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विकास से दूर पहाड़..! पिछड़ गया सांसद का 'आदर्श गांव', सड़क तक नहीं, कैसा है CM धामी के गांव के हाल?

विकास से दूर पहाड़..! पिछड़ गया सांसद का 'आदर्श गांव', सड़क तक नहीं, कैसा है CM धामी के गांव के हाल?

सांसद के गोद लिये गांव में अब तक सड़क नहीं पहुंची.

सांसद के गोद लिये गांव में अब तक सड़क नहीं पहुंची.

Uttarakhand Development Issue: स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और रोज़गार (Employment) को लेकर उत्तराखंड की जनता आए दिन सड़कों पर रहती है. मूलभूत सुविधाओं (Basic Needs) से वंचित लोगों के धरने-प्रदर्शन लगभग पूरे प्रदेश में हो रहे हैं. उत्तराखंडी अपनी परेशानी लेकर तहसील से लेकर ज़िला मुख्यालय तक चक्कर लगाने पर मजबूर हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Election) के मौसम में भी सुनने वाला कोई नहीं. गांवों तक विकास कितना पहुंचा? खुद सीएम पुष्कर धामी (Pushkar Dhami) के गांव के क्या हाल हैं?

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    रिपोर्ट – सुष्मिता थापा

    बागेश्वर. 21 साल के उत्तराखंड में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर अब तक की सरकारें ठोस कदम नहीं उठा पाई हैं. 21 साल में अब तक दस साल भाजपा और दस साल कांग्रेस को मिले, लेकिन दोनों पार्टियों की सरकारों के बाद मूलभूत सुविधाओं को लेकर हालात बहुत बेहतर नहीं हैं. इसका एक जीता जागता नमूना है, बागेश्वर ज़िले का दूरस्थ गांव मजकोट. यह गांव सांसद आदर्श ग्राम भी है, लेकिन मूलभूत सुविधाओं से वंचित. सांसद के गोद लिये गांव मजकोट के लोग अब बुनयादी सुविधाओं की मांग को लेकर लिए अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, जबकि विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज़ हैं.

    भाजपा के सांसद अजय टम्टा ने इस गांव को गोद लिया था और आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया था. लेकिन मजकोट के आनंद पुरी, मान गिरी, पूरन गिरी, कैलाश गिरी, लक्ष्मण गिरी, वीरेंद्र गिरी, मोहनी गिरी जैसे कई ग्रामीण बताते हैं कि उनका गांव आज भी विकास की दौड़ में सबसे पीछे है. ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग सड़क है, जिसके लिए वो ‘रोड नहीं तो वोट नहीं’ की मुहिम छेड़ चुके हैं. एसडीएम राजकुमार पांडे की मानें तो विभाग और ठेकेदार की लड़ाई में गांव तक सड़क नहीं पहुंच पा रही. अन्य कई समस्याओं ने इस गांव को घेर रखा है.

    कितना बीमार है ये आदर्श गांव?

    • ग्रामीण एक सुर में बताते हैं कि उन्हें गैस सिलेंडर लाने में 200 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं.
    • मरीज़ों और प्रसव पीड़िताओं को अस्पताल ले जाना हमेशा चुनौती भरा रहता है.
    • गांव पहले ही पलायन का दंश झेल रहा है.
    • जंगली जानवरों के आतंक से भारी नुकसान हो रहा है.
    • ग्रामीणों की सबसे बड़ी शिकायत तो यह है कि सांसद हों या सरकार, कोई गुहार तक सुन नहीं रहा है.
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    ग्रामीणों की लिखित शिकायत और चेतावनी और सांसद अजय टम्टा का जवाब.

    प्रदेश के मुखिया का गांव तक विकास से कोसों दूर

    मजकोट तो सिर्फ एक उदहारण है, कितने ही मजकोट उत्तराखंड में हैं, जहां लोग मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीने को मजबूर हैं. पिछले दिनों भाजपा की विजय संकल्प यात्रा का शुभारंभ करने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बागेश्वर पहुंचे थे. नुमाइश मैदान में उन्होंने एक जनसभा में भाषण देते-देते अपने गांव में सड़क न होने की बात कह दी. उन्होंने कहा वह पिथौरागढ़ के डीडीहाट विधानसभा क्षेत्र के मूल निवासी हैं और उनके गांव में आज तक सड़क नहीं पहुंची है.

    बीजेपी ने किया विकास की गंगा बहने का दावा

    सीएम के भाषण के उलट केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने दावा कर दिया कि पिछले 5 सालों में उत्तराखंड में हर तरफ विकास की गंगा बही है. यह दावा भट्ट ने पिथौरागढ़ में ही तब किया, जब बीजेपी की विजय संकल्प यात्रा वहां पहुंची. इस मौके पर भट्ट के साथ ही राज्य के कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल और अरविंद पांडे ने ये भी दावा भी किया कि 2022 में भाजपा सत्ता में वापसी करेगी.

    Tags: Development, Roads, Uttarakhand news

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