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बाघों के लिहाज से उत्तराखंड अब अव्वल राज्यों में
Bageshwar News in Hindi

Pushkar Rawat | ETV UP/Uttarakhand
Updated: April 21, 2016, 11:41 AM IST
बाघों के लिहाज से उत्तराखंड अब अव्वल राज्यों में
बाघों की तादाद के लिहाज से उत्तराखंड देश के अव्वल राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है. राज्य में इस समय 340 बाघ हैं. किसी भी जंगल की सेहत के लिए बाघों का होना जरूरी माना जाता है. जंगल के ईको सिस्टम को बनाए रखने के लिए बाघ की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है.

बाघों की तादाद के लिहाज से उत्तराखंड देश के अव्वल राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है. राज्य में इस समय 340 बाघ हैं. किसी भी जंगल की सेहत के लिए बाघों का होना जरूरी माना जाता है. जंगल के ईको सिस्टम को बनाए रखने के लिए बाघ की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है.

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बाघों की तादाद के लिहाज से उत्तराखंड देश के अव्वल राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है. राज्य में इस समय 340 बाघ हैं. हाल ही में पूरी हुई इस गणना के अनुसार उत्तराखंड से एक पायदान आगे कर्नाटक राज्य है. जहां बाघों की तादाद 406 है. जबकि मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्य उत्तराखंड से काफी पीछे हैं.

खास बात यह है कि उत्तराखंड राज्य क्षेत्रफल में कर्नाटक से काफी छोटा है और यहां बाघ केवल तराई के हिस्सों में पाए जाते हैं. जिनका अधिकांश हिस्सा जिम कार्बेट और राजाजी नेशनल पार्क में आता है. इसे राज्य में सेव टाइगर प्रोजेक्ट की सफलता ही कहा जाएगा कि बाघों की तादाद में यहां इतनी बढ़ोत्तरी हुई है. इस सफलता से उत्साहित वन विभाग अब बाघों के संरक्षण को लेकर और आगे बढ़ने की तैयारी में जुटा है. विभाग के प्रमुख वन संरक्षक डीपीएस खाती बताते हैं कि यह उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है. अब जिम कार्बेट नेशनल पार्क के साथ ही राजाजी नेशनल पार्क में बाघों की तादाद बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएंगे. जिससे उत्तराखंड देश भर में पहले स्थान पर आ सके.

बाघ हैं जरूरी



किसी भी जंगल की सेहत के लिए बाघों का होना जरूरी माना जाता है. जंगल के ईको सिस्टम को बनाए रखने के लिए बाघ की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है. जंगल में बाघ की चहलकदमी से बड़े पैमाने पर इंसानी गतिविधियों पर भी अंकुश लगा रहता है. वहीं ईको सिस्टम के संतुलन के लिहाज से बाघ के किए गए शिकार पर अनेक तरह के पशु पक्षियों का भोजन भी निर्भर करता है. ऐसे में बाघ के पूरी तरह लुप्त होने से पर्यावरणीय असंतुलन का बड़ा खतरा भी पैदा हो जाएगा.



टला नहीं है बाघों का संकट

कुछ जगहों पर बढ़ी हुई तादाद के बावजूद बाघ एक अत्यंत संकटग्रस्त प्राणी है. इसे लगातार वास स्थलों की क्षति और अवैध शिकार का संकट बना ही रहता है. मौजूदा समय में दुनियाभर में बाघों की संख्या 6,000 से भी कम है. उनमें से लगभग 4,000 भारत में पाए जाते हैं. भारत के बाघ को एक अलग प्रजाति माना जाता है, जिसका वैज्ञानिक नाम है पेंथेरा टाइग्रिस टाइग्रिस. बाघ की नौ प्रजातियों में से तीन अब विलुप्त हो चुकी हैं. ज्ञात आठ किस्‍मों की प्रजाति में से रायल बंगाल टाइगर उत्‍तर पूर्वी क्षेत्रों को छोड़कर देश भर में पाया जाता है.
First published: April 21, 2016, 11:41 AM IST
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