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राष्ट्रीय पंचायतराज दिवस: ग्राम प्रधान से टॉप लीडरशिप तक पहुंचे हैं उत्तराखंड के कईं बड़े नेता

राष्ट्रीय पंचायतराज दिवस: ग्राम प्रधान से टॉप लीडरशिप तक पहुंचे हैं उत्तराखंड के कईं बड़े नेता

आज राष्ट्रीय पंचायत राज दिवस है. देश के कईं हिस्सों में पंचायती राजव्यवस्था के तहत ग्राम स्वराज की भावना जमीन पर पूरी तरह ना उतर पाई हो, लेकिन उत्तराखंड में ग्राम प्रधान, ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत की राजनीति से आज की टाप लीडरशिप तैयार हुई है.( File Photo: Ex CM Harish Rawat)

आज राष्ट्रीय पंचायत राज दिवस है. देश के कईं हिस्सों में पंचायती राजव्यवस्था के तहत ग्राम स्वराज की भावना जमीन पर पूरी तरह ना उतर पाई हो, लेकिन उत्तराखंड में ग्राम प्रधान, ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत की राजनीति से आज की टाप लीडरशिप तैयार हुई है.( File Photo: Ex CM Harish Rawat)

आज राष्ट्रीय पंचायत राज दिवस है. देश के कईं हिस्सों में पंचायती राजव्यवस्था के तहत ग्राम स्वराज की भावना जमीन पर पूरी तरह ना उतर पाई हो, लेकिन उत्तराखंड में ग्राम प्रधान, ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत की राजनीति से आज की टाप लीडरशिप तैयार हुई है.

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    आज राष्ट्रीय पंचायत राज दिवस है. देश के कईं हिस्सों में पंचायती राजव्यवस्था के तहत ग्राम स्वराज की भावना जमीन पर पूरी तरह ना उतर पाई हो, लेकिन उत्तराखंड में ग्राम प्रधान, ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत की राजनीति से आज की टाप लीडरशिप तैयार हुई है.

    थ्री टियर पालीटिक्स से शुरूआत कर जहां हरीश रावत मुख्यमंत्री बने, वहीं यशपाल आर्य और बिशन सिंह चुफाल क्रमश: कांग्रेस और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बनने में कामयाब हुए हैं.

    उत्तराखंड समूची हिंदी बेल्ट का इकलौता ऐसा राज्य है, जहां त्रिस्तरीय पंचायत राजनीति की मजबूत बुनियाद पर, कांग्रेस और बीजेपी समेत अन्य पार्टियों के टाप लीडर अपना अपना झंडा बुलंद कर रहे हैं.

    कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम हरीश रावत की सियासत की शुरूआत कभी अल्मोडा जिले में ब्लाक प्रमुख से हुई थी. जिसके बाद रावत पहले तो लोकसभा एवं राज्यसभा में सांसद बने. फिर केंद्र में मंत्री और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री. इसके पहले राज्य गठन के बाद हरीश रावत कांग्रेस के प्रथम प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं.

    उत्तरप्रदेश और अब उत्तराखंड में अजेय रहे कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह भी पहले ब्लाक प्रमुख रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि वो राज्य गठन के बाद बनी कांग्रेस की दोनों सरकारों में पंचायती राज मंत्री भी रहे हैं.

    पिछली विधानसभा में स्पीकर रहे गोबिंद सिंह कुंजवाल भी उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में विधायक बनने से पहले अल्मोडा जिले में ब्लाक प्रमख रहे हैं.
    मौजूदा विधानसभा में कांग्रेस के उपनेता और रानीखेत विधायक करना माहरा की राजनीति की शुरूआत भी ब्लाक प्रमुख से हुई है.

    इसी तरह धारचूला से कांग्रेस विधायक हरीश धामी भी क्षेत्र पंचायत सदस्य रहे हैं.
    पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत फक्र के साथ कहते हैं कि उन्होंने माइक्रो पालिटिक्स का ककहरा ब्लाक प्रमुख रहते ही सीखा था.

    ये तो बात रही कांग्रेस के उन चुनिंदा नेताओं की जो कि थ्री टियर पंचायती राज व्यवस्था से तपकर बुलंदी पर पहुंचे. अब थोडा बात करते हैं कि भारतीय जनता पार्टी नेताओं की

    डीडीहाट के मौजूदा विधायक बिशन सिहं चुफाल पहले ग्राम प्रधान और फिर ब्लाक प्रमुख रहे हैं. उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों में विधायक रहने के अलावा चुफाल खंडूरी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं. ग्राम प्रधान से सियासत शुरू करने वाले चुफाल बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

    मौजूदा त्रिवेंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य की राजनीति भी नैनीताल जिले में ग्राम प्रधान से ही शुरू हुई थी. बीजेपी का दामन थामने से पहले यशपाल स्पीकर और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

    मौजूदा विधायक और पूर्व मंत्री बलबंत सिह भौर्याल भी पहले बागेश्वर में जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं. मौजूदा विधायक गोपाल रावत, सुरेंद्र नेगी, मगन लाल शाह एवं दलीप रावत की सियासत की शुरूआत ब्लाक प्रमुख से हुई.

    वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत का कहना है कि त्रिस्तरीय पंचायत राजनीति से कांग्रेस बीजेपी की लीडरशिप तो पैदा हुई, लेकिन पंचायतों में 50 फीसदी आरक्षण के चलते महिला नेतृत्व भी विकसित हुआ है.

    इस फेहरिस्त में और भी तमाम नाम हैं, जोकि ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत से तप कर दलगत राजनीति में स्थापित हुए हैं. यानि कहा जा सकता है कि उत्तराखंड में आज की टाप लीडरशिप का बडा हिस्सा थ्री टियर पंचायत पालीटिक्स की बुनियाद पर खडा है.

    Tags: Harish rawat, Uttarakhand news, Yashpal Arya

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