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बैराज से ज़िंदा होगी रिस्पना

बैराज से ज़िंदा होगी रिस्पना

रिस्पना नदी जैसी कई नदियों के किनारों पर अस्थाई और स्थाई कब्ज़े हैं और अधिकतर मलिन बस्तियां भी नदियों के किनारे ही हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)

रिस्पना नदी जैसी कई नदियों के किनारों पर अस्थाई और स्थाई कब्ज़े हैं और अधिकतर मलिन बस्तियां भी नदियों के किनारे ही हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)

  • News18India
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    बस एक नाले की तरह दिखने वाली रिस्पना नदी एक बार फिर पानी से लबालब नज़र आ सकती है. सिंचाई विभाग कैचमेंट एरिया ट्रीटमेंट प्लान पर काम कर रहा है. इसके लिए एक बैराज का निर्माण किया जाएगा. जहां बरसात के पानी को रोका जा सके.

    सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता एके दिनकर के अनुसार केंद्र सरकार के विभाग सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के साथ राज्य के कई अन्य विभाग मिलकर कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं. किस विभाग को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी यह तय किया जाना अभी बाकी है. लेकिन कार्ययोजना तैयार करने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग के पास है.

    इसके अलावा रिस्पना नदी के किनारे से अतिक्रमण हटाने का जिम्मा राजस्व विभाग को सौंपा जा सकता है.

    इससे पहले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी रुड़की ने रिस्पना और बिंदाल नदियों पर सर्वेक्षण के लिए सवा करोड़ रुपये खर्च की बात की थी. बजट आवंटन न होने की वजह से सर्वेक्षण का काम पूरा नहीं हो सका.

    इस बारे में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से भी बातचीत भी हुई. इसके बाद मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग को इस बारे में कार्य योजना बनाने के लिए कहा.

    कभी रिस्पना में साल भर पानी रहता था. नई कार्ययोजना में सौंग डैम से रिस्पना में पानी की निकासी पर भी विचार किया जा रहा है. ताकि रिस्पना को पुनर्जीवित किया जा सके.

     

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