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कमेटी गठन के साथ ही संजीवनी बूटी पर बहस जारी
Bageshwar News in Hindi

ETV UP/Uttarakhand
Updated: July 30, 2016, 6:50 PM IST
कमेटी गठन के साथ ही संजीवनी बूटी पर बहस जारी
file photo

राज्य सरकार ने संजीवनी बूटी को खोजने के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन तो कर दिया लेकिन हिमालय में मौजूद इस रहस्यमयी और चमत्कारी जड़ी बूटी को कहां और कैसे खोजा जाएगा यह सबसे बड़ा सवाल है.

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राज्य सरकार ने संजीवनी बूटी को खोजने के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन तो कर दिया लेकिन हिमालय में मौजूद इस रहस्यमयी और चमत्कारी जड़ी बूटी को कहां और कैसे खोजा जाएगा यह सबसे बड़ा सवाल है.

संजीवनी बूटी पर राज्य सरकार की सक्रियता के बाद एक बार फिर इस मुद्दे पर बहस शुरु हो चुकी है. रामायण काल में जब भगवान राम और रावण के बीच युद् चल रहा था तो मेघनाथ के भयंकर अस्त्र प्रयोग के कारण लक्ष्मण मूर्क्षित हो गए.

वैद्यराज सुषेण के कहने पर जामवंत ने हनुमान को हिमालय से संजीवनी बूटी लाने को कहा. हनुमान संजीवनी की तलाश में जब हिमालय आए और संजीवनी बूटी की तलाश करने लगे तो असंख्य जुड़ी बूटियों को देख भ्रमित हो गए.

द्रोणागिरि पर्वत पर पहुचकर उन्होंने संजीवनी बूटी खोजनी शुरु की लेकिन वो चमत्कारिक जडी बूटी कहां है वे पहचान नहीं सके. हनुमान ने द्रोणागिरि गांव में मौजूद एक वृद्व महिला से संजीवनी बूटी के बारे में पूछा तो बुजुर्ग महिला ने द्रोणागिरि पर्वत की ओर इशारा करते हुए हनुमान को संजीवनी का पता बताया फिर हनुमान द्रोणागिरि पर्वत का एक टुकडा उठाकर अपने साथ ले गए.

तभी से द्रोणागिरि के लोग हनुमान से नाराज है और आज भी इस गांव में हनुमान की पूजा अर्चना प्रतिबंधित है. ग्रामीण मानते है कि हनुमान ने ही उनके अराध्य पर्वत द्रोणागिरि को खंडित किया.इसके बाद द्रोणागिरि में आज भी महिलाएं द्रोणागिरि पर्वत की पूजा नहीं करती. सालों से संजीवनी बूटी की तलाश की जा रही है. द्रोणागिरि के लोगों का मानना है कि आज भी संजीवनी बूटी इस क्षेत्र में स्थित है.समुद्रतल से 14 हजार फीट की ऊचाई पर स्थित द्रोणागिरि गांव चमोली गढ़वाल की नीति घाटी में स्थित है.

राज्य सरकार ने इसकी खोज के लिए कमेटी का गठन तो कर दिया लेकिन संजीवनी बूटी की खोज कब तक हो पाएगी ये खुद सरकार को भी पता नहीं होगा.दुनिया भर में संजीवनी बूटी पर शोध और बहस जारी है. कई वैज्ञानिकों का मानना है कि संजीवनी कई जड़ी बूटियों को संग्रह तो कई इसे मात्र एक ही जड़ी बूटी मानते है. रामायण में जिस चमत्कारिक जड़ी बूटी का वर्णन किया गया है वो बूटी रात के समय चकमती है. यह सच है कि हिमालय में आज भी कई बहुमुल्य जड़ी बूटियां मौजूद है जिनपर आज तक शोध नहीं हो पाया है तो क्या संजीवनी बूटी भी उसी में शामिल है.

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First published: July 30, 2016, 6:50 PM IST
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