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कोड भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं आरटीओ ऑफिस के दलाल

कोड भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं आरटीओ ऑफिस के दलाल

देहरादून के संभागीय परिवहन कार्यालय के परिसर में दर्जनों दलाल सक्रिय हैं. दलाल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, वाहनों के फिटनेस, आरसी ट्रांसफर, वीआईपी नंबर दिलवाने का काम कर रहे हैं.

देहरादून के संभागीय परिवहन कार्यालय के परिसर में दर्जनों दलाल सक्रिय हैं. दलाल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, वाहनों के फिटनेस, आरसी ट्रांसफर, वीआईपी नंबर दिलवाने का काम कर रहे हैं.

देहरादून के संभागीय परिवहन कार्यालय के परिसर में दर्जनों दलाल सक्रिय हैं. दलाल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, वाहनों के फिटनेस, आरसी ट्रांसफर, वीआईपी नंबर दिलवाने का काम कर रहे हैं.

    देहरादून के संभागीय परिवहन कार्यालय के परिसर में दर्जनों दलाल सक्रिय हैं. दलाल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने, वाहनों के फिटनेस, आरसी ट्रांसफर, वीआईपी नंबर दिलवाने का काम कर रहे हैं.

    आरटीओ कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आए आवेदकों का कहना है कि आरटीओ परिसर में कई ऐसे दलाल हैं, जो कोड भाषा का इस्तेमाल करते हैं और मोटी रकम लेकर फौरन सरकारी काम करने की बात करते हैं.

    वहीं जब इस बात एआरटीओ संदीप सैनी से बात की गई तो उनका कहना है कि रोजाना आरटीओ कार्यालय में करीब 150 नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए लोग आते हैं. 200 से 300 लोग रोज ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आते हैं. इसी तरह से नए-पुराने ड्राइविंग लाइसेंस के साथ भारी संख्या में लोगों का दिनभर आना जाना लगा रहता है, और ऐसे में दलालों की पहचान करना मुश्किल हैं.

    वहीं उन्होंने कहा कि अगर कोई शिकायत आएगी तो जरूरी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. उनका कहना है कि पुलिस को इस बात को सुनिश्चित कराना चाहिए कि आखिर दलालों से परिसर को कैसे मुफ्त रखा जा सकें.

    उन्होंने कहा कि फिलहाल यह काम आरटीओ कार्यालय का नहीं है कि कौन परिसर में आ रहा है और कौन परिसर से जा रहा है. ऐसे में बेहतर होगा कि पुलिस अपने संसाधनों का सही इस्तेमाल करते हुए दलालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें.

     

     

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