की आग को फायर ब्रिग्रेड ने बुझा दिया है. अब तक जिले के तीन रेंजों में 75 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं. आग से विभाग को 1.50 लाख का नुकसान भी हुआ है. विभागीय अधिकारियों द्वारा फोन नहीं उठाने पर अपर जिलाधिकारी ने विभाग को नोटिस जारी किया है.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

बागेश्वर जिले में जंगलों की आग रिहायशी इलाकों तक पहुंचने लगी है. इससे कई घरों तथा विद्यालयों को खतरा उत्पन्न हो गया है. जिले में अब तक आग से 75 हेक्टेयर जंगल जलकर राख हो चुके हैं. जंगलों में आग लगने से मौसम में भी तपिश बढ़ गई है. धुंध से पूरा शहर पटा पड़ा है. आग से जौलकांडे, मेहनरबूंगा, दफौट, खबडोली, कुकुड़माई, बलि बुबु का जंगल, पालनीकोट, असों पाना, गैराड़, बिलखेत के जंगल के साथ-साथ बैजनाथ रेंज, कपकोट रेंज , कांडा रेंज के सभी जंगल धधक रहे हैं. पालनीकोट, मेहनबूंगा जंगल की आग तो रिहायशी इलाकों तक पहुंच गई है. इससे लोग दशहत में हैं. कथायतबाड़ा की आग को फायर ब्रिग्रेड ने बुझा दिया है. अब तक जिले के तीन रेंजों में 75 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं. आग से विभाग को 1.50 लाख का नुकसान भी हुआ है. विभागीय अधिकारियों द्वारा फोन नहीं उठाने पर अपर जिलाधिकारी ने विभाग को नोटिस जारी किया है. (बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

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बागेश्वर जिले में जंगलों की आग रिहायशी इलाकों तक पहुंचने लगी है. इससे कई घरों तथा विद्यालयों को खतरा उत्पन्न हो गया है. जिले में अब तक आग से 75 हेक्टेयर जंगल जलकर राख हो चुके हैं. जंगलों में आग लगने से मौसम में भी तपिश बढ़ गई है. धुंध से पूरा शहर पटा पड़ा है. आग से जौलकांडे,
मेहनरबूंगा, दफौट, खबडोली, कुकुड़माई, बलि बुबु का जंगल, पालनीकोट, असों पाना, गैराड़, बिलखेत के जंगल के साथ-साथ बैजनाथ रेंज, कपकोट रेंज , कांडा रेंज के सभी जंगल धधक रहे हैं. पालनीकोट, मेहनबूंगा जंगल की आग तो रिहायशी इलाकों तक पहुंच गई है. इससे लोग दशहत में हैं. कथायतबाड़ा की आग को फायर ब्रिग्रेड ने बुझा दिया है. अब तक जिले के तीन रेंजों में 75 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं. आग से विभाग को 1.50 लाख का नुकसान भी हुआ है. विभागीय अधिकारियों द्वारा फोन नहीं उठाने पर अपर जिलाधिकारी ने विभाग को नोटिस जारी किया है.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

VIDEO : सरयू और गोमती नदियों के होने के बावजूद बागेश्वर में जलसंकट

बागेश्वर में सरयू और गोमती दो-दो नदियों के होने के बाद भी लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है. जिले में लगातार बढ़ रही गर्मी की वजह से पानी की किल्लत भी होने लगी है. सैमदेव वार्ड , तहसील रोड, मजियाखेत, ठाकुरद्वारा और बागनाथ वार्ड में लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है. कई स्थानों पर रात को पानी की आपूर्ति हो रही है. इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है. लोगों के विरोध को देखते हुए जल संस्थान ने तहसील मार्ग, कथायतबाड़ा, बिलौना, स्टेशन रोड , नदीगांव में टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है. विभाग द्वारा चार करोड़ खर्च करने के बाद भी 24 घंटे पानी देने की बात भी कोरी निकली. शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों का हाल भी बहुत बुरा है. ग्रामीण पानी के लिए कई किमी का सफर तय करने को मजबूर हैं.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

बागेश्वर में सरयू और गोमती दो-दो नदियों के होने के बाद भी लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है. जिले में लगातार बढ़ रही गर्मी की वजह से पानी की किल्लत भी होने लगी है. सैमदेव वार्ड , तहसील रोड, मजियाखेत, ठाकुरद्वारा और बागनाथ वार्ड में लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है. कई स्थानों पर रात को पानी की आपूर्ति हो रही है. इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है. लोगों के विरोध को देखते हुए जल संस्थान ने तहसील मार्ग, कथायतबाड़ा, बिलौना, स्टेशन रोड , नदीगांव में टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है. विभाग द्वारा चार करोड़ खर्च करने के बाद भी 24 घंटे पानी देने की बात भी कोरी निकली. शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों का हाल भी बहुत बुरा है. ग्रामीण पानी के लिए कई किमी का सफर तय करने को मजबूर हैं. (बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

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बागेश्वर में सरयू और गोमती दो-दो नदियों के होने के बाद भी लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पा रहा है. जिले में लगातार बढ़ रही गर्मी की वजह से पानी की किल्लत भी होने लगी है. सैमदेव वार्ड , तहसील रोड, मजियाखेत, ठाकुरद्वारा और बागनाथ वार्ड में लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है. कई स्थानों पर रात को पानी की आपूर्ति हो रही है. इससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है. लोगों के विरोध को देखते हुए जल संस्थान ने तहसील मार्ग, कथायतबाड़ा, बिलौना, स्टेशन रोड , नदीगांव में टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई है. विभाग द्वारा चार करोड़ खर्च करने के बाद भी 24 घंटे पानी देने की बात भी कोरी निकली. शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों का हाल भी बहुत बुरा है. ग्रामीण पानी के लिए कई किमी का सफर तय करने को मजबूर हैं.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

 

चोर से ऐसे चकमा खा गया फौजी, देखें CCTV VIDEO

सोते हुए फौजी का सामान चोरी

हल्द्वानी रोडवेज स्टेशन में सोते हुए एक फौजी के सामान चोरी होने की वारदात सामने आ रही है. चोरी की घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है. दरअसल बागेश्वर के रहने वाले आनंद बल्लभ देहरादून जाने के लिए स्टेशन पहुंचे थे. बस का इंतजार करते वो सो गए और इसी दौरान पास खड़ा एक युवक उनका बैग लेकर फरार हो गया. सीसीटीवी में साफ दिख रहा है कि युवक मौका मिलते ही बैग लेकर रफू चक्कर हो जाता है. फौजी ने पुलिस में मामले की शिकायत दर्ज कर दी है.

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हल्द्वानी रोडवेज स्टेशन में सोते हुए एक फौजी के सामान चोरी होने की वारदात सामने आ रही है. चोरी की घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है. दरअसल बागेश्वर के रहने वाले आनंद बल्लभ देहरादून जाने के लिए स्टेशन पहुंचे थे. बस का इंतजार करते वो सो गए और इसी दौरान पास खड़ा एक युवक उनका बैग लेकर फरार हो गया. सीसीटीवी में साफ दिख रहा है कि युवक मौका मिलते ही बैग लेकर रफू चक्कर हो जाता है. फौजी ने पुलिस में मामले की शिकायत दर्ज कर दी है.

दवा होने के बावजूद केमिस्ट ने महिला को लौटाया, लाइसेंस रद्द

डॉ. जेसी मंडल, सीएमओ बागेश्वर

पीड़िता ने केमिस्ट की शिकायत सीएम पोर्टल, डीएम, केंद्रीय औषधि नियंत्रण बोर्ड, सीएमओ, महिला आयोग, बाल संरक्षण आयोग के अलावा कैमिस्ट एसोसिएशन में की थी.

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बागेश्वर जिला अस्पताल के पास एक केमिस्ट का लाइसेंस एक सप्ताह के लिए निरस्त कर दिया गया है. केमिस्ट का लाइसेंस इसलिए निरस्त कर दिया गया है क्योंकि महिला मरीज को जिस दवा की जरूरत थी वह उसके पास थी मगर उसने जरूरत के समय मरीज को दवा नहीं दी. केमिस्ट के इस व्यवहार से नाराज होकर मरीज ने उसकी शिकायत कर दी. जांच में केमिस्ट पर लगाए गए आरोप के सही पाए जाने के बाद ड्रग इंस्पेक्टर ने उसका लाइसेंस एक सप्ताह के लिए रद्द कर दिया. ड्रग इंस्पेक्टर ने एक हफ्ते के लिए केमिस्ट का लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति कर रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है. बता दें कि पीड़िता ने केमिस्ट की शिकायत सीएम पोर्टल, डीएम, केंद्रीय औषधि नियंत्रण बोर्ड, सीएमओ, महिला आयोग, बाल संरक्षण आयोग के अलावा कैमिस्ट एसोसिएशन में की थी.

मिली जानकारी के अनुसार सरकारी अस्पताल में जांच के बाद एक महिला को सभी दवाइयां तो अस्पताल में मिल गई, लेकिन एक दवा अस्पताल में नहीं होने के कारण बाहर से लेनी थी. जिस केमिस्ट पर कार्रवाई की गई उसके पास दवा थी. फिर भी मरीज को उसने नहीं दी.

बता दें कि महिला द्वार शिकायत किए जाने के करीब पौने दो महीने के बाद शनिवार को केमिस्ट के खिलाफ कार्रवाई की गई. बागेश्वर में सीएमओ डॉ. जेसी मंडल ने कहा कि जांच में महिला का आरोप सही पाए जाने के बाद ही केमिस्ट के खिलाफ कार्रवाई की गई है.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

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VIDEO : अदरक के पर्याप्त बीज नहीं मिलने से किसानों की परेशानी बढ़ी

बागेश्वर जिले में अदरक का बीज समाप्त होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है. करीब 70 प्रतिशत किसान अदरक की खेती करते हैं. उद्यान विभाग द्वारा एक परिवार को मात्र दो किलो अदरक का बीज दिया जा रहा था. पिछले एक सप्ताह से वह भी समाप्त है. इससे खेती को बढ़ावा देने की सरकार की सोच की भी पोल खुलती दिखाई दे रही है. किसानों का कहना है कि बंदर और सूअर खेती के दुश्मन बने हुए हैं. इसके चलते किसान अदरक, हल्दी जैसी वैकल्पिक खेती अपना रहे हैं. मगर अब बीज नहीं मिलने से उनकी दिक्कत बढ़ गई है. इधर उद्यान विभाग का कहना है कि 50 हेक्टेयर जमीन के हिसाब से बीज की मांग की गई थी. लेकिन जरूरत के हिसाब से कम बीज मिलने के कारण ही ये दिक्कत पेश आ रही है.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

बागेश्वर जिले में अदरक का बीज समाप्त होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है. करीब 70 प्रतिशत किसान अदरक की खेती करते हैं. उद्यान विभाग द्वारा एक परिवार को मात्र दो किलो अदरक का बीज दिया जा रहा था. पिछले एक सप्ताह से वह भी समाप्त है. इससे खेती को बढ़ावा देने की सरकार की सोच की भी पोल खुलती दिखाई दे रही है. किसानों का कहना है कि बंदर और सूअर खेती के दुश्मन बने हुए हैं. इसके चलते किसान अदरक, हल्दी जैसी वैकल्पिक खेती अपना रहे हैं. मगर अब बीज नहीं मिलने से उनकी दिक्कत बढ़ गई है. इधर उद्यान विभाग का कहना है कि 50 हेक्टेयर जमीन के हिसाब से बीज की मांग की गई थी. लेकिन जरूरत के हिसाब से कम बीज मिलने के कारण ही ये दिक्कत पेश आ रही है. (बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

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बागेश्वर जिले में अदरक का बीज समाप्त होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है. करीब 70 प्रतिशत किसान अदरक की खेती करते हैं. उद्यान विभाग द्वारा एक परिवार को मात्र दो किलो अदरक का बीज दिया जा रहा था. पिछले एक सप्ताह से वह भी समाप्त है. इससे खेती को बढ़ावा देने की सरकार की सोच की भी पोल खुलती दिखाई दे रही है. किसानों का कहना है कि बंदर और सूअर खेती के दुश्मन बने हुए हैं. इसके चलते किसान अदरक, हल्दी जैसी वैकल्पिक खेती अपना रहे हैं. मगर अब बीज नहीं मिलने से उनकी दिक्कत बढ़ गई है. इधर उद्यान विभाग का कहना है कि 50 हेक्टेयर जमीन के हिसाब से बीज की मांग की गई थी. लेकिन जरूरत के हिसाब से कम बीज मिलने के कारण ही ये दिक्कत पेश आ रही है.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

VIDEO : बागेश्वर में गुलदार ने हमला कर बच्ची को किया घायल, दहशत में ग्रामीण

बागेश्वर के दुग-नाकुरी के कई गांवो में इन दिनों गुलदार का आतंक बना हुआ है. शनिवार को गुलदार ने किडई गांव में एक बच्ची पर हमला कर दिया. बच्ची की चीख-पुकार सुन परिजन मौके पर भागते हुए 
आए और शोर मचाकर गुलदार को भगाया. परिजनों के शोर मचाने से घबराया गुलदार बच्ची को छोड़कर खेतों की ओर भाग गया. परिजनों ने घायल बच्ची का अस्पताल में उपचार कराया. गांव में गुलदार की मौजूदगी से ग्रामीण दशहत में हैं. गांव के लोगों ने वन विभाग से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने के साथ गांव में पिंजरा लगाने की मांग की है.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

बागेश्वर के दुग-नाकुरी के कई गांवो में इन दिनों गुलदार का आतंक बना हुआ है. शनिवार को गुलदार ने किडई गांव में एक बच्ची पर हमला कर दिया. बच्ची की चीख-पुकार सुन परिजन मौके पर भागते हुए आए और शोर मचाकर गुलदार को भगाया. परिजनों के शोर मचाने से घबराया गुलदार बच्ची को छोड़कर खेतों की ओर भाग गया. परिजनों ने घायल बच्ची का अस्पताल में उपचार कराया. गांव में गुलदार की मौजूदगी से ग्रामीण दशहत में हैं. गांव के लोगों ने वन विभाग से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने के साथ गांव में पिंजरा लगाने की मांग की है. (बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

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बागेश्वर के दुग-नाकुरी के कई गांवो में इन दिनों गुलदार का आतंक बना हुआ है. शनिवार को गुलदार ने किडई गांव में एक बच्ची पर हमला कर दिया. बच्ची की चीख-पुकार सुन परिजन मौके पर भागते हुए
आए और शोर मचाकर गुलदार को भगाया. परिजनों के शोर मचाने से घबराया गुलदार बच्ची को छोड़कर खेतों की ओर भाग गया. परिजनों ने घायल बच्ची का अस्पताल में उपचार कराया. गांव में गुलदार की मौजूदगी से ग्रामीण दशहत में हैं. गांव के लोगों ने वन विभाग से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने के साथ गांव में पिंजरा लगाने की मांग की है.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

कार्डों के पूरी तरह से ऑनलाइन होने पर ही मिलेंगे राशन, जून से लागू होंगे नए नियम

कार्डों के पूरी तरह से ऑनलाइन होने पर ही मिलेंगे राशन, जून से लागू होंगे नए नियम

बागेश्वर में जून माह से केवल उन्हीं कार्डों में राशन दिया जाएगा, जो पूरी तरह से ऑनलाइन होंगे. कार्ड में कुछ यूनिट ऑनलाइन नहीं होने पर भी राशन नहीं दिया जाएगा.

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उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में जून माह से केवल उन्हीं कार्डों में राशन दिया जाएगा, जो पूरी तरह से ऑनलाइन होंगे. कार्ड में कुछ यूनिट ऑनलाइन नहीं होने पर भी राशन नहीं दिया जाएगा. मामले में ज्यादा जानकारी देते हुए जिला पूर्ति अधिकारी ने अरुण कुमार वर्मा बताया कि जिले के सभी 66000 राशन कार्डों के मॉडिफिकेशन का काम किया जा रहा है. अगर सभी राशन कार्ड धारक अपने सभी यूनिटों के आधार कार्ड, परिवार के मुखिया की बैंक अकाउंट की डिटेल अपने सस्ते गल्ले विक्रेता को उपलब्ध नहीं कराएंगे, तो उन्हें राशन नहीं मिल पाएगा.

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जून से पहले कार्ड धारकों को सारे काम निपटा लेने होंगे, नहीं तो राशन उन्हें जून माह से राशन नहीं मिल पाएगा. जिला पूर्ति अधिकारी ने कहा कि बागेश्वर जिले में करीब 66 हजार राशन कार्ड हैं. सरकार की एक स्कीम है कि जून से पहले सारे राशन कार्ड ऑनलाइन हो जाए. अगर ऐसा नहीं होता है, तो इससे सबसे ज्यादा परेशानी कार्ड धारकों को ही उठानी पड़ेगी. क्योंकि फिर उन्हें राशन देना बंद कर दिया जाएगा.

(रिपोर्ट: जगदीश चंद्र)

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VIDEO : अग्निशमन पखवाड़े का समापन, कलेक्ट्रेट में लगे हैं एक्सापायर्ड फायर सिलेंडर

अग्निशमन पखवाड़े का समापन हो गया है. इसके तहत जगह-जगह आग लगने जैसी घटनाओं की रोकथाम और ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए लोगों को जागरूक किया गया. लेकिन कलेक्ट्रेट में ही जागरूकता की कमी नजर आई. जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में लगे सभी फायर सिलेंडरों का एक्सपायर्ड होना प्रशासन की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है. अग्निशमन पखवाड़े के दौरान विगत दिनों जिले में सरकारी-प्राइवेट कार्यालयों और स्कूलों में आगजनी की घटनाओं से निपटने और रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया. लेकिन जागरूकता अभियान की गंभीरता का अंदाजा कलेक्ट्रेट परिसर में लगे एक्सपायर्ड डेट के फायर सिलेंडरो से लगाया जा सकता है. कलेक्ट्रेट परिसर में आगजनी की घटना से निपटने के लिए करीब 42 फायर सिलेंडर लगाए गए हैं. ये सभी फायर सिलेंडर 4 अप्रैल 2019 को ही एक्सपायर हो चुके हैं. आगजनी जैसी घटना होने पर कलेक्ट्रेट कर्मी इससे निपटने के लिए तैयार नजर नहीं आ रहे.
(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

अग्निशमन पखवाड़े का समापन हो गया है. इसके तहत जगह-जगह आग लगने जैसी घटनाओं की रोकथाम और ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए लोगों को जागरूक किया गया. लेकिन कलेक्ट्रेट में ही जागरूकता की कमी नजर आई. जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में लगे सभी फायर सिलेंडरों का एक्सपायर्ड होना प्रशासन की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है. अग्निशमन पखवाड़े के दौरान विगत दिनों जिले में सरकारी-प्राइवेट कार्यालयों और स्कूलों में आगजनी की घटनाओं से निपटने और रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया. लेकिन जागरूकता अभियान की गंभीरता का अंदाजा कलेक्ट्रेट परिसर में लगे एक्सपायर्ड डेट के फायर सिलेंडरो से लगाया जा सकता है. कलेक्ट्रेट परिसर में आगजनी की घटना से निपटने के लिए करीब 42 फायर सिलेंडर लगाए गए हैं. ये सभी फायर सिलेंडर 4 अप्रैल 2019 को ही एक्सपायर हो चुके हैं. आगजनी जैसी घटना होने पर कलेक्ट्रेट कर्मी इससे निपटने के लिए तैयार नजर नहीं आ रहे. (बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

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अग्निशमन पखवाड़े का समापन हो गया है. इसके तहत जगह-जगह आग लगने जैसी घटनाओं की रोकथाम और ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए लोगों को जागरूक किया गया. लेकिन कलेक्ट्रेट में ही जागरूकता की कमी नजर आई. जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में लगे सभी फायर सिलेंडरों का एक्सपायर्ड होना प्रशासन की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है. अग्निशमन पखवाड़े के दौरान विगत दिनों जिले में सरकारी-प्राइवेट कार्यालयों और स्कूलों में आगजनी की घटनाओं से निपटने और रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया. लेकिन जागरूकता अभियान की गंभीरता का अंदाजा कलेक्ट्रेट परिसर में लगे एक्सपायर्ड डेट के फायर सिलेंडरो से लगाया जा सकता है. कलेक्ट्रेट परिसर में आगजनी की घटना से निपटने के लिए करीब 42 फायर सिलेंडर लगाए गए हैं. ये सभी फायर सिलेंडर 4 अप्रैल 2019 को ही एक्सपायर हो चुके हैं. आगजनी जैसी घटना होने पर कलेक्ट्रेट कर्मी इससे निपटने के लिए तैयार नजर नहीं आ रहे.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

मैक्स वाहन के खाई में गिरने से मौके पर 2 की मौत, 4 घायल जिला अस्पताल में भर्ती

बागेश्वर जिला अस्पताल में घायलों का इलाज जारी.

बागेश्वर में कपकोट से सूपी जा रही मैक्स वाहन मुनार बेंड के पास अनियंत्रित हो कर 150 मीटर गहरी खाई में जा गिरी. इस दुर्घटना में 2 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. वाहन में कुल 6 लोग सवार थे.

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बागेश्वर में कपकोट से सूपी जा रही मैक्स वाहन मुनार बेंड के पास अनियंत्रित हो कर 150 मीटर गहरी खाई में जा गिरी. वाहन में कुल 6 लोग सवार थे. इस दुर्घटना में 2 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं अन्य चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को स्थानीय जनता और पुलिस की मदद से खाई से ऊपर लेकर आया गया. फिर उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट लाया गया. लेकिन घायलों को लाने वाले ग्रामीणों का कहना है कि सीएचसी की एमरजेंसी वार्ड में ताला लटका हुआ था.

ग्रामीणों ने कहा कि सीएमओ को दुर्घटना की सूचना देने के बाद वार्ड का ताला खोला गया. यहां प्रथमिक उपचार के बाद घायलों को जिला चिकित्सालय बागेश्वर रेफर कर दिया गया. कपकोट अस्पताल की इस
लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में काफी रोष है.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

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VIDEO : लगातार 3 दिन बारिश से गेहूं की फसल चौपट, फल और सब्जियां भी बर्बाद

तीन दिनों तक लगातार हुई बारिश से जिले में खेती को काफी नुकसान पहुंचा है. गेहूं, जौ और मूसर की तैयार फसल बारिश से अधिक प्रभावित हुई है. आम, पपीता, अखरोट, माल्टा संतरा आदि फलों के बौर व फूल भी झड़ गए हैं. वहीं रवाईखाल में निर्माणाधीन तालड़ रोड का मलबा खेतों में घुस गया, जिससे खेतों में तैयार गेहूं की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई. ग्रामीणों का कहना है कि खेती पूरी तरह से नष्ट हो गई है. सब्जी व फलों की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है. वहीं जिले के गरुड़, कपकोट, कांडा, काफलीगैर और दुग नाकुरी तहसीलों में भी बारिश से फसल बर्बाद हो गई है.
(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

तीन दिनों तक लगातार हुई बारिश से जिले में खेती को काफी नुकसान पहुंचा है. गेहूं, जौ और मूसर की तैयार फसल बारिश से अधिक प्रभावित हुई है. आम, पपीता, अखरोट, माल्टा संतरा आदि फलों के बौर व फूल भी झड़ गए हैं. वहीं रवाईखाल में निर्माणाधीन तालड़ रोड का मलबा खेतों में घुस गया, जिससे खेतों में तैयार गेहूं की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई. ग्रामीणों का कहना है कि खेती पूरी तरह से नष्ट हो गई है. सब्जी व फलों की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है. वहीं जिले के गरुड़, कपकोट, कांडा, काफलीगैर और दुग नाकुरी तहसीलों में भी बारिश से फसल बर्बाद हो गई है. (बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)

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तीन दिनों तक लगातार हुई बारिश से जिले में खेती को काफी नुकसान पहुंचा है. गेहूं, जौ और मूसर की तैयार फसल बारिश से अधिक प्रभावित हुई है. आम, पपीता, अखरोट, माल्टा संतरा आदि फलों के बौर व फूल भी झड़ गए हैं. वहीं रवाईखाल में निर्माणाधीन तालड़ रोड का मलबा खेतों में घुस गया, जिससे खेतों में तैयार गेहूं की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई. ग्रामीणों का कहना है कि खेती पूरी तरह से नष्ट हो गई है. सब्जी व फलों की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है. वहीं जिले के गरुड़, कपकोट, कांडा, काफलीगैर और दुग नाकुरी तहसीलों में भी बारिश से फसल बर्बाद हो गई है.

(बागेश्वर से जगदीश चंद्र की रिपोर्ट)
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