खाली हो रहे हैं भारत-नेपाल सीमा से लगे सीमांत गांव

चम्पावत जिले के इंडोनेपाल सीमा से लगे गावं पलायन के चलते पूरी तरह खाली हो गए हैं. यहां के एक सीमन्त गांव मकसून में ईटीवी की टीम ने पहुंचकर हालात का जायजा लिया. मकसून गांव की इमारतें कभी बुलन्द हुआ करती थी, लेकिन आज इस गांव में एक भी परिवार नहीं बसता.

Kamlesh Bhatt | ETV UP/Uttarakhand
Updated: May 12, 2017, 11:31 AM IST
खाली हो रहे हैं भारत-नेपाल सीमा से लगे सीमांत गांव
चम्पावत जिले के इंडोनेपाल सीमा से लगे गावं पलायन के चलते पूरी तरह खाली हो गए हैं.
Kamlesh Bhatt | ETV UP/Uttarakhand
Updated: May 12, 2017, 11:31 AM IST
चम्पावत जिले के इंडोनेपाल सीमा से लगे गावं पलायन के चलते पूरी तरह खाली हो गए हैं. यहां के एक सीमन्त गांव मकसून में ईटीवी की टीम ने पहुंचकर हालात का जायजा लिया.

मकसून गांव की इमारतें कभी बुलन्द हुआ करती थी, लेकिन आज इस गांव में एक भी
परिवार नहीं बसता. जिसके चलते अब यह गांव खण्डहर में तब्दील हो रहा है.

मकसून गावं के घर बता रहे हैं, कभी यहां आबादी बस्ती थी. लेकिन घरों में लगे ताले खण्डर में तब्दील यह घर बता रहें हैं, अब इस गांव में कोई नहीं रहता है.

गांव के उजाड़ पड़े खेत खलिहान अपनी कहानी बया कर रहे हैं. अब इन खेतों में उगने वाली फसल की जगह लंबी घास लहरा रही है. बुनयादी सुविधाएं न होने के चलते ये गांव खाली हो चुके हैं.

मंत्री और जिला प्रभारी मंत्री रेखा आर्या भी इस बात की तस्दीक कर रही हैं कि सीमा से लगे दूरस्थ क्षेत्रों से बुनियादी सुविधा न होने से पलायन हो रहा है. आर्या कहती हैं, सीएम इस मामले को लेकर गंभीर हैं. उन्होंने पलायन रोकने को लेकर एक कमेटी गठित की है. जल्द ही पलायन को रोकने को लेकर ठोस कदम उठाये जाएंगे.

बरहाल सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण सीमांत गांव खाली हो रहे हैं. लिहाजा जब तक
सरकार सीमांत इलाकों से लगे गावों में बसे ग्रामीणों को बुनियादी सुविधा और
रोजगार मुहिया नहीं कराती तब तक पलायन रोक पाना संभव नहीं होगा.
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