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Uttarakhand Culture : पिछले साल रस्म अदायगी थी, इस बार ऐतिहासिक ढंग से होगा उत्तरायणी मेला

Uttarakhand Culture : पिछले साल रस्म अदायगी थी, इस बार ऐतिहासिक ढंग से होगा उत्तरायणी मेला

चुनाव के चलते आचार संहिता से प्रभावित होगी उत्तरायणी मेले की रूपरेखा.

चुनाव के चलते आचार संहिता से प्रभावित होगी उत्तरायणी मेले की रूपरेखा.

Kumaon Culture : कपकोट में उत्तरायणी मेला 14 जनवरी से शुरू होता है और इस बार कोरोना (Corona in Uttarakhand) का कहर थमने के कारण इसे पौराणिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्तर पर मनाए जाने की तैयारी है. मेला कितने बड़े स्तर पर आयोजित किया जाए और कैसे? इस बारे में एक बड़ी बैठक हुई, जिसमें तमाम विभागों को बताया गया कि कौन सी व्यवस्थाएं कैसे की जानी हैं. प्रशासन के इस आयोजन में इस बार मुख्यमंत्री (Chief Minister of Uttarakhand) या कौन से मंत्री शामिल हो सकेंगे, इसे लेकर अभी पसोपेश है क्योंकि आचार संहिता (Code of Conduct) की स्थिति स्पष्ट से ही यह तय हो सकेगा.

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    सुष्मिता थापा
    बागेश्वर. ऐतिहासिक, धार्मिक, व्यवसायिक एवं पौराणिक महत्व का उत्तरायणी मेला इस बार धूमधाम के साथ मनाया जाएगा. मेले के दौरान नगर समेत बागनाथ मंदिर आदि प्रमुख स्थानों में भव्य सजावट की जाएगी. गत वर्ष कोरोना के चलते मेला मात्र धार्मिक रूप में ही मनाया गया. इस बार मेला अपने ऐतिहासिक स्वरूप में मनाया जाएगा. विकास भवन सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी विनीत कुमार ने कहा कि उत्तरायणी मेला राज्य की पहचान है, जिसे शान्तिपूर्वक ढंग से सम्पन्न कराने के लिए सबका सहयोग लिया जाएगा. खास बात यह है कि मेले के समय तक अगर विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लगी तो यह मेला प्रशासन करवाएगा.

    कुमार के मुताबिक बागनाथ मन्दिर व अन्य मंदिरों की सजावट फूलों के साथ-साथ विद्युत मालाओं से की जाएगी. कुमार ने जिला पर्यटन अधिकारी को निर्देश दिए कि विदेशों से आने वाले पर्यटकों को भी उत्तरायणी मेले में लाने का प्रयास किया जाए ताकि सांस्कृतिक पहचान एवं धरोहर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति मिले.

    उत्तरायणी मेले में ये होंगे बड़े आकर्षण
    जिलाधिकारी ने मेले को भव्य तौर पर आयो​जित करने के लिए जो निर्देश दिए, उन्हें इन पॉइंट्स में समझिए.

    1. मेले में स्थानीय कलाकारों को पारम्परिक विधाओं को उजागर करने का मौका मिले.
    2. झोड़ा, चांचरी, छपेली, स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन प्राथमिकता से हो.
    3. मेले के लिए सभी विभाग खेत मैदान में स्टॉल लगाना सुनिश्चित करें.
    4. मेले के दोरान विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं.

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    कुमाऊं के प्रसिद्ध उत्तरायणी मेले में कई तरह के सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं.

    जिलाधिकारी ने उन्होंने लोक निर्माण विभाग को सड़कें और पुल बेहतर करने के निर्देश दिए. यातायात व्यवस्था पर उपजिलाधिकारी व मेला अधिकारी हरगिरि ने मेले को लेकर बसों व टैक्सियों के ट्रैफिक संबंधी प्लान रखा. बैठक में तय किया गया कि यातायात व्यवस्था इस प्रकार हो कि मेले में आने वाले लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े. इसके अलावा, सफाई व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था, सुरक्षित खाद्य सामग्री वितरण आदि सुनिश्चित करने के निर्देश भी बैठक में दिए गए.

    इस मेले के आयोजन को लेकर विधायक चंदन राम दास ने कहा कि पिछले साल मेला कोविड के चलते भव्य रूप से आयोजित नहीं किया जा सका था. दास ने सभी जनप्रतिनिधियों एवं व्यापारियों से सहयोग की अपील की. नगरपालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने कहा कि उत्तरायणी मेले को भव्य एवं आकर्षक बनाने के लिए पालिका काम कर रही है. मेले में कुछ नयापन लाने के लिए भरपूर प्रयास किया जाएगा.

    Tags: Bageshwar News, Culture, Religious Places, Uttarakhand news, Uttarakhand Tourism

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