मानसून सीजन में कर्मचारियों की कमी ने बढ़ाई प्रशासन और लोगों की परेशानी

सरकार ने आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति तक सुविधाएं पहुंचाने के लिए बागेश्वर में नई तहसीलों का गठन तो कर दिया, मगर इन तहसीलों में आज तक ढांचागत सुविधाएं विकसित नहीं हो पायी हैं.

News18 Uttarakhand
Updated: July 29, 2018, 2:13 PM IST
मानसून सीजन में कर्मचारियों की कमी ने बढ़ाई प्रशासन और लोगों की परेशानी
बागेश्वर जिले की 6 तहसीले मात्र एक नायब तहसीलदार के भरोसे चल रही है.
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Updated: July 29, 2018, 2:13 PM IST
एक तरफ जहां मानसूनी सीजन अपने पूरे शबाब पर है, वहीं आपदा प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाने वाली प्रशासनिक इकाइयां, कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है. बागेश्वर जिले की 6 तहसीलों का प्रभार एक नायब तहसीलदार के पास है. ऐसे में जिले की प्रशासनिक व्यवस्थाओं का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है. सरकार ने आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति तक सुविधाएं पहुंचाने के लिए बागेश्वर में नई तहसीलों का गठन तो कर दिया, मगर इन तहसीलों में आज तक ढांचागत सुविधाएं विकसित नहीं हो पायी हैं. हालात ये हैं कि जिले की ये 6 तहसील मात्र एक नायब तहसीलदार के भरोसे चल रही हैं.

इन सभी 6 तहसीलों में ना ही अब तक पूर्णकालिक तहसीलदार तैनात हुए है और न ही इनमें पूरा स्टाफ है. जिसके चलते प्रमाणपत्र बनाने जैसे छोटे काम के लिए भी जनता कई दिनों तक तहसीलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं.

कर्मचारियों की इस कमी के चलते जिला प्रशासन को भी मानसून काल के दौरान व्यवस्थाएं चलाने में खासी दिक्क़तें पेश आ रही है. जिलाधिकारी भी कई बार राजस्व परिषद से तहसीलदार सहित अन्य स्टाफ की नियुक्ति को लेकर पत्र भेज चुकी है, पर आज तक उनके पत्र का कोई संज्ञान नहीं लिया गया है.

भौगोलिक विषमताओं से जूझ रहे पहाड़ को विकास के साथ ही प्रशासनिक इकाईयों के विकेन्द्रीकरण की भी खास दरकार है. छोटी प्रशासनिक इकाईयों के गठन से जहां दुर्गम क्षेत्र की जनता के कामकाज आसानी से हल हो सकेंगे वहीं विकास कार्यों पर भी पैनी नजर रखी जा सकेगी.

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(रिपोर्ट - राकेश पंत)
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