अजीबो-गरीब वजहों से हड़ताल करने वाले वकीलों पर कार्रवाई करे बार काउंसिलः सुप्रीम कोर्ट
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अजीबो-गरीब वजहों से हड़ताल करने वाले वकीलों पर कार्रवाई करे बार काउंसिलः सुप्रीम कोर्ट
मध्यप्रदेश के सियासी संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला. (फाइल फोटो)

पाकिस्तान के स्कूल में बम विस्फोट, नेपाल में भूकंप, रिश्तेदार की मौत या बाढ़ आने को लेकर भी देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर के वकीलों के हड़ताल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी.

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दिल्ली. उत्तराखंड के तीन जिलों में साढ़े तीन दशक से अजीबो-गरीब वजहों से वकीलों के हड़ताल पर जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है. अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य बार काउंसिल को वकीलों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है. पिछली सुनवाई में यह सामने आया था कि देहरदून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर के वकील अजीब कारणों से हड़ताल पर चले जाते हैं. पाकिस्तान के एक स्कूल में बम विस्फोट, नेपाल में भूकंप, कवि सम्मेलन या बाढ़ को लेकर वकीलों के हड़ताल करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी.

हड़ताल अवैध
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहुंचा तो शीर्ष अदालत ने कहा कि यह कोई मजाक है क्या? वकीलों के हड़ताल या कार्य बहिष्कार करने को सर्वोच्च अदालत ने ‘अवैध’ ठहराया. आपको बता दें कि 25 सितंबर, 2019 के अपने फैसले में हाईकोर्ट ने विधि आयोग की 266वीं रिपोर्ट का उल्लेख किया था, जिसमें वकीलों द्वारा हड़तालों के कारण से कार्य दिवसों के नुकसान के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था. इसमें कहा गया था कि वकीलों का यह रवैया अदालतों के कामकाज को प्रभावित करता है और मुकदमों का पहाड़ खड़ा करने में योगदान देता है.

विधि आयोग के अनुसार साल 2012 से 2016 के बीच देहरादून जिले में वकीलों ने जहां 455 दिनों की हड़ताल की थी. वहीं इसी अवधि के दौरान हरिद्वार में 515 दिन वकील हड़ताल पर रहे थे. हाईकोर्ट ने वकीलों की हड़ताल को गैर-कानूनी करार दिया था.



ऐसे-ऐसे कारण


विधि आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि स्थानीय, राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में अदालतों के कामकाज की कोई प्रासंगिकता नहीं होने और न्यायोचित कारणों से शायद ही कभी वकीलों के खिलाफ हमले हुए हों. लेकिन उत्तराखंड के वकील पाकिस्तान के स्कूल में बम विस्फोट, श्रीलंका के संविधान में संशोधन, अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद, अधिवक्ता की हत्या/हमला, नेपाल में भूकंप, वकीलों के निकट संबंधियों की मृत्यु पर शोक व्यक्त करने, एकजुटता दिखाने के लिए हड़ताल पर रहे.

यही नहीं दूसरे राज्य के बार संघों के वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं के आंदोलनों का नैतिक समर्थन करने, भारी बारिश और यहां तक ​​कि कवि-सम्मलेन तक के लिए हड़ताल की गई. हाईकोर्ट  ने अपने फैसले में यह दर्ज किया था. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा और एमआर शाह की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई थी.

हालात खराब
पीठ ने कहा कि यह देश में हर जगह हो रहा है. स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना ​​शुरू करने के लिए यह एक उचित मामला है. बार एसोसिएशन कैसे कह सकता है कि वे हड़ताल जारी रखेंगे? पीठ ने कहा, “हालात खराब हो गए हैं. आदेश (हाईकोर्ट का) पूरी तरह से उचित है. हम इस तरह की चीजों की अनुमति नहीं दे सकते. हर कोई हड़ताल पर जा रहा है. आज, देश के हर हिस्से में हड़ताल चल रही है. हमें अब बहुत कठोर होना चाहिए. आप कैसे कह सकते हैं कि हर शनिवार को हड़ताल पर रहेंगे?” पीठ ने कहा, “आप एक मजाक कर रहे हैं. अधिवक्ता के परिवार के सदस्य की मृत्यु हो जाती है और पूरे वकील हड़ताल पर चले  जाते हैं. यह क्या है?”

हड़ताल बंद
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि देहरादून जिले में हड़ताल बंद हो गई है. अपने फैसले में हाईकोर्ट नोट किया था कि 35 वर्षों से अधिक समय से शनिवार को कार्य बहिष्कार के विरोध के ‘इस अजीबोगरीब रूप की उत्पत्ति’ पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हुई थी जिसमें पहले उत्तराखंड राज्य आता था.

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First published: February 28, 2020, 3:03 PM IST
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