इंसानियत के धर्म को सही मायनों में निभा रही है कोटद्वार निवासी यह महिला

आज की इस दौड़ भाग भरी जिदंगी में जब इंसान इंसान के दुख दर्द को नही बांट पा रहा है तो इसी समाज में कुछ लोग ऐसे भी है जो इंसानियता को सही मायनों में आज भी जिंदा रखे हुए है.

Himanshu Badoni | ETV UP/Uttarakhand
Updated: August 21, 2016, 3:47 PM IST
इंसानियत के धर्म को सही मायनों में निभा रही है कोटद्वार निवासी यह महिला
ETV/Pradesh18
Himanshu Badoni
Himanshu Badoni | ETV UP/Uttarakhand
Updated: August 21, 2016, 3:47 PM IST
आज की इस दौड़ भाग भरी जिदंगी में जब इंसान इंसान के दुख दर्द को नही बांट पा रहा है तो इसी समाज में कुछ लोग ऐसे भी है जो इंसानियता को सही मायनों में आज भी जिंदा रखे हुए है.

कोटद्वार निवासी एक ऐसी महिला से आज हमकों मिलवा रहें है जिसने इंसानियत की ऐसी मिशाल पेश की है जिसकी जुबान वाले तो क्या बेजुबान भी मुरीद हैं.पिछले 30 सालों से बेजुवान जानवरों के हर दुख दर्द को बांटने के काम में लगी इस महिला ने अपने बच्चों की तरह इन बेजुवानों की जो सेवा की है उसके देखकर एक बार फिर इंसानियता के रुप में किसी फरिश्तें की याद आने लगी है.

बेजुवान जानवरों को अपने घर में पनाह देकर उनका दुख दर्द बांटती है यह है कोटद्वार निवासी समाजसेविका सुषमा जखमोला जिन्होंने बेजुबानों को ही अपना परिवार बना लिया है.दरअसल इस दौड़ भाग भरी जिदंगी में जब इंसान अपनी इंसानियता को भूलता जा रहा है तो ऐसे में सुषमा जखमोल समाज के सामने ऐसी मिशाल बनकर सामने आई है जिसकी जितनी तारीफ की जाय वह कम ही है.

इंसानी लापरवाही के चलते सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए बेजुबान को अपने बच्चों की तरह अपने घर में पनाह देकर उनका इलाज करने वाली सुषमा जखमोला उन चुनिंदा लोगों में शामिल है जिनके बल पर आज इंसानियता जिंदा है.

कोटद्वार और उसके आस-पास कहीं पर भी यदि कोई बेजुबान जानवर जुवान वाले जानवर का शिकार होकर सड़क दुर्घटना में घायल हो जाता है तो सुषमा दौड़ निकलती है अपने घर से उसकी जान बचाने के लिए सड़कों पर.यह सुषमा की इंसानियता का ही नतीजा है कि आज सैकड़ो बेजुवान जानवर ठीक होकर अपने पैरों पर चल रहे है तो दर्जनों उसके घर में इसकी कोशिश कर रहें है.

इतना ही नहीं बेजुवान जानवरों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ सुषमा जखमोला ने समय-समय पर आंदोलन चला कर भी उनको अत्याचार मुक्त किया है.पौड़ी गढ़वाल के प्रसिद्ध बूखांल मेले में हर साल चढ़ाई जाने वाली पशुबली के खिलाफ आवाज उठाने वाली सुषमा जखमोला के कार्यों से पशु प्रेमी मेनका गांधी भी इतनी प्रभावित हुई कि वह भी सुषमा की पीठ थपथपायें बिना नही रह सकीं.

हांलाकि बेजुबान जानवरों की सेवा करने वाली सुषमा जखमोला को किसी प्रकार की कोई सरकारी सहायता नहीं मिली लेकिन इसके बावजूद वह आज भी अपनी निजी संसाधनों के बल पर पशुओं की सेवा में रात दिन लगी है.जिसके चलते उसकी इंसानियता के समाजसेवी भी कायल है.
Loading...

बहरहाल सच्चे अर्थों में यदि कोई आज मानवता धर्म को निभा रही है तो वह सुषमा जखमोला है.सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए बेजुवान जानवरों को अपने घर लेकर उनकी सेवा में लगी सुषमा जखमोला आज समाज के सामने एक ऐसी मिशाल बनकर उभरी है जिससे सभी को सबक लेना चाहिए ताकि इंसानियता के धर्म को निभाया जा सका.आज जरुरत है राज्य सरकार को भी सुषमा जखमोला जैसे पशु प्रेमियों की मुहिम में साथ देने की ताकि बेजुवानों की जिदंगी की कीमत हर कोई समझ सके.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए बागेश्‍वर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 21, 2016, 3:26 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...