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इधर उत्तराखंड स्थापना दिवस पर विकास के दावे, उधर डोली पर अस्पताल जाने को मजबूर पहाड़ के ग्रामीण

इधर उत्तराखंड स्थापना दिवस पर विकास के दावे, उधर डोली पर अस्पताल जाने को मजबूर पहाड़ के ग्रामीण

बागेश्वर में इस तरह मरीज़ों को अस्पताल पहुंचाया जाता है.

बागेश्वर में इस तरह मरीज़ों को अस्पताल पहुंचाया जाता है.

Development in Uttarakhand : उत्तराखंड में पहाड़ी ज़िलों में से एक बागेश्वर में सोराग जैसे कई गांव हैं, जहां गर्भवतियों और बीमारों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को लगभग युद्ध ही लड़ना पड़ता है. उत्तराखंड स्थापना दिवस (Uttarakhand Foundation Day) समारोह के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई मंत्रियों ने पहाड़ों तक विकास होने के संबंध में कई दावे किए. लेकिन जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का आलम यह है कि अब भी यहां मरीज़ जान जोखिम में डालकर मीलों पैदल चलते हैं, तब कहीं जाकर कोई सड़क मिल पाती है. ताज़ा तस्वीरें क्या कुछ बयान कर रही हैं, देखिए.

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    सुष्मिता थापा
    बागेश्वर. यूं तो उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद से अनेक गांव सड़क सुविधा से जुड़ गए हैं, लेकिन आज भी कई ऐसे गांव हैं, जहां के बाशिंदे मोटर मार्ग के लिए भारी जद्दोजहद कर रहे हैं. 21वें स्थापना दिवस का जश्न मना रहे राज्य में बड़े बड़े दावे ज़रूर किए जा रहे हैं लेकिन विकास के दावों की हकीकत बयां करती तस्वीरें कपकोट ब्लॉक के दूरस्थ क्षेत्र मल्ला दानपुर के सोराग गांव से आ रही हैं. यहां के लोगों के लिए सड़क सुविधा आज भी सपना है और हालत यह है कि बीमार लोगों को ले जाने के लिए डोली ही एकमात्र सहारा है. तस्वीरें देखकर ही समझा जा सकता है कि पहाड़ी रास्तों में यह कितना जोखिम भरा होता है.

    सड़क से वंचित मल्लादानपुर के सोराग ग्राम पंचायत के लोग मरीज़ को आज भी कंधे पर ढोने पर मजबूर हैं. ये तस्वीरें सोराग गांव के 60 वर्षीय हरराम की हैं, जो बीते अक्टूबर माह में खेत में काम करते समय गिर गए थे. उनका पैर फ्रैक्चर हो गया था. उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट से ज़िला अस्पताल भेजा गया और​ फिर हल्द्वानी रेफर किया गया. उपचार के बाद वह 50 दिन बाद घर लौटे. इस दौरान गांव के युवाओं ने लगभग आठ किमी दूर गांव तक उन्हें चारपाई पर लेटाकर पहुंचाया.

    21वीं सदी के डिजिटल युग में आज भी आधारभूत सुविधाओं के अभाव से कुछ इलाके ग्रस्त हैं. बिजली, पानी, सड़क और मोबाइल नेटवर्क की समस्या पहाड़ों में आम बात है. बागेश्वर ज़िले में एक नहीं, सोराग जैसे कई गांव हैं, जहाँ दैनिक कार्य, स्कूल, बाजार या बीमारी में सड़क की समस्या आड़े आती है. ये गांव पहाड़ों के विकास की हकीकत का खुलासा करते हैं.

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    पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क के अब तक न पहुंच पाने से मरीज़ों को मीलों तक इस तरह ले जाया जाता है.

    दीवाली के बाद बढ़ गए मरीज़
    सर्दी के मौसम के चलते बागेश्वर ज़िले में बीमारियों का प्रकोप बढ़ता हुआ देखा जा रहा है. एक खबर की मानें तो ज़िला अस्पताल में रोज़ाना जांच के लिए 500 से ज़्यादा मरीज़ पहुंच रहे हैं. दीवाली के पहले ऐसे मरीज़ों की संख्या 250 थी, जो अब लगभग दोगुनी हो चुकी है. नवंबर महीने के पहले नौ दिनों के भीतर ही करीब 2000 मरीज़ ज़िला अस्पताल की ओपीडी में दर्ज पाए गए हैं.

    इन मरीज़ों में से ज़्यादातर मौसमी बुखार, सर्दी, ज़ुकाम, एलर्जी और पेट संबंधी बीमारी की शिकायतें लेकर पहुंच रहे हैं. ज़िला अस्पताल में मरीज़ों की लाइन लग रही है तो डॉक्टर मौसम के लिहाज़ से खान पान, रहन सहन और साफ सफाई को लेकर सतर्क रहने की हिदायत भी दे रहे हैं.

    Tags: Bageshwar, Uttarakhand news

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